सुविचार 955
सुख और संतोष….
दूसरों के प्रति प्रेम पूर्ण बनिए, दुसरो से अपेक्षा कम रखिये, सुख की चाह में रहने वाला अक्सर दुःख, संकट और रोग का सामना करता है, वहीँ संतोष और धैर्य के साथ रहने वाले को सुख, शांति और स्वास्थ्य स्वयं प्राप्त होते है !!!
दूसरों के प्रति प्रेम पूर्ण बनिए, दुसरो से अपेक्षा कम रखिये, सुख की चाह में रहने वाला अक्सर दुःख, संकट और रोग का सामना करता है, वहीँ संतोष और धैर्य के साथ रहने वाले को सुख, शांति और स्वास्थ्य स्वयं प्राप्त होते है !!!
पैसा एक कीमती वस्तु है; सिर्फ इसलिए कि आपके पास है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे बर्बाद कर दें.
एक तेरा साथ ही काफी है, ‘जशन-ऐ-ज़िन्दगी के लिए…
मुझे महफिलों की चाहत ही न रही कभी…
जमाने का तो दस्तूर बन गया है, हर इल्जाम हम पर लगाने का.