सुविचार 3604
आप इच्छा को त्याग नहीं सकते, _ आप उसकी प्रकृति और उसकी निरर्थकता को सिर्फ़ समझ सकते हैं.
_ उसको संसार की सारी दौलत मिल कर भी संतुष्टि नहीं दे सकती..
“-जो थोड़े से संतुष्ट नहीं है, वह किसी चीज़ से संतुष्ट नहीं है.”
“-खुश रहने का मतलब यह जानना है कि थोड़े से संतुष्ट कैसे रहा जाए.”
आस पास का समस्त परिवेश नकारात्मक उर्जा से भर जाता है,”
खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ी हवा मिलती है.