जिस डर का हम सामना नही करते, भविष्य में वो ही डर _हमारी सीमाएं निर्धारित करना आरंभ कर देता है..
कोई इतना मजबूर कमजोर नहीं, जितना उसने खुद को मान रखा है,
व्यक्ति के जीवन 99% भय झूठे और मिथ्या है, असलियत में वो होते ही नहीं, सिवाय आपके खोपड़ी के..
किसी चीज़ का डर बने रहना कभी-कभी अच्छा भी होता है..
_ डर हमें सतर्क रखता है, सीमाओं का एहसास कराता है, और हमें लापरवाही से बचाता है..
_ पर जैसे ही डर पूरी तरह खत्म हो जाता है, इंसान अक्सर या तो बेपरवाह हो जाता है या फिर ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास में बहक जाता है.!!
डर अनिश्चितता से आता है; जब हम खुद को बेहतर तरीके से जान लेंगे तो हम अपने अंदर के डर को खत्म कर सकते हैं.
Fear comes from uncertainty; we can eliminate the fear within us when we know ourselves better.
दुनिया से पीछे छूट जाने का डर किसी भी चीज़ से बड़ा है,
_हम सभी डर रहे हैं, तो हम सभी एक ही गति पर हैं.
_कोई न कोई दूर जरूर जाएगा, लेकिन ठीक है.
_ किसी को अपने से दूर जाते हुए देखना ठीक है, क्योंकि इससे आपको पता चल जाएगा कि यह संभव है.
_आप सीखने और इसे अपने लिए संभव बनाने का प्रयास करेंगे.!!
भय से खुद को दूर रखिए, भय हमें जीने नहीं देता,
_ डरा हुआ आदमी सिर्फ जीने का उपक्रम करता रह जाता है.
_ जीवन को जीने प्रयास कीजिए,
_ जो सामने है दिल से उसका उपभोग कीजिए..
_ जीना ज़रूरी है..
_ एक दिन सभी मर जाएंगे, इस सच को जानते हुए भी जीना ज़रूरी है.
_ जीने की सबसे बड़ी शर्त है भय रहित जीना.
_ भयभीत आदमी के शरीर में खाना नहीं लगता – प्रोटीन, विटामिन काम नहीं करते.






