सुविचार 908

जैसे जल के द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है . वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए.

सुविचार 907

व्यवहार पोशाक की तरह होना चाहिए, अति तंग नहीं बल्कि ऐसा कि जिस में हरकत और कसरत आसानी से हो सके अर्थात व्यवहार लचीला रखें.

सुविचार 906

जीवन का एकमात्र उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम जैसे हैं, वैसे ही दिखें और जैसे बन सकते हैं, वैसे बनें.

सुविचार 905

वादा करने में देरी करो लेकिन वादा निभाने में देरी नहीं करनी चाहिए.

सुविचार 904

यदि आप शत्रु से सुलह करना चाहते हैं, तो जब जब वह आपकी बुराई करे, आप उस की तारीफ़ व भलाई करें.
सच्चा सुलह करवाने वाला वो होता है जो आग बुझाए.. ना की वो जो पेट्रोल

डालकर दूर खड़ा मुस्कुराए..!!
कभी-कभी जो आपकी चिंता का दिखावा करते हैं,

_ असल में वही आपकी तरक्की से सबसे ज़्यादा दुखी होते हैं.

सुविचार 903

जो चिंतित रहता है उसे शांति कहाँ ? और जब शांति ही नहीं, तब सुख कहां से होगा ?

सुविचार 902

इस विश्व में शान्ति हासिल हो या न हो, हमें इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम करते रहना चाहिए. अगर हमारे दिमाग में गुस्सा भरा है तो हम मानव मेधा के बेहतरीन हिस्से बुद्धिमता यानी सही और ग़लत के बीच फैसला करने की छमता को खो देंगे.

सुविचार 901

प्रेम, दया, वात्सल्य, परोपकार, अहिंसा, हंसना, रोना,मानवता आदि गुण मानवता के अलंकार माने जाते हैं, किन्तु आज मानव अपनी संवेदनाएं भूल रहा है. वह न दूसरों के दुख में रोता है, न सुख में हंसता है और न ही अपनी भावनाएं जाहिर करता है.

आपाधापी के इस दौर में सिर्फ कमाने एवं दूसरों से आगे निकलने की होड़ में ही न लगे रहें. हम मानव हैं और हमारे पास एक प्यारा सा मन है, उस का भी ध्यान रखें, ताकि मानवता बची रहे.

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