मस्त विचार 900
तू जंहा मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊंगा……….
तू जंहा मुझसे कहेगी मैं उतर जाऊंगा……….
तरक्की जरुर होगी.
*1. चालीस साल की अवस्था में “उच्च शिक्षित” और “अल्प शिक्षित” एक जैसे ही होते हैं।*
*2. पचास साल की अवस्था में “रूप” और “कुरूप” एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते*)
*3. साठ साल की अवस्था में “उच्च पद” और “निम्न पद” एक जैसे ही होते हैं।(चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है)*
*4. सत्तर साल की अवस्था में “बड़ा घर” और “छोटा घर” एक जैसे ही होते हैं। (घुटनों का दर्द और हड्डियों का गलना आपको बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं)*
*5. अस्सी साल की अवस्था में आपके पास धन का “होना” या “ना होना” एक जैसे ही होते हैं। ( अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है)*
*6. नब्बे साल की अवस्था में “सोना” और “जागना” एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).*
*जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें।*
*आगे चल कर एक दिन हम सब की यही स्थिति होनी है इसलिए चिंता, टेंशन छोड़ कर मस्त रहें स्वस्थ रहें।*
*यही जीवन है और इसकी सच्चाई भी।*
_ यदि आप इसे स्वीकार करते हैं, तो इसका आपके वर्तमान जीवन पर उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा, जितना कि इसे अस्वीकार करने पर पड़ता है..!!
क्यों नहीं तू थोड़ा और, ठहर जाता है. क्यों बच्चे हो गए बड़े, इतनी जल्दी जल्दी, अभी तो मुझे खुद में ही, बचपन नजर आता है, कहाँ गया वो माँ का आँचल, कहाँ अब पिता का साया.
कहाँ है भैया की,
प्यार भरी फटकार,
खो गया कहाँ वो,
भाभीमाँ का प्यार.
कहाँ गए वो गिल्ली डंडे,
कहाँ है वो पतंगों की बहार.
खोजता है मन, उस ठेले को,
रंग बिरंगे बरफ के गोले को,
ले लो मेरे ब्रांडेड कपड़ो को,
जूतों को,
लौटा दो मेरी फटी जुराबों को,
वो स्टेट बस का घड़घड़ाना,
वो पार्क में एक दूजे के पीछे,
दौड़ना दौड़ना,
इसकी उसकी टिफ़िन
छीन कर खाना,
भूख और बढ़ाता है.
दिल को बड़ा रुलाता है
ऐ समय रुक जा, वापस आ जा,
तुझे बचपन बुलाता है …Pk
किसी का “काश” तो , किसी का “अगर” रह ही जाता है.
1. अपनी जरूरतों को मिनिमाइज कर लें, दूसरों को दिखाने की प्रवृत्ति बन्द कर दें.
2. सुबह जल्दी उठना शुरू कर ध्यान- प्राणायाम- योगासन और जोगिंग करना शुरू कर दें, नैचरोपैथी फ़ौलो करें.
3. प्रोपर्टी में इन्वेस्ट सिर्फ अपनी जरुरत जितनी ही करें, ज्वैलरी पहनना बन्द कर दें.
4. यथासंभव दूसरों की सहायता करें, सबका भला सोचें.
……….ये बातें हैं तो बहुत छोटी- सी, साधारण सी ही हैं, लेकिन यदि सच्चे मन से जीवन में उतार लिया जाए तो आपके जीवन की धारा ही बदल कर रख देगी.
क्यों कि सुधरना मुझे हैं उस को नही.
मौन शब्दों से, नजरों की जुबां से, बातों को होने दो.
मेरे रहते तुम उदास हो, अच्छी बात नहीं है.