मस्त विचार 678
ज़िन्दगी में टेंशन किस को कम है.. अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है.. जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है.
ज़िन्दगी में टेंशन किस को कम है.. अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है.. जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है.
तभी तो मामले सुलझते ‘कम’ उलझते ‘ज्यादा’ हैं..
जो लोग मेरे हारने की वजह से पहली बार जीते हों.
जीने की तरकीब निकालो, मर जाने से क्या होगा.
भूल जाओ उन्हें जो तुम्हें भूल गए.
हम क्या हम से भी अच्छे हजारों मिलेंगे…. इन अच्छों की भीड़ मे कंही हमे आप भुला देना. ” हम कंहाँ आप को बार बार मिलेंगे “….
उसने चिलम को आकार दिया। थोड़ी देर में उसने चिलम को बिगाड़ दिया l माटी ने पूछा – अरे कुम्हार, तुमने चिलम अच्छी बनाई फिर बिगाड़ क्यों दिया.? कुम्हार ने कहा कि- अरी माटी, पहले मैं चिलम बनाने की सोच रहा था, किन्तु मेरी मति (दिमाग) बदली और अब मैं
सुराही या फिर घड़ा बनाऊंगा। .
ये सुनकर माटी बोली- रे कुम्हार, तेरी तो मति बदली,
मेरी तो जिंदगी ही बदल गयी…l चिलम बनती तो स्वयं भी जलती और दूसरों को भी जलाती…. अब सुराही बनूँगी तो स्वयं भी शीतल रहूँगी … और दूसरों को भी शीतल रखूंगी… “यदि जीवन में हम सभी सही फैसला लें… तो हम स्वयं भी खुश रहेंगे.. एवं दूसरों को भी खुशियाँ दे सकेंगे.