मस्त विचार – दूर निकलना छोड़ दिया है – 1815
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…मैंने चलना ही छोड़ दिया है.
फासलें अक्सर रिश्तों में…अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने…अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है.
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ …खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने….अपनापन ही छोड़ दिया है.
याद तो करता हूँ मैं सभी को…और परवाह भी करता हूँ सब की,
पर कितनी करता हूँ…बस बताना छोड़ दिया है.
थोड़ा थक सा जाता हूँ अब मैं…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
सुविचार 1940
*यदि आप किसी बात से सहमत नहीं है तो .. *चर्चा करिये*.
*यदि आप को कुछ पसंद नहीं है .. तो *बताइये*.
*लेकिन चुप रह कर किसी *निर्णय तक मत पहुँचिये*.
Collection of Thought 559
एक सफल जीवन वह है जिसकी मृत्यु के समय मन में कोई इच्छा नहीं बची हो.
सुविचार 1939
मस्त विचार 1814
*ज्यादा “होशियार” तो हमेशा* *’उलझा’ हुआ रहता है…!*
सुविचार 1938
कंजूस को दान देना बुरा लगता है, लोभी को मांगने वाला बुरा लगता है, चोरों को प्रकाश बुरा लगता है, मुर्ख को समझाने वाला उपदेशक बुरा लगता है, कर्जदार को तगादा बुरा लगता है ,रूपवान को बुढ़ापा अच्छा नहीं लगता, निर्धन को धनवान अच्छा नहीं लगता, जिसका मन- शोक चिंता से ग्रसित और व्याकुल हो उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता, अतः शोक और चिंता से बचे !!!
मस्त विचार 1813
_ निर्भर आप पर करता है कि आप प्यार बोते हैं या नफरत.!!
मस्त विचार 1812
बड़ी कशमकश मे हूँ ऐ जिंदगी कहाँ हूं और कहाँ नही हूँ…!!!




