सुविचार 1817
बिना चले मंजिल तक पहुंच जाओ, ऐसा संभव नहीं, आप को प्रयास तो करना पड़ेगा. ज्ञान तो आप को दिशा देगा, गति देगा, कहीं भटक रहे हो तो वह संभालेगा.
लेकिन उसके ख्वाब बड़े होने चाहिए.
उसके साथ खड़े रहने से अच्छा हैं, अकेले खड़ा रहना.
गरूर में रहोगे तो रास्ते भी न देख पाओगे.
आइए हम हमेशा एक – दूसरे से मुस्कान के साथ मिलें, क्योंकि मुस्कान ही प्यार की शुरुआत होती है.
और अच्छे लोगों की भीड़ नहीं होती.
जलवे दिखाते हैं…दोस्त तो क्या, दुश्मन भी याद रखते हैं.