सुविचार 1909

मनुष्य के सारे दुःख-दर्दों की जड़ उसके ‘मन’ के उपद्रव हैं. अतः विश्व में से ‘‘दुःख-दर्द’’ गायब करने का एक ही उपाय है कि मनुष्य को ‘मन’ की कार्यप्रणाली बाबत ठीक से शिक्षित किया जाए.
अगर लोग शिक्षित नहीं हैं, तो वे सवाल नहीं कर सकते ;

_यदि वे सवाल नहीं कर सकते, तो वे कुछ भी नहीं बदल सकते.!!

सुविचार 1908

प्रेम में जयपराजय नहीं होती. वहां तो दो का भेद नष्ट हो कर एकीकरण हो जाता है. – आचार्य चतुरसेन

सुविचार 1907

जीवन में अगर “खुश” रहना है तो,

स्वयं को एक “शांत सरोवर” की तरह बनाएं…..

जिसमें कोई “अंगारा” भी फेंके तो..खुद बख़ुद ठंडा हो जाए…..!!!!

मस्त विचार 1781

ना जाने क्या कमी है मुझमें, ना जाने क्या खूबी है उसमें,

वो मुझे याद नहीं करता, मैं उसको भूल नहीं पाता.

सुविचार 1906

हम सब कुछ नहीं बदल सकते, और कभी-कभी हम बस इतना ही कर सकते हैं कि _उसे रहने दें !

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