Collection of Thought 219
Correction does much, but encouragement does more.
सुधार बहुत करता है, लेकिन प्रोत्साहन अधिक करता है.
सुधार बहुत करता है, लेकिन प्रोत्साहन अधिक करता है.
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यों करना.
इसीलिए नहीं कि वो माफ़ी के लायक हैं..,
पर ये आपके अपने मन की *शान्ति* के लिए ज़रूरी है.
आप अपने लिए जो कर सकते हैं उसके लिए कभी भी दूसरे को परेशान न करें.
ज़िंदगी मेरी है तो फिर मर्जी तेरी क्यूँ..
न्याय अकेले एक पक्ष के लिए नहीं हो सकता, बल्कि दोनों के लिए होना चाहिए.
रास्ता खुद ब खुद दिखाती है !!!