मस्त विचार 691
_ लेकिन काम से मिली पहचान जिन्दगी भर रहती है.
_ लेकिन काम से मिली पहचान जिन्दगी भर रहती है.
रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी.
सच है दुनिया वालो की हम हैँ अनाड़ी…
_ वह अपने भीतर के श्रेस्ठतर को बाहर निकालना चाहता है या निम्नतर की व्याख्या में ही सीमित रहना चाहता है.
_ हमें तो उन्हें चुनना है जो कम बुरा है.!!
आप का स्वभाव ही आपका भविष्य है.
खूब लिखी है ग़लतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही, दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नही .. ” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर, अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही ” .. ” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ, वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.
और जो अपना सब छोड़ कर आए, _ उसे तवज्जों नही देता !
सारा दोष बस ऐसी फितरत का ही है !
जो परिंदा अपने लिये आसमान ढूँढ़ता है !!
रिश्तें निभाना बडा नाजुक सा हुनर होता है !!