सुविचार 1090

जिंदगी के हर रंग का मजा लेने के लिए जरुरी है कि हम न सिर्फ शारीरिक तौर पर खुश रहें बल्कि मानसिक तौर पर भी चुस्तदुरुस्त रहें.

सुविचार 1089

जैसे सूर्योदय के होते ही अंधकार दूर हो जाता है वैसे ही मन की प्रसन्नता से सारी बाधाएं शांत हो जाती हैं.

Collection of Thought 155

Our attitude to LIFE determines its style and pattern. it can make all the difference between success and failure.

LIFE के प्रति हमारा दृष्टिकोण इसकी शैली और पैटर्न को निर्धारित करता है _ यह सफलता और असफलता के बीच अंतर कर सकता है.

सुविचार 1088

बाज़ार कि दिखावटी चमक में जिन्दगी कि असलियत पीछे छूटती जा रही है. यह जो छूट रहा है, उसे भी तो किसी न किसी को देखना होगा.

सुविचार 1087

हम में से न जाने कितने लोग हैं, जो रोज अपनी वर्त्तमान परिस्थिति को लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन इसको हल करने के लिए कुछ करते नहीं हैं.

Collection of Thought 154

Blaming luck and time for our failures is not a wise act.

अपनी असफलताओं के लिए भाग्य और समय को दोष देना बुद्धिमानी का काम नहीं है.

Collection of Thought 153

Seek happiness for its own sake, and you will not find it; seek for duty, and happiness will follow as the shadow comes with the sunshine.

अपने लिए सुख खोजो, और तुम उसे नहीं पाओगे; कर्तव्य की तलाश करो, और खुशी तुम्हारे पीछे आएगी _ जैसे छाया धूप के साथ आती है.

मस्त विचार – ” क्या बात है ” – 1000

“क्या बात है”

जिन्दगी तो युं ही चलती रहती है…

पर कुछ अलग हो जाये तो …

“क्या बात है”

नही सबुत हमारे रंगो का…

पर कोई इंद्रधनुष बना जाये तो…

“क्या बात है”

नही कहना किसी से कुछ…

पर बिना कहे हीं कोई समझ जाये तो…

“क्या बात है”

अलग-अलग चहेरो की है ये दुनिया…

पर कोई युं ही हसा जाये तो…

“क्या बात है”

जिन्दगी प्यार का दुसरा नाम है…

पर “तुम्ही प्रेम हो ” कोई कह जाये तो…

“क्या बात है”

जीते तो है सभी अपने लिये पर…

कोई दुसरो के लिये जी जाये तो…

“क्या बात है”

वैसे तो कुछ लिखना आता नही हमे…

पर युं ही कुछ लिख डाले और…

आप को पसंद आ जाये तो कहना ……कि

“क्या बात है”

मस्त विचार – पानी तेरे कितने नाम… – 999

 पानी तेरे कितने नाम…..

पानी आकाश से गिरे तो…..बारिश,

आकाश की ओर उठे तो…..भाप,

अगर जम कर गिरे तो…..ओले,

अगर गिर कर जमे तो…..बर्फ,

फूल पर हो तो…..ओस,

फूल से निकले तो…..इत्र,

जमा हो जाए तो…..झील,

बहने लगे तो…..नदी,

सीमाओं में रहे तो…..जीवन,

सीमाएं तोड़ दे तो…..प्रलय,

आंख से निकले तो…..आंसू,

और शरीर से निकले तो…..पसीना.

ये पत्थर पानी का रास्ता रोकने आए हैं, उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं है.

_ पत्थरों से टकराकर पानी और उफान के साथ बहता है..!!

पानी वो है जो सब कुछ छोड़कर, भुलाकर फिर से अपनी रौ में बहने लगता है और फिर से सब ओर हरियाली – खुशहाली बिखेरने लगता है.!!
जब ब्रूस ली ने कहा – पानी की तरह बनो.

_ यह वही हाँ है.. “पानी चट्टान का विरोध नहीं करता”
_ यह उसके चारों ओर बहता है, उसे आकार देता है, उसे गले लगाता है – और आगे बढ़ता है.!!
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