मस्त विचार 549
_ लेकिन हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए..
_ लेकिन हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए..
कोई रिश्ता सा इनसे भी नज़र आए,
मेरा कुछ था, मगर वो कुछ भी न था
रास्ता, वो जो रोज़ मेरे घर को जाए….
मैं जीवित हूँ उस तरीके से जीने के लिए…
जो मुझे खुश बनाता है.
मगर एक खूबी भी है…”मैं किसी से रिश्ता मतलब के लिए नही रखता.”
काम में खुश हूं, आराम में खुश हूँ,
आज पनीर नहीं, दाल में ही खुश हूँ,
आज गाड़ी नहीं, पैदल ही खुश हूँ,
दोस्तों का साथ नहीं, अकेला ही खुश हूँ,
आज कोई नाराज है, उसके इस अंदाज से ही खुश हूँ,
जिस को देख नहीं सकता, उसकी आवाज से ही खुश हूँ,
जिसको पा नहीं सकता, उसको सोच कर ही खुश हूँ,
बीता हुआ कल जा चुका है, उसकी मीठी याद में ही खुश हूँ,
आने वाले कल का पता नहीं, इंतजार में ही खुश हूँ,
हंसता हुआ बीत रहा है पल, आज में ही खुश हूँ,
जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हूँ.
_ सामने खड़े लोग खुद को बादशाह समझने लगे..