सुविचार 3813
“परिपक्वता”, दिखावटी गम्भीरता की मोहताज़ नहीं होती, _ सदैव हँसते हुये चेहरे भी दूसरों की आँखों के आंसुओं को समझने व उन्हें पोंछने की क्षमता रखते है “
_ लेकिन अगर हम अपने असभ्य और रूखे व्यवहार से स्वयं को इंसान से बदतर बना लें,
तो क्या वह “इंसानियत” भी अर्जित की जा सकती है ?
_ चाहे कोई लाख कोशिश कर ले, दुनिया में इंसानियत ही जिंदा रहेगी..!!
When thinking about life, remember this: no amount of guilt can change the past and no amount of anxiety can change the future.
_लेकिन अपने आप को चिंता न करने के लिए प्रशिक्षित करें.!
उनमें से कुछ आपका शुभ होता देख कर चिंतित भी हो जाते हैं.