सुविचार 718
अभिमान की अपेछा नम्रता से अधिक लाभ होता है.
क्योंकि उस की आपूर्ति इतनी अधिक है और मांग इतनी कम.
यदि व्यक्ति चाहे तो इस से दिव्यता के शिखर को छू सकता है.
सुख दुःख को छक कर पीना सीख जाएँ, आए संकट नहीं घबराएँ, मस्त हो कर जीना हम सीख जाएँ.
ज़िन्दगी को हम ऎसे जीना सीख जाएँ,
यहाँ तो हर कोई वफा की उम्मीद दे कर बेवफाई कर जाता है.
मिलती है कहाँ वफा ज़रा हमे भी तो बताओ दोस्तों
अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!!!”
हर “इंसान” अपनी “जुबां” के “पीछे” “छुपा” हुआ है !!