सुविचार 777
जैसे कि बर्तन आवाज से जाना जाता है कि कटा हुआ है या नहीं, उसी तरह आदमी अपनी बातों से साबित कर देते है कि, वे अकलमन्द हैं या बेवकूफ.
आज नही तो, कल निकलेगा. मेहनत कर, पौधों को पानी दे, बंजर जमीन से भी फल निकलेगा. ताकत जुटा, हिम्मत को आग दे, फौलाद का भी बल निकलेगा. जिन्दा रख, दिल में उम्मीदों को, समन्दर से भी गंगा जल निकलेगा. कोशिशें जारी रख कुछ कर गुजरने की, जो है आज थमा-थमा सा, वो चल निकलेगा.
कोशिश कर, हल निकलेगा
कहीं कोई तुझे पीछे से देखता होगा.
…..और हँसते- मुस्कुराते हुए जीएं .
ज़िन्दगी को एक खेल की तरह समझें
जिनके संग से आपके ह्रदय में हिलौर उठने लग जाएँ.