सुविचार 1970
दिल के सही होने पर उसका मन के साथ ऐसा तालमेल बैठता है कि फिर कोई सन्देह नहीं रह जाता.
आप जो भी काम करें, ह्रदय से उसकी स्वीकृति ज़रूर ले लें,
भला ह्रदय के संकेतों की उपेछा कौन कर सकता है.
भला ह्रदय के संकेतों की उपेछा कौन कर सकता है.
क्योकि….वो आपके पीछे अपने जीवन के वो पल खर्च कर रहा है, जो उसको कभी वापस नही मिलेंगे.
खुशी हो या ग़म, बाँट लेंगे आधा आधा हम.
इस पर पैर रखते हो तो ही चुभते हैं.
आख़री वक़्त कह न पाए ये कफ़न ठीक नहीं.
_ जिन्दगी जैसी भी है ,,, आखिर है तो मेरी ..
जब आप अपना आपा या आत्मविश्वास खोए बिना नकारात्मक टिप्पणियों को सुनने की क्षमता विकसित करते हैं,
इसका मतलब है कि अब आप परिपक्व और सही मायने में शिक्षित हो गए हैं.