सुविचार 1837

यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लें,

कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी “अन्न दान” है.

सुविचार 1836

लाख जमाने भर की डिग्रीयाँ हो हमारे पास,

अपनों की आँखों से छलकते आँसू नहीं पढ़ पाये तो “अनपढ़” हैं हम.

सुविचार 1834

जब कहने के लिए हमारे पास कुछ भी नहीं हो, तो चुप रहना ही एकमात्र बेहतर विकल्प है.
error: Content is protected