Collection of Thought 498
Man is the artificer of his own happiness.
मनुष्य स्वयं अपने सुख का कर्ता है.
मनुष्य स्वयं अपने सुख का कर्ता है.
ताकि जीवन एक भव्य, मधुर गीत बन जाए.
यही रंग भरना हमारे कर्म हैं.
क्योंकि लोग सुनना नहीं, देखना ज्यादा पसंद करते हैं !!
एक महान दृष्टिकोण एक महान दिन बन जाता है, जो एक महान माह बन जाता है, जो एक महान वर्ष बन जाता है, जो एक महान जीवन बन जाता है.