मस्त विचार 1747
वक़्त को दवा कहा और ख्वाहिशों से परहेज सुनाया.
वक़्त को दवा कहा और ख्वाहिशों से परहेज सुनाया.
नजदीकियां कितनी खास थी….!!
यद्यपि कोई दुखी होना नहीं चाहता फिर भी दुखी होता है, दुखी होना ही पड़ता है ! जीवन में सुख और दुःख दोनों आते जाते रहते हैं इन्हें भोगना ही पड़ता है, लेकिन इनको भोगने में एक फर्क यह होता है की सुख भोगते समय हमें वक़्त का पता ही नहीं चलता, इसलिए सुख हमें कम मालूम होता है, और दुःख भोगते समय हमें लम्बा और भारी मालूम होता है, इसलिए दुःख ज्यादा मालूम होता है ! अतः विवेक से काम लिया जाए तो दुःख की महत्ता और उपयोगिता को समझ कर दुःख की पीड़ा को कम किया जा सकता है !!!
किसी भी तरह की ग़लतफ़हमी दिल में न पालें, इसके आधार पर कोई भी सम्बन्ध न तोड़ें, जब भी किसी बात पर शंका हो, बातचीत के जरिये उसे सुलझाने का प्रयास करें, याद रखें ज्यादात्तर गलतफहमी हमारे शंकालु दिमाग या परिस्थितियों की उपज होती है !!!
“दुआ” मिले बड़ो से.. “साथ” मिले अपनों से..
“खुशियां” मिले जग से.. “रहमत” मिले रब से..
“प्यार” मिले सब से.. “यही “दुआ” है रब से..
सब खुश रहे आप से और आप खुश रहे सबसे.!!
“दुनियां के रेन बसेरे में..पता नही कितने दिन रहना है”
“जीत लो सबके दिलो को..बस यही जीवन का गहना है”..!!
मेरे चहरे पर कोई जंची ही नहीं.
जब हकीकत यही है, तो इंसान को गरूर किस बात का है.