मस्त विचार 758
_ बल्कि समय पर न उठना शर्म की बात है..
_ बल्कि समय पर न उठना शर्म की बात है..
वरना आँचल और कफ़न एक ही धागे से बनते है.
सपनों के परदे आँखों से हटाती है. किसी भी बात से हिम्मत न हारना. क्यों कि ठोकर ही इन्सान को चलना सिखाती है.
क्यों कि भीड़ साहस तो देती है लेकिन पहचान छीन लेती है.”
“मैं” कभी रिश्तों में नहीं आता…
तेरी यारी के सिवा कोई बदंगी न मिले,, हर जनम मे मिले यार तेरे जैसा या फिर कभी जिंदगी न मिले. ”
लोग पत्थर तो उठाते है मगर उँगली नही.
कि वो…खुद टुट जाते है, मगर किसी का दिल टुटने नही देते …..!!!!
अब हँसने को तमीज़ चाहिए और अशको को तनहाई.