सुविचार 1564
आजकल सत्तर प्रतिशत लोग दुखी इसलिए हैं कि, बोलते समय तो सोचते नहीं, क्या बोल रहे हैं. बोलने के बाद सोचते हैं, काश ये न बोला होता तो ऐसा न होता. इसलिए पहले सोचिए फिर बोलिये.
नज़र उसे ही पसंद करती है जो नसीब में नही होता.
खुशी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप अनुभव करते हैं; यह कुछ ऐसा है जो आपको याद है.
लेकिन कुछ लोग हमें बेजुबां समझ लेते हैं.
कल की कमियों को लेकर धैर्य न खोएं.
लेकिन हर कोई उसे देख नहीं पाता.
यदि आप हर भोकने वाले कुत्ते को पत्थर मारेंगें.
जरुरी ये है कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं.