सुविचार 1155

मनुष्य की भीतर जो कुछ सर्वोत्तम है उस का विकास प्रशंसा एवं प्रोत्साहन द्वारा ही किया जाता है.

सुविचार 1153

जीवन में धूपछांव की तरह खुशी और गम साथसाथ चलते हैं. कहीं खुशी है तो कहीं गम. लेकिन व्यवहार का शिष्टाचार कहता है कि अपनी खुशियों को दूसरों के दुख से कम न समझें और उन के दुख में हिस्सेदार बनें.

सुविचार 1151

हम सभी के आस पास अच्छी बुरी बातों का पिटारा होता है. यह हम पर निर्भर करता है कि हम सही का चुनाव करते हैं या ग़लत का – किसी भी बात का अनुकरण करने के लिए विवेक की जरुरत होती है.

सुविचार 1150

जीवन के लिए संतुलन आवश्यक है. जब संतुलन होता है तो विकास होता है. आप जिंदगी बिताने नहीं आए, जीवन जीने के लिए आए हैं.
error: Content is protected