मस्त विचार 674
जीने की तरकीब निकालो, मर जाने से क्या होगा.
मस्त विचार 673
भूल जाओ उन्हें जो तुम्हें भूल गए.
मस्त विचार 672
हम क्या हम से भी अच्छे हजारों मिलेंगे…. इन अच्छों की भीड़ मे कंही हमे आप भुला देना. ” हम कंहाँ आप को बार बार मिलेंगे “….
मस्त विचार 671
मस्त विचार 670
उसने चिलम को आकार दिया। थोड़ी देर में उसने चिलम को बिगाड़ दिया l माटी ने पूछा – अरे कुम्हार, तुमने चिलम अच्छी बनाई फिर बिगाड़ क्यों दिया.? कुम्हार ने कहा कि- अरी माटी, पहले मैं चिलम बनाने की सोच रहा था, किन्तु मेरी मति (दिमाग) बदली और अब मैं
सुराही या फिर घड़ा बनाऊंगा। .
ये सुनकर माटी बोली- रे कुम्हार, तेरी तो मति बदली,
मेरी तो जिंदगी ही बदल गयी…l चिलम बनती तो स्वयं भी जलती और दूसरों को भी जलाती…. अब सुराही बनूँगी तो स्वयं भी शीतल रहूँगी … और दूसरों को भी शीतल रखूंगी… “यदि जीवन में हम सभी सही फैसला लें… तो हम स्वयं भी खुश रहेंगे.. एवं दूसरों को भी खुशियाँ दे सकेंगे.
मस्त विचार 669
तेरे मेरे एहसास घोल कर एक नई गजल बनता हूँ.
मस्त विचार 668
क्यूँकि वह अपना स्वभाव नहीं बदलता.
सुविचार 782
मस्त विचार 667
पहले रो- रोकर आपके दुःख दर्द पूछेंगे, फिर हंस हंस के जमाने वालों को बताएंगे.





