सुविचार 1915

स्वतंत्र मन……

जिम्मेदारियां निभाते हुए, जवाबदारियाँ संभालते हुए, मन को सदा स्वतंत्र और अप्रभावित रखना – यह भी एक कला है, साधना है !!!

मस्त विचार 1790

मैं लिखता हूँ हर रंग के लिए

अपने अंग-अंग के लिए

मैं अपना वर्तमान, भविष्य और इतिहास लिखता हूँ

सुख, दुःख, के साथ प्रेम का अहसास लिखता हूँ

बात जो अनकही है

उसको शब्दों का देकर आकार लिखता हूँ

जो दिलो में घुट गयी सबके, उसे बेज़ार लिखता हूँ

जो नियते छुपाई गई सफ़ेद-पोशी में

उनके कपडे उतार लिखता हूँ

आ गयी जिन अनुभवो से बालो में सफेदी

उन अनुभवो की कालिख उतार लिखता हूँ

कुछ तो लोग कहेंगे, कहने दो

खुदगर्ज हूँ मैं सर झुका नहीं सकता

जीवन जीकर उनको परेशान हर बार करता हूँ.

Collection of Thought 554

The Mirror Never Loses Its Ability To Reflect , Even If It Is Broken Into Thousand Pieces,So Never Change Your Originality..

दर्पण कभी भी प्रतिबिंबित करने की क्षमता नहीं खोता है, भले ही वह हजारों टुकड़ों में टूट जाए, इसलिए अपनी मौलिकता को कभी न बदलें.

मस्त विचार 1789

तेरी रजा को समझ पाऊँ,

ये हुनर मुझमें नहीं है मेरे यार,

जिंदगी को आजमाने के बाद बस इतना जाना है,

कि तूने जो कुछ भी किया मेरे भले के लिए किया है.

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