मस्त विचार 892

ज्यादातर लोग नुमाइश पसंद होते हैं,

क्योंकि उन्हें अच्छाइयों कि दिव्यता का,

ना तो ज्ञान होता है और ना अनुभव.

मस्त विचार 891

मैंने यार ऎसा पाया है, जिस ने मुझे जीना सिखाया है.

दुनिया का चेहरा, बड़ी गहराई से दिखलाया है.

एक- एक रिश्ते की अहमियत को,

बड़े प्यार से समझाया है.

रिश्तों की असलियत दिखा कर,

उस ने अपना प्यार मेरे मन में जगाया है.

हर रस्ते पे उस ने मेरा हाथ पकड़ा,

और मुझे तूफानों से बचाया है.

क्या गुण गाऊं उस के,

जिस ने मुझ जैसे को भी गले लगाया है.

मैंने यार ऎसा पाया है, जिस ने मुझे जीना सिखाया है.

सुविचार – *उठियें* जल्दी घर के सारें – 1009

*उठियें* जल्दी घर के सारें, घर में होंगे पौबारें.

*लगाइये* सवेरे मंजन, रात को अंजन.

*कीजियें* मालिश तीन बार, बुध, शुक्रवार और सोमवार.

*नहाइए* पहले सिर, हाथ पाँव फिर.

*खाइयें* दाल, रोटी, चटनी कितनी भी हो कमाई अपनी.

*पीजिये* दूध खड़े होकर, दवा पानी बैठ कर.

*खिलाइये* आयें को रोटी, चाहें पतली हो या मोटी.

*पिलाइए* प्यासे को पानी, चाहे हो जावे कुछ हानि.

*छोडियें* अमचूर की खटाई, रोज की मिठाई.

*करियें* आयें का मान, जाते का सम्मान.

*सीखियें* बड़ो की सीख और बुजुर्गों की रीत.

*जाईये* दुःख में पहले, सुख में पीछे.

*ब्याहियें* ऐसी नार से, जो घर में रहे प्यार से.

*परखिये* चाहे सबको, छोड़ देना माता को.

*धोइये* दिल की कालिख को, कुटुम्ब के दाग को.

*सोचिएं* एकांत में, करो सबके सामने.

*बोलिएं* कम से कम, कर दिखाओ ज्यादा.

*चलियें* तो अगाड़ी, ध्यान रहे पिछाड़ी.

*सुनियें* सबो की, करियें मन की.

*बोलियें* जबाब संभल कर, थोडा बहुत पहचान कर.

*सुनियें* पहले पराएं की, पीछे अपने की.

*रखियें* याद कर्ज के चुकाने की, मर्ज के मिटाने की.

*भुलियें* अपनी बडाई को और दूसरों की भलाई को.

*छिपाइएं* उमर और कमाई चाहे पूछे सगा भाई.

*लिजियें* जिम्मेदारी उतनी, सम्भाल सके जितनी.

*धरियें* चीज जगह पर, जो मिल जावें वक्त पर.

*उठाइये* सोते हुए को नहीं गिरकर गिरे हुयें को.

*लाइयें* घर में चीज उतनी काम आवे जितनी.

सुविचार – हमेशा खुश रहना चाहते हैं तो .. – 1008

हमेशा खुश रहना चाहते हैं तो ..

●वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति के पास अतिरिक्त कार्य है और कार्य को समय पर पूरा करने का प्रेशर भी. काम समय पर पूरा न हो पाने पर मानसिक तनाव होना सामान्य बात है.

● व्यक्ति तनाव में घर जाता है और फिर घर की परेशानी से और तनावग्रस्त हो जाता है. तनाव जीवन का नाश करता है, इससे दूर ही रहें तो अच्छा है. तनाव दूर करने के लिए कुछ आसान उपाय हम आपको बता रहे हैं, आप उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

1) सूर्योदय से पहले उठें, घूमने जाएं, हल्का व्यायाम या योग करें.

2) प्रातःकाल व सोते समय 15 मिनट रब का ध्यान करें.

3) स्वयं को जानें, अपनी प्रतिभा, क्षमता व सीमाओं को पहचानें.

4) हमेशा सकारात्मक चिंतन करें, नकारात्मक सोच से ऊर्जा नष्ट होती है.

5) जो है, उस पर संतोष करें व कर्म करने में पूर्ण विश्वास रखें.

6) उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ काम करें, व्यवस्थित दिनचर्या की आदत डालें.

7) सदैव वर्तमान में जीएं, भूत व भविष्य की व्यर्थ चिंता से बचें.

सदैव प्रसन्नचित्त रहें, हंसते-हंसते जीना सीखें.

8) सादा व सरल जीवन जीएं, जीवन में गुणवत्ता पर विश्वास रखें,  दिखावे से बचें.

9) हॉबीज (hobbies) विकसित करें. समय की पाबंदी का खयाल रखें. हमेशा वाणी पर संयम रखें. धैर्य व आत्मनियंत्रण रखें. परिवार के साथ छुट्टियां मनाएं.

10) अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के लिए श्रेष्ठ धन है. दूसरों से स्वयं की तुलना करने से बचें. कम तथा सच्चे मित्र बनाएं.

