सच कड़वा होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़वा वो इंसान होता है, जो सच सुनकर अपने अंदर झांकने की बजाय अपनी आवाज ऊंची कर लेता है.
_ ऐसे लोग असल में कमजोर होते हैं, जिनके पास ना तर्क होता है, ना क्षमता, बस शोर होता है.
_ अपनी औकात से ज्यादा बोलना इनके लिए एक आदत नहीं, एक ढाल होती है, जिससे ये अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश करते हैं.
_ जो इंसान कुछ कर नहीं सकता, वो अक्सर चिल्लाता है.
_ उसकी आवाज जितनी ऊंची होती है, उसका अंदर उतना ही खाली होता है.
_ वो सामने वाले को गुस्सा दिलाकर ये साबित करना चाहता है कि वो भी किसी से कम नहीं, जबकि हकीकत ये होती है कि उसे खुद पर ही भरोसा नहीं होता.
_ ऐसे लोग बहस नहीं करते, बस माहौल खराब करते हैं.
_ इनकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि ये अपनी असफलता को दूसरों पर थोपते हैं.
_ खुद कुछ हासिल नहीं कर पाए, तो दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करते हैं.
_ लेकिन सच ये है कि इज्जत चिल्लाने से नहीं, काम करने से मिलती है.
_ और जो ये समझ नहीं पाता, वो जिंदगी भर सिर्फ बोलता ही रह जाता है.
_ ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे सही तरीका उनकी तरह बनना नहीं, बल्कि उन्हें उनकी हकीकत दिखाना है.
_ शांत रहकर, अपने काम से, अपनी सफलता से.
_ क्योंकि जब एक शोर करने वाला इंसान एक मजबूत और शांत इंसान के सामने खड़ा होता है, तो उसकी असली औकात खुद ही सामने आ जाती है.
_ जो सिर्फ बोलता है, वो कभी कर नहीं पाता और जो कर दिखाता है, उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती.
_ यही फर्क है असली और नकली में.