सुविचार 2006
पैसा और सफलता इंसान को बदलते नहीं हैं, वे सिर्फ उसे बढ़ा देते हैं जो उनमे पहले से मौजूद है.
वो अल्फ़ाज, जिसे सुकून कहते हैं.
इसलिए रचनात्मक, क्रियात्मक कार्य करते रहें. खुल कर जीयें ! खिलकर जीयें ! सड़ कर नहीं जीना चाहिये. मन की पुरानी आदत है, वह खिलानेवाली बातों को भूल ही जाता है.
जो कभी ना खत्म होगी, वो ही दिल की बात हूँ मैं !!
मेरी नजर से देखो हर दिल में खुदा है.
वक़्त की बरसात है कि….थमने का नाम नहीं ले रही…
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार,
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार…जीना इसी का नाम है.
अतः सुंदर चीज के साथ रहें और आप भी सुंदर बन जाएँ.