सुविचार 1959

सबसे ज्यादा गुस्सा उस वक़्त आता है,

जब कोई खुद गलत होकर भी आपको गलत साबित करने की कोशिश करे.

मस्त विचार 1834

हर कोई अपना भाग्य बनाने में लगा है,

और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.

मस्त विचार 1833

आज तुम्हारे पास वही है, जिसके लिए तुमने प्रयास किया,

और इससे पहले तुम्हारी नई माँग की लहर इसको डुबा दे … इसे जी लो.

सुविचार 1958

कितना ही समय बीत जाए जब तक हम किये कर्म का फल नहीं भोग लेते वो कर्म क्षीण नहीं होता, शुभ अशुभ जैसे भी हम कर्म करते हैं उनका फल भोगना ही पड़ता है ! अतः कर्म करते समय उसके फल की चाह ध्यान में नहीं रखे किन्तु उसके परिणाम को कभी न भूले !!!

मस्त विचार 1832

“नाम” और “बदनाम” में क्या फर्क है ?

नाम” खुद कमाना पड़ता है “बदनामी” लोग आपको कमा के देते हैं.

सुविचार 1957

निखर कर बिखर जाये वो “कर्तव्य” है,

और जो बिखर कर निखर जाए वो “व्यक्तित्व” है…!!

सुविचार 1956

कोई एक छोटा सा नकारात्मक विचार, हमें कई दिनों तक निराश कर सकता है

और एक छोटा सा सकारात्मक विचार, हमारी निराशा को पल भर में दूर कर सकता है.

मस्त विचार 1831

आसमाँ के चाँद के हकदार हैं हम,

यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.

सब्र कर जुल्मी की शामत भी आती होगी,

_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!

सुविचार 1955

बेईमानों में एक ग्रंथि होती है,

अपनी बेईमानी को अपनी बुद्धिमानी समझ़ने की.

जिनके भीतर ईमान ज़िंदा है, वो ही पूरी तरहा ज़िंदा हैं,

बेईमान को तो वहम है जिंदगी का.

मस्त विचार 1830

मन ख्वाहिशों मे अटका रहा, और ज़िन्दगी मुझे जी कर* *चली गई.
लगता है ..जैसे मेरा जीवन ..जिंदगी के किन्ही बहुत खूबसूरत ..बीते हुए पलों में ..अटका हुआ है..!!
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