सुविचार 2684
मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही,
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं.
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं.
फिर एक बार हर इंसान मुस्कराएगा,
मायूस न होना यारों,
ये बुरा वक्त भी कुछ ना कुछ जीने का नया तरीका सीखा कर जायेगा.
हम कभी नहीं समझे, सो अब कुदरत समझा रही है.
किसी भी काम को पूरी लगन के साथ करो.
आप का आज कैसा होना चाहिए, उसमें आप क्या करें, क्या न करें – यह सब पूरी तरह आपके उपर निर्भर है.
तो इंसान मतलबी न होता.