मस्त विचार 1899
मेरा अपना साया मुझे धुप में आने के बाद मिला.
मेरा अपना साया मुझे धुप में आने के बाद मिला.
वरना हकीकतें तो अक्सर रुला देती है.
जीवन में जब भी स्थितिया बिगड़ जाए, मनमाफिक न हो, कई कोशिशो के बावजूद काम नहीं बन रहा हो तो शान्ति और धैर्य धारण करिए, ऐसे समय को अपनी सहन शक्ति, एकाग्रता और ज्ञान बढाने में लगाइए ! अच्छी पुस्तको को पढ़िये, ध्यान करिए और कुछ नहीं तो बिलकुल शांत, मौन और सहज रहकर अपने कार्य करते रहिये, आपको आश्चर्य होगा किन्तु कुछ समय व्यतीत होने के बाद आपको लगेगा की अच्छा हुआ जो शांत रहे, व्यर्थ क्रोध नहीं किया, क्यूंकि अक्सर इंसान इनसे उभर जाता है किन्तु इस दौरान उसके द्वारा कही गई गलत बातें और गलत कार्य उसे और दुसरो को याद रहते हैं ! जिनका स्मरण अक्सर दुखदायी होता है !!!
और अनुभव हमारे जीवन की सीख है.
किसी के मन को खुश न कर सके, तो सब व्यर्थ है.
कभी हारना तो कभी झुकना तो, कभी सहना, और कभी कभी खुद को हराना भी पड़ता है.
कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके रास्ते में क्या आता है, सकारात्मक रहें और आभारी रहें, _ कभी भी उम्मीद न खोएं, जिस चीज में आप विश्वास करते हैं उसके लिए लड़ना कभी बंद न करें.
मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.
आम पककर स्वयं गिर जाते है…
इसी तरह जब हमारी सत्य की समझ बढ़ जाती है…
तो स्वयं ही हमारा भटकना बंद हो जाता है…
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,
और लोगों को लगा की बदल गए हम.