मस्त विचार 4613
एक सफर एक मुसाफ़िर और धुंधले रास्ते ।
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
यही बीज आगे वृक्ष बनकर हमारे संचित कर्मों में जुड़ जाएंगे जिनका फल हमें भोगना ही होगा।
अपने लक्ष्यों के प्रति आक्रामक रहें, अपने लायक से कम कुछ भी स्वीकार न करें.
हम उन्हें जाने से नहीं रोक सकते…!!
मै जैसा था फिर मुझे वैसा कर दो ।।
एवंम किसी को मुझसे कोई उम्मीद रखने की सलाह भी नहीं देता…!!