मस्त विचार 552
ज़िंदगी को न समझ आज तू सोने जैसी……
ये तो है वक़्त के हाथों में खिलौने जैसी………
ये तो है वक़्त के हाथों में खिलौने जैसी………
दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..
ना सुख जिन्दगी ,
ना दुख जिन्दगी ,
ना गम जिन्दगी ,
ना खुशी जिन्दगी ,
अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!
इंसान खुद रो पड़ता है अकेले मे
किसी को हौँसला देने के बाद.