मस्त विचार 1851
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,
हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की जरूरत नहीं होती.
जो बढ़ते हैं जमाने में, अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए, किसी रथ की जरूरत नहीं होती.
बल्कि इतना ही बोलो की लोग आप के बोलने का इन्तजार करें.
“यदि आप दूसरों के साथ कोमल होना चाहते हैं, तो पहले स्वयं के साथ कोमल बनें”
चिरागों के जलते ही…बुझा दी जाती हैं “तीलियाँ”.
जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती है.
सुना है दोस्तों के भी दोस्त होते हैं.