Collection of Thought 163
किसी भी चीज की अधिकता उसके मूल्य को कम कर देती है.
किसी भी चीज की अधिकता उसके मूल्य को कम कर देती है.
मैं ज़ख्म खाता हूँ तो और निखर जाता हूँ………
अगर कोई आपको एक बार धोखा दे देता है, तो यह उनकी गलती है; अगर वे आपको दो बार धोखा देते हैं, तो यह आपकी गलती है.
उतनी जल्दी सही ज़िन्दगी जीना भी सीख जाते हैं.
सागर का पानी खारा रहता है, क्योंकि वो लेता रहता है.
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है, क्योंकि वो रुका रहता है.
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे, लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे.
नहीं मिलते जहाँ चोट के निशान…..
मैं छिपाना चाहता हूँ, घर से दफ्तर जाते _ दफ्तर से घर आते, वह एक बड़ी लंबी सी सूची _ जिसमें लिखा होता है _ दफ्तर जाते वक्त करना है क्या ? पर रोज मैं उस लंबी सूची के मुताबिक न कुछ कर पाता हूं _ न ला पाता हूं..
मैं छिपाना चाहता हूँ, कमीज की उघड़ी सिलाई, टूटे बटन, पेंट की तुरपाई, _ कभी इस कमीज को कभी उस पैर को बदल- बदल कर _ लेकिन आस्तीन से बाहर झांकती _ अंदर की धुलाई से लंबी हो गई बनियान की लटकती बाहें – दबे छुपे कह ही देती हैं _ बहुत कुछ..