इन बातों को जीवन में शामिल करने, व्यवहार में लाने में शुरू में परेशानी हो सकती है,

परंतु कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि आप तनावरहित एवं सुखी हो गए हैं.

सुविचार – जरा गौर फरमायें – 1007

जरा गौर फरमाये ….

छोटा सा जीवन है, लगभग 80 वर्ष।
उसमें से आधा =40 वर्ष तो रात को
बीत जाता है। उसका आधा=20 वर्ष
बचपन और बुढ़ापे मे बीत जाता है।
बचा 20 वर्ष। उसमें भी कभी योग,
कभी वियोग, कभी पढ़ाई,कभी परीक्षा,
नौकरी, व्यापार और अनेक चिन्ताएँ
व्यक्ति को घेरे रखती हैँ।अब बचा ही
कितना ? 8/10 वर्ष। उसमें भी हम
शान्ति से नहीं जी सकते ? यदि हम
थोड़ी सी सम्पत्ति के लिए झगड़ा करें,
और फिर भी सारी सम्पत्ति यहीं छोड़
जाएँ, तो इतना मूल्यवान मनुष्य जीवन
प्राप्त करने का क्या लाभ हुआ ?
स्वयं विचार कीजिये :-
इतना कुछ होते हुए भी,
1- शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी…
मौन होना सब से बेहतर है।
2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी…
सफेद रंग सब से बेहतर है।
3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी…
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।
4-पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।
5- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी…
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।
6- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी…
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।
7- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी…
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है।
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मस्त विचार 890

दुनिया रिश्तों पर चल रही है – खून के रिश्ते, दोस्ती के रिश्ते,

सामजिक रिश्ते और मानवता का नाता.

इन चार कैटेगरी में सारे रिश्ते आ जाते हैं

और इन्ही के इर्दगिर्द हम जीवन गुजार लेते हैं.

मस्त विचार 889

तुम्हारे आते ही बदल जाता है सब कुछ.

दुख उठ कर चला जाता है कहीं,

उदासी घुल जाती है ख़ुशी की रोशनी में.

खाली खाली सा मेरा मन भर उठता है खुशी से.

तुम्हारे आते ही बदल जाता है सब कुछ.

मस्त विचार 888

मुझसे नफरत तभी करना,

जब आप मेरे बारे में सब कुछ जानते हों.

तब तक नहीं, जब किसी से सुना हो.

मस्त विचार 887

चाहते हो भीगना बरसात में, तो मेरी इन आँखों में देखो,

ये बरसात तो सबके लिए होती है, लेकिन ऐ मेरे यार ये आँखें,

सिर्फ तुम्हारे लिए रोती हैं.

सुविचार – ऐ “सुख” तू कहाँ मिलता है – 1006

** ऐ “सुख” तू कहाँ मिलता है, क्या तेरा कोई स्थायी पता है ?

_ क्यों बन बैठा है अन्जाना, आखिर क्या है तेरा ठिकाना.
_ कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको, पर तू न कहीं मिला मुझको.
_ ढूंढा ऊँचे मकानों में, बड़ी बड़ी दुकानों में.
_ स्वादिष्ट पकवानों में, चोटी के धनवानों में.
_ वो भी तुझको ढूंढ रहे थे, बल्कि मुझको ही पूछ रहे थे.
_ क्या आपको कुछ पता है, ये “सुख” आखिर कहाँ रहता है ?
_ मेरे पास तो दुःख का पता था, जो सुबह शाम अक्सर मिलता था.
_ परेशान होके रपट लिखवाई, पर ये कोशिश भी काम न आई.
_ उम्र ढलान पे है, हौसले थकान पे है.
_ हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास, अब भी बची हुई है आस.
_ मैं भी हार नहीं मानूंगा, सुख के रहस्य को जानूंगा.
_ बचपन में मिला करता था, मेरे साथ रहा करता था.
_ पर जबसे मैं बड़ा हो गया, मेरा सुख मुझसे जुदा हो गया.
_ मैं फिर भी नहीं हुआ हताश, जारी रखी उसकी तलाश.
_ एक दिन जब आवाज ये आई, क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई ??
_ मैं तेरे अंदर छुपा हुआ हूँ, तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ.
_ मेरा नहीं है कुछ भी मोल, सिक्कों में न मुझको तोल.
_ हर पल तेरे संग रहता हूँ, और अक्सर तुझसे कहता हूँ.
_ मैं तो हूँ एक अहसास, बंद कर दे मेरी तलाश.
_ जो मिला उसी में संतोष कर, आज को जी ले कल की न सोच.
_ कल के लिए आज को न खोना.
_”मेरे लिए कभी दुखी न होना, मेरे लिए कभी दुखी न होना.!!”
** सुख और खुशी कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ पहुँचा जा सके.

_ सुख औ खुशी एक दृष्टि है..- जीवन को देखने का एक तरीका है.
_ जब तक हम इसे बाहर खोजते रहेंगे, हम हमेशा खाली हाथ लौटेंगे..
_ और जिस दिन हम अपने भीतर देखना शुरू करेंगे, उस दिन हम समझ जाएंगे..
_ सुख औ खुशी कहीं नहीं जाते ; बल्कि हम ही उससे दूर रहते हैं.!!
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