सुविचार 4836
उनके मुकद्दर के पन्ने कभी कोरे नही हुआ करते…
उनके मुकद्दर के पन्ने कभी कोरे नही हुआ करते…
अपनों की बात आती है, तो ऐसा लगता है ” जैसे कुछ जानते ही नहीं “
” बीते हुए कल के सपनों में जीते हुए, हम खुद को अभी भी असंभव भविष्य की विजय का सपना देखते हुए पाते हैं “
बात छोटी सी ही गर चुभ जाए दिल में तो जिंदगी के रास्ते मोड़ देती है.
ये हुनर है मेरा, हक़ीक़त नहीं…
जो दूसरा करे, तो चुभते हैं, परन्तु स्वयं करें तो एहसास तक नहीं होता..
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ….