सुविचार 1502
जिन्दगी जीने के लिए मिली थी, लोगों ने सोचने में गुजार दी.
वास्तविक सफलता उस कार्य में अपना जीवन कार्य ढूंढ़ना है _ जिससे आप प्यार करते हैं.
क्योंकि सम्मान अधिक समय तक आपका साथ देता है.
मंझधार नाव करके, करता न कोई पार है.
उनके नाम का “गुलाल” हवा में उड़ाया मैंने..
दूर से भी कुछ इस तरह.. अपने “रिश्ते” को निभाया मैंने..
ईर्ष्या प्रतिशोध की भावना को जन्म देती है, _ जो समय आत्म-सुधार के लिए उपयोग किया जा सकता था, वह दूसरों के बीमार होने की योजना बनाने में बर्बाद हो जाता है.
खिलना महकना ही जीवन की ऊँचाई है.