सुविचार – रोटी – Bread – 127 | Mar 30, 2014 | सुविचार | 0 comments कभी कहा जाता था, “मनुष्य केवल रोटी के सहारे जीवित नहीं रह सकता, रोटी चाहिए सिर्फ जीने के लिए, ना कि हम जी रहे हैं रोटी के लिए.. _ “हमारी और भी भूखें हैं” लेकिन आजकल महँगाई और पैसे की कमी को देखते हुए यह कथन बदल कर यूँ हो गया है, _ “ऐसा कोई मनुष्य नहीं हो सकता जो रोटी के बिना जी सके. _ पहले पेट तो भरे, बाद में और कुछ सूझेगा” _ देखते-देखते रुपए का अवमूल्यन कुछ ऐसा हुआ कि रोटी अहम् मुद्दा बन कर रह गई.!! “रोज की कोई रोटी नहीं देगा.. _अपनी ही मेहनत काम आएगी” Submit a Comment Cancel reply Your email address will not be published. Required fields are marked *Comment Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