सुविचार 3157

”जब ‘मैं, मुझे और मेरा’ को अहमियत दी जाती है, तब घनिष्टता कहीं खो जाती है

और संबंधों में दरार आने लगती है.

सुविचार 3156

मनुष्य को अपनी शक्ति के सहारे खड़ा होना चाहिए, दूसरे के आसरे नहीं.

सुविचार 3155

ईमानदारी की कमाई इंसान खाता है और बेईमानी की कमाई इंसान को खा जाती है.

सुविचार 3154

जब जीवन के कष्ट, दुख, हमें नचाते नाच ।

अपनो के अपनत्व का, तब दिखता है साँच ।।

सुविचार 3153

भेजते रहिए अपनेपन के रंग एक दूसरे तक….

_ मुलाक़ात चाहे जब हो..अपनेपन का अहसास तो रोज महसूस होता रहे..!!

कितनी अनोखी है यह दुनिया _ जिसमें एक छोटी सी मुलाक़ात _एक इंसान को दूसरे इंसान से जोड़ देती है !! “जुड़ना बहुआयामी होता है”

सुविचार 3152

अगर आपके अच्छे होने के बावजूद भी लोग आपके बारे में गलत बोलते हैं,

तो शायद वो आपसे अंजान हैं.

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