दुनिया किसको कहते हैं..?
_ दुनिया कोई जगह नहीं है.
_ दुनिया एक धोखा है, जो सबको अलग-अलग दिखता है.
_ एक भूखे के लिए दुनिया एक रोटी है.
_ एक आशिक के लिए दुनिया उसकी महबूबा है.
_ एक व्यापारी के लिए दुनिया एक बाजार है.
_ एक संत के लिए दुनिया एक नाटक है.
_ और एक बच्चे के लिए दुनिया उसकी माँ की गोद है.
– दुनिया बाहर नहीं, अंदर है.
_ तुम उदास हो तो दुनिया उदास लगती है,
_ तुम खुश हो तो दुनिया भी नाचती हुई लगती है.
_ वो तो एक आईना है.
_ जैसा चेहरा लेके जाओगे, वैसा ही दिखाएगी.
– असली परिभाषा सुनोगे मित्र ?
_ दुनिया उस मेले को कहते हैं,
_ जहाँ सब आए हैं खोने के लिए, और ढूंढने का नाटक कर रहे हैं.!!





