सुविचार 648
कथनी और करनी में समानता ही महानता है.
बङी छोटी हैं ये ज़िन्दगी, मुस्करा के मिला करो !
क्या मिलेगा दिल में नफरत रख के,
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
यहाँ जरूरत के हिसाब से सब बदलतें नकाब है …..।
अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर हर शख्स कहता हैं…….।
ज़माना बङा ख़राब हैं……।।
इस से रुठने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए.
जीवन में दुःख के बाद सुख का महत्व दोगुना हो जाता है.