मस्त विचार 892
क्योंकि उन्हें अच्छाइयों कि दिव्यता का,
ना तो ज्ञान होता है और ना अनुभव.
क्योंकि उन्हें अच्छाइयों कि दिव्यता का,
ना तो ज्ञान होता है और ना अनुभव.
दुनिया का चेहरा, बड़ी गहराई से दिखलाया है. एक- एक रिश्ते की अहमियत को, बड़े प्यार से समझाया है. रिश्तों की असलियत दिखा कर, उस ने अपना प्यार मेरे मन में जगाया है. हर रस्ते पे उस ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे तूफानों से बचाया है. क्या गुण गाऊं उस के, जिस ने मुझ जैसे को भी गले लगाया है. मैंने यार ऎसा पाया है, जिस ने मुझे जीना सिखाया है.
*लगाइये* सवेरे मंजन, रात को अंजन.
*कीजियें* मालिश तीन बार, बुध, शुक्रवार और सोमवार.
*नहाइए* पहले सिर, हाथ पाँव फिर.
*खाइयें* दाल, रोटी, चटनी कितनी भी हो कमाई अपनी.
*पीजिये* दूध खड़े होकर, दवा पानी बैठ कर.
*खिलाइये* आयें को रोटी, चाहें पतली हो या मोटी.
*पिलाइए* प्यासे को पानी, चाहे हो जावे कुछ हानि.
*छोडियें* अमचूर की खटाई, रोज की मिठाई.
*करियें* आयें का मान, जाते का सम्मान.
*सीखियें* बड़ो की सीख और बुजुर्गों की रीत.
*जाईये* दुःख में पहले, सुख में पीछे.
*ब्याहियें* ऐसी नार से, जो घर में रहे प्यार से.
*परखिये* चाहे सबको, छोड़ देना माता को.
*धोइये* दिल की कालिख को, कुटुम्ब के दाग को.
*सोचिएं* एकांत में, करो सबके सामने.
*बोलिएं* कम से कम, कर दिखाओ ज्यादा.
*चलियें* तो अगाड़ी, ध्यान रहे पिछाड़ी.
*सुनियें* सबो की, करियें मन की.
*बोलियें* जबाब संभल कर, थोडा बहुत पहचान कर.
*सुनियें* पहले पराएं की, पीछे अपने की.
*रखियें* याद कर्ज के चुकाने की, मर्ज के मिटाने की.
*भुलियें* अपनी बडाई को और दूसरों की भलाई को.
*छिपाइएं* उमर और कमाई चाहे पूछे सगा भाई.
*लिजियें* जिम्मेदारी उतनी, सम्भाल सके जितनी.
*धरियें* चीज जगह पर, जो मिल जावें वक्त पर.
*उठाइये* सोते हुए को नहीं गिरकर गिरे हुयें को.
*लाइयें* घर में चीज उतनी काम आवे जितनी.
●वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति के पास अतिरिक्त कार्य है और कार्य को समय पर पूरा करने का प्रेशर भी. काम समय पर पूरा न हो पाने पर मानसिक तनाव होना सामान्य बात है.
● व्यक्ति तनाव में घर जाता है और फिर घर की परेशानी से और तनावग्रस्त हो जाता है. तनाव जीवन का नाश करता है, इससे दूर ही रहें तो अच्छा है. तनाव दूर करने के लिए कुछ आसान उपाय हम आपको बता रहे हैं, आप उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
1) सूर्योदय से पहले उठें, घूमने जाएं, हल्का व्यायाम या योग करें.
2) प्रातःकाल व सोते समय 15 मिनट रब का ध्यान करें.
3) स्वयं को जानें, अपनी प्रतिभा, क्षमता व सीमाओं को पहचानें.
4) हमेशा सकारात्मक चिंतन करें, नकारात्मक सोच से ऊर्जा नष्ट होती है.
5) जो है, उस पर संतोष करें व कर्म करने में पूर्ण विश्वास रखें.
6) उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ काम करें, व्यवस्थित दिनचर्या की आदत डालें.
7) सदैव वर्तमान में जीएं, भूत व भविष्य की व्यर्थ चिंता से बचें.
सदैव प्रसन्नचित्त रहें, हंसते-हंसते जीना सीखें.
8) सादा व सरल जीवन जीएं, जीवन में गुणवत्ता पर विश्वास रखें, दिखावे से बचें.
9) हॉबीज (hobbies) विकसित करें. समय की पाबंदी का खयाल रखें. हमेशा वाणी पर संयम रखें. धैर्य व आत्मनियंत्रण रखें. परिवार के साथ छुट्टियां मनाएं.
10) अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के लिए श्रेष्ठ धन है. दूसरों से स्वयं की तुलना करने से बचें. कम तथा सच्चे मित्र बनाएं.
इन बातों को जीवन में शामिल करने, व्यवहार में लाने में शुरू में परेशानी हो सकती है,
परंतु कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि आप तनावरहित एवं सुखी हो गए हैं.
सामजिक रिश्ते और मानवता का नाता. इन चार कैटेगरी में सारे रिश्ते आ जाते हैं और इन्ही के इर्दगिर्द हम जीवन गुजार लेते हैं.
दुख उठ कर चला जाता है कहीं, उदासी घुल जाती है ख़ुशी की रोशनी में. खाली खाली सा मेरा मन भर उठता है खुशी से. तुम्हारे आते ही बदल जाता है सब कुछ.
जब आप मेरे बारे में सब कुछ जानते हों. तब तक नहीं, जब किसी से सुना हो.
ये बरसात तो सबके लिए होती है, लेकिन ऐ मेरे यार ये आँखें,
सिर्फ तुम्हारे लिए रोती हैं.