सुविचार 584

मनुष्य का जीवन एक नदी की भाँति है, जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है.

मस्त विचार 541

खुद को कपडे, लुक व पैसों से न तौलें.

अपने बहुआयामी व्यक्तित्व को पहचानें,

खुद को अपनी खूबियों और खामियों के साथ अपनायें.

सुविचार 583

मनुष्य में ही जीवन शक्ति का सर्वोत्तम रूप है. जड़ वस्तु में जो शक्ति अच्छी है, बेअख्तियार है. जंतुओं में जो शक्ति प्रवृत्ति के आवेश से परिचालित होती है, मनुष्य में वही शक्ति मन, बुद्धि और ह्रदय की अधिकारिणी हुई है.

सुविचार 582

साहित्यकार एक दीपक के समान है, जो जल कर केवल दूसरों को ही प्रकाश प्रदान करता है. 

मस्त विचार 539

ज़िन्दगी कभी भी बहुत अच्छी नहीं होती. इस पल आप को ज़िन्दगी ने ख़ुशियाँ दी हैं तो अगले ही पल दुःख भी दे सकती है;

इसलिए ज़िन्दगी जैसे मिले, उसे उसी तरह से जीना सीख लो.

मस्त विचार 538

” होने दो तमाशा …….. मेरी भी ज़िन्दगी का,

​मैंने भी मेले में ……. बहुत तालियाँ बजाई हैं ” !!

हार न मानना ही ज़िन्दगी है

बाबा आमटे की माँ ज्यादा पढ़ीलिखी नहीं थी, लेकिन थी बहुत बुद्धिमान. वह बहुत सी बातों को सुन्दर ढंग से समझाती थीं. एक बार उन्होंने बाबा आमटे को एक जापानी गुड़िया दी. वह गुड़िया जितनी बार गिरती थी उतनी बार उठ खड़ी होती थी. गुड़िया अपने पुत्र को दे कर उन्होंने समझाया, ” बेटा, इस गुड़िया को गिरातेगिराते तुम थक जाओगे, लेकिन यह हर बार उठ खड़ी होगी. इसी तरह जीवन में तुम्हें बारबार गिरना पड़ेगा. शान न गिरने या न हारने में नहीं है, क्योंकि जीवन में हमेशा ही सफलता हाथ नहीं आती बल्कि असली शान गिर कर तुरंत उठ खड़े होने में है. हारना, लेकिन हार न मानना ही ज़िन्दगी का दूसरा नाम है.”
इस बात को बाबा आमटे ने अच्छी तरह गाँठ बाँध ली थी और बीमारी के बावजूद कुष्ट रोगियों के लिए आश्रम चलाया.
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