मस्त विचार – मुझे खुद ही से तू मिला – 996

मुझे खुद ही से तू मिला.

देख के रूप तेरा कुछ यूँ लगा .

सोया था बरसों से अभी हूँ जगा .

कर दिया अब तो हवाले तुझको .

अब तो नैया पार तू लगा .

कभी – कभी अज्ञान में भटक जाता हूँ .

अपने ज्ञान रूप से रास्ता दिखा .

आया हूँ तेरे दर, करता हूँ सजदा .

कौन हूँ मै जानता नहीं .

मुझे खुद ही से तू मिला.

Collection of Thought 150

Beautiful things happen when you distance yourself from negativity.

खूबसूरत चीजें तब होती हैं जब आप खुद को नकारात्मकता से दूर कर लेते हैं.

सुविचार 1083

जब तक आप अपने दिमाग को रोजाना नयी – नयी जानकारी नहीं देंगे , उसे अप.डेट नहीं करंगे – तब तक वह आपको बेहतर रिजल्ट नहीं दे पायेगा.

Collection of Thought 149

In the battle of life, the one with patience wins.

जिंदगी की जंग में सब्र रखने वाले की जीत होती है.

मस्त विचार 994

जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है,

कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है.

..पर जो हर हाल में खुश रहते हैं,

जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है.

सुविचार – *छोटा सा मोहल्ला मेरा पूरा बिग बाजार था.* – 1081

*छोटा सा मोहल्ला मेरा,* *पूरा बिग बाजार था !*

*एक नाई, एक मोची, एक सुनार,* *एक कल्लू लुहार था.*
*छोटे छोटे घर थे पर,* *हर आदमी बङा दिलदार था.*
*कहीं भी रोटी खा लेते थे,* *हर घर मे भोजऩ तैयार था.*
*बड़ी, गट्टे की सब्जी मजे से खाते थे,* *जिसके आगे शाही पनीर बेकार था.*
*ना कोई मैगी ना पिज़्ज़ा…* *झटपट पापड़, भुजिया, आचार, या फिर दलिया तैयार था.*
*नीम की निम्बोली और बेरिया सदाबहार था.*
*रसोई के परात या घड़े को बजा लेते,* *नीटू पूरा संगीतकार था.*
*मुल्तानी माटी लगा पोखर में नहा लेते,* *साबुन और स्विमिंग पूल सब बेकार था.*
*और फिर कबड्डी खेल लेते,* *हमें कहाँ क्रिकेट का खुमार था.*
*अम्मा से कहानी सुन लेते,* *कहाँ टेलीविज़न और अखबार था.*
*भाई-भाई को देख के खुश था,* *सभी लोगों मे बहुत प्यार था.*
*छोटा सा मोहल्ला मेरा पूरा बिग बाजार था.*
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