सुविचार – हम व्यस्त नहीं अस्त व्यस्त हैं – मत परेशान हो, मस्त रहो व्यस्त रहो – 1011

*मत परेशान हो मस्त रहो व्यस्त रहो क्योंकि*

*1. चालीस साल की अवस्था में “उच्च शिक्षित” और “अल्प शिक्षित” एक जैसे ही होते हैं।*

*2. पचास साल की अवस्था में “रूप” और “कुरूप” एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते*)

*3. साठ साल की अवस्था में “उच्च पद” और “निम्न पद” एक जैसे ही होते हैं।(चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है)*

*4. सत्तर साल की अवस्था में “बड़ा घर” और “छोटा घर” एक जैसे ही होते हैं। (घुटनों का दर्द और हड्डियों का गलना आपको बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं)*

*5. अस्सी साल की अवस्था में आपके पास धन का “होना” या “ना होना” एक जैसे ही होते हैं। ( अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है)*

*6. नब्बे साल की अवस्था में “सोना” और “जागना” एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).*

*जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें।*

*आगे चल कर एक दिन हम सब की यही स्थिति होनी है इसलिए चिंता, टेंशन छोड़ कर मस्त रहें स्वस्थ रहें।*

*यही जीवन है और इसकी सच्चाई भी।*

इस मैसेज को गौर से दो बार पढ़ें  !!!!

*1. जिस दिन हमारी मोत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।
*2. जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।
*3. जब हम चले जाते हैं तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।
*4. एक चीनी बादशाह की मोत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया।
विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा – “मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।”
सीख ? ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।
• 5. अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• 6. मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते हैं ।
•7.  मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
•8.  आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
•9.  पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• 10. पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 11. 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता, तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो |
• 12. जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• 13. शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• 14. धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।
बेहतर जीवन जीयें !!!
*आज सुविचार**

_ “चैन से जीने के लिए चार रोटी और दो कपड़े काफ़ी हैं “।
_ **”पर, बेचैनी से जीने के लिए चार मोटर, दो बंगले और तीन प्लॉट भी कम हैं !!”
**”आदमी सुनता है मन भर ,,**सुनने के बाद प्रवचन देता है टन भर,,”
**और खुद ग्रहण नही करता कण भर ।।”*
‘प्राण जाए पर वचन न जाई’

_ मुहावरा पुराना हुआ.
_ अक्लमंदी इसे कहेंगे कि किसी को कोई वचन ही न दिया जाए, वह भी भविष्य के लिए, वह भी ‘जो चाहे माँग लो’ अंदाज़ में.
_ कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही प्रिय हो, इतने विश्वास के काबिल नहीं होता.
_ वह आपको प्रिय है, ज़रूरी नहीं कि आप भी उसको उतने ही प्रिय हों कि वह आपके लिए अपनी खुशियों का बलिदान कर दे.
– Manika Mohini
जो भी बात या चीज आपको परेशान करती है, आप उससे जितना दूर भागेंगे, वह उतनी ही तेजी से आपका पीछा करेगी.

_ यदि आप इसे स्वीकार करते हैं, तो इसका आपके वर्तमान जीवन पर उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा, जितना कि इसे अस्वीकार करने पर पड़ता है..!!

इतना व्यस्त रहें कि फालतू सी चीजों.. जैसे कि लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं, क्या सोचते हैं, आदि, इत्यादि को भी सोचने की फुरसत ना मिले.!!
अत्यधिक व्यस्त रहना उन चीजों से निपटने का एक तरीका है, जिनसे हम निपटना नहीं चाहते.

_ इसीलिए हम अपना ज़्यादातर समय उन चीजों में बिताते हैं, जो हमें व्यस्त रखती हैं.
_ हम काम करते हैं, दोस्तों से मिलने जाते हैं, घूमते-फिरते हैं, यात्रा करते हैं, और यह सब हम खुद से भागने के लिए करते हैं.
_ लोग अक्सर इस बात को पूरी तरह से नकार देते हैं, जबकि वे अंदर ही अंदर जानते हैं कि यह कितना सच है.

मस्त विचार – तुझे बचपन बुलाता है .. – 898

ऐ वक़्त, क्यूँ इतनी जल्दी,गुजर जाता है,

क्यों नहीं तू थोड़ा और, ठहर जाता है.

क्यों बच्चे हो गए बड़े,

इतनी जल्दी जल्दी,

अभी तो मुझे खुद में ही,

बचपन नजर आता है,

कहाँ गया वो माँ का आँचल,

कहाँ अब पिता का साया.

कहाँ है भैया की,

प्यार भरी फटकार,

खो गया कहाँ वो,

भाभीमाँ का प्यार.

कहाँ गए वो गिल्ली डंडे,

कहाँ है वो पतंगों की बहार.

खोजता है मन, उस ठेले को,

रंग बिरंगे बरफ के गोले को,

ले लो मेरे ब्रांडेड कपड़ो को,

जूतों को,

लौटा दो मेरी फटी जुराबों को,

वो स्टेट बस का घड़घड़ाना,

वो पार्क में एक दूजे के पीछे,

दौड़ना दौड़ना,

इसकी उसकी टिफ़िन

छीन कर खाना,

भूख और बढ़ाता है.

दिल को बड़ा रुलाता है

ऐ समय रुक जा, वापस आ जा,

तुझे बचपन बुलाता है …Pk

सुविचार – चार छोटी सी बातें – 1010

यदि आप रियली सुखी रहना चाहते हो, अन्दर से प्रसन्न रहना चाहते हो… तो सिर्फ चार छोटी सी बातें अपने जीवन में उतार लें.

1. अपनी जरूरतों को मिनिमाइज कर लें, दूसरों को दिखाने की प्रवृत्ति बन्द कर दें.

2. सुबह जल्दी उठना शुरू कर ध्यान- प्राणायाम- योगासन और जोगिंग करना शुरू कर दें, नैचरोपैथी फ़ौलो करें.

3. प्रोपर्टी में इन्वेस्ट सिर्फ अपनी जरुरत जितनी ही करें, ज्वैलरी पहनना बन्द कर दें.

4. यथासंभव दूसरों की सहायता करें, सबका भला सोचें.

……….ये बातें हैं तो बहुत छोटी- सी, साधारण सी ही हैं, लेकिन यदि सच्चे मन से जीवन में उतार लिया जाए तो आपके जीवन की धारा ही बदल कर रख देगी.

मस्त विचार 894

कुछ मत बोलो यार, बातों से मन टूट जाएगा.

मौन शब्दों से, नजरों की जुबां से, बातों को होने दो.

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