सुविचार 1697

यदि आप जीवन में सुखी होना चाहते हैं तो दूसरों का सुख बर्दाश्त करना सीख लीजिए.

मस्त विचार – “दास्तान- ए – दर्द” – 1572

“दास्तान- ए – दर्द”

दर्द को जब भी मैंने पुकारा है,

दर्द ने आकर मुझे सँवारा है,

दर्द के साथ ही मेरी दोस्ती है,

दर्द के साथ ही मेरा गुजारा है !

कोई शाम जब ये रूठ जाता है,

देर रात तक जब नहीं ये आता है,

बड़ी मिन्नत से इसे फ़िर बुलाता हूँ,

अपनी दोस्ती की याद दिलाता हूँ !

दर्द ये यार मेरा पुराना है,

बरसों का हमारा याराना है,

दिल में दर्द हो तो बात बनती है,

दर्द के पहलु में रात कटती है !

दर्द किसी का अपना कर तो देखो,

दर्द की आगोश में आकर तो देखो,

दर्द ही दर्द है जब ज़माने में,

क्या बुराई है इसे अपनाने में,

दर्द के साथ मुझे अब रहने दो,

लहु बनकर रगों में बहने दो,

रौशनाई उस लहू से बनाऊँगा,

दर्द की दास्तान नई इक लिख जाऊँगा.

सुविचार 1696

हम अक्सर किसी की सफलता को उसकी किस्मत से जोड़ कर देख लेते हैं, लेकिन सफलता जितनी बड़ी होती है, तपस्या भी उतनी ही गहरी होती है.

मस्त विचार 1571

आलस्य से आराम मिल सकता है, _ पर यह आराम बड़ा महंगा पड़ता है.
आलस एक ऐसा सुख है _ जिसका परिणाम दुःख है..

सुविचार 1695

आप अपने जीवन में जो कुछ भी पाना चाहें, वह संभव है, यदि आप उसकी कीमत देने को तैयार हो जायें, जरुरी नहीं कि यह कीमत रुपये में हो, आपकी चाहत की कीमत आपका परिश्रम, धैर्य, योजना या कुछ और भी हो सकता है.

सुविचार 1694

जीवन की हर समस्या के भीतर एक उपहार छुपा होता है, इसलिये जब समस्या आये तो निराश मत होना. उसका अंत आपकी उम्मीद से बेहतर हो सकता है.

सुविचार 1693

अगर आपकी ख़ुशी की एकमात्र वजह ये है कि जो चीज आपके पास है, वो दूसरों के पास नहीं, तो इसे विकार कहेंगे. इस तरह के विकार से जितनी जल्दी छुटकारा पा लिया जाये उतना बढ़िया. इससे मिलने वाली प्रसन्नता छणिक होती है. नुकसान ज्यादा होता है और उसके बारे में पता बाद में चलता है.
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