मस्त विचार 1825
मिला तो रब भी नहीं, पर इबादत कहाँ रुकी हमसे..
मिला तो रब भी नहीं, पर इबादत कहाँ रुकी हमसे..
खुदा ने हमें दो उपहार दिये:- एक अच्छा जीवन जीने का विकल्प, और इसे सर्वश्रेष्ठ बनाने का मौका.
“भवनो” से नही “भावना” से महान बनता है.
“उच्चारण” से नही “उच्च – आचरण” से महान बनता है….
बदल गए हैं वो लोग जो सुबह शाम हाल पूछा करते थे.
; जबकि होना ये चाहिए कि हँसी अपने भीतर से आनी चाहिए..
कमजोरों से तो लोग सहानुभूति रखते हैं.
अगर ये सच है तो अपनी किस्मत में दर्द कौन लिखता है !!
तकलीफ आती हैं पर टिकती नहीं…..
तेरा साया है सदा साथ हमारे….
तेरी नजर पड़ती है हम पर… मगर दिखती,, नही…….