मस्त विचार 977
पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं, जीवन अमृत्त कब हमको अच्छा लगता है, ज़हर हमें अच्छा लगता है खा लेते हैं.
पागल हैं हम अपनी नींद उड़ा लेते हैं, जीवन अमृत्त कब हमको अच्छा लगता है, ज़हर हमें अच्छा लगता है खा लेते हैं.
*एक तौलिया से पूरा घर नहाता था।*
*दूध का नम्बर बारी-बारी आता था।*
*छोटा माँ के पास सो कर इठलाता था।*
*पिताजी से मार का डर सबको सताता था।*
*बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था।*
*पूड़ी खीर से पूरा घर रविवार व् त्यौहार मनाता था।*
*बड़े भाई के कपड़े छोटे होने का इन्तजार रहता था।*
*स्कूल मे बड़े भाई की ताकत से छोटा रौब जमाता था।*
*बहन – भाई के प्यार का सबसे बड़ा नाता था।*
*धन का महत्व कभी कोई सोच भी न पाता था।*
*बड़े का बस्ता किताबें साईकिल कपड़े खिलोने पेन्सिल स्लेट स्टाईल चप्पल सब से छोटे का नाता था।*
*मामा – मामी नाना – नानी पर हक जताता था।*
*एक छोटी सी संदुक को अपनी जान से ज्यादा प्यारी तिजोरी बताता था।*
*~~ अब ~~*
तौलिया अलग हुआ, दूध अधिक हुआ,*
*माँ तरसने लगी, पिता जी डरने लगे,*
*बुआ से कट गये, खीर की जगह पिज्जा बर्गर मोमो आ गये,*
*कपड़े भी व्यक्तिगत हो गये, भाईयो से दूर हो गये,*
*बहन से प्रेम कम हो गया,*
*धन प्रमुख हो गया, अब सब नया चाहिये,*
*नाना आदि औपचारिक हो गये।*
*बटुऐ में नोट हो गये।*
*कई भाषायें तो सीखे मगर संस्कार भूल गये।*
*बहुत पाया मगर काफी कुछ खो गये।*
*रिश्तो के अर्थ बदल गये,*
*हम जीते तो लगते है*
*पर संवेदनहीन हो गये।*
*कृपया सोचें ,*
*कहां थे, कहां पहुँच गये।*
जब आप हवा की दिशा नहीं बदल सकते, तो बस अपने पाल को समायोजित करें.
हादसे कुछ भी नही है हौसलों के आगे…!
“अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके ! “कि सामने वाला गलत नही है ! “सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग है.
इसलिए हर पल खुश होकर जियो, व्यस्त रहो, पर साथ में मस्त रहो, सदा स्वस्थ रहो.
संघर्ष बिना ज़िन्दगी ये बस नाम की. मुकाम पर पहुँचा तू अपने वजूद को. हार जाएगा,परवाह की जो अंजाम की.
खुद ना रूठो पर सब को हँसा दो,
यही राज है ज़िन्दगी का, कि जियो और जीना सीखा दो.