मस्त विचार 1842
आख़री वक़्त कह न पाए ये कफ़न ठीक नहीं.
आख़री वक़्त कह न पाए ये कफ़न ठीक नहीं.
_ जिन्दगी जैसी भी है ,,, आखिर है तो मेरी ..
जब आप अपना आपा या आत्मविश्वास खोए बिना नकारात्मक टिप्पणियों को सुनने की क्षमता विकसित करते हैं,
इसका मतलब है कि अब आप परिपक्व और सही मायने में शिक्षित हो गए हैं.
“अनचाहा” सुनने की ताकत होनी चाहिए.
_अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए और हमेशा सीखते रहने के लिए अपने काम का मूल्यांकन खुद करते रहना चाहिए.
If quality is present in the personality then it will automatically be included in the object.
कभी रोते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी.
न पूर्ण विराम सुख में, न पूर्ण विराम दुःख में,
बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी.
प्यार की डोर सजाये रखो, दिल को दिल से मिलाये रखो,
क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से,
मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से रिश्तों को बनाए रखो…
लेकिन असम्भव को सम्भव बना देते है…..