सुविचार – *”तीन पहर”* – 1051
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
सब कुछ पाया इस जीवन में,
फिर भी इच्छाएं बाकी हैं।
दुनिया से हमने क्या पाया,
यह लेखा जोखा बहुत हुआ,
इस जग ने हमसे क्या पाया,
बस यह गणनाएं बाकी हैं।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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इस भाग दौड़ की दुनिया में,
हमको एक पल का होश नहीं,
वैसे तो जीवन सुखमय है,
पर फिर भी क्यों संतोष नहीं,
क्या यूँ ही जीवन बीतेगा ?
क्या यूँ ही सांसे बंद होंगी ?
औरों की पीड़ा देख समझ,
कब अपनी आँखे नम होंगी ?
मन के भीतर कहीं छिपे हुए,
इस प्रश्न का उत्तर बाकी है।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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मेरी खुशियां, मेरे सपने,
मेरे बच्चे, मेरे अपने,
यह करते करते शाम हुई,
इससे पहले तम छा जाए,
इससे पहले कि शाम ढ़ले,
दूर परायी बस्ती में,
एक दीप जलाना बाकी है।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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सुविचार – दिल दुःखता है न यार .. – 1050
_दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए.!! – जावेद अख़्तर
_सिलसिला चाहतों का यूहीं चलते रहता है.!!
_ जब बिना कुछ कहे भी दिल कह देता है, “हाँ…, मुझे जो चाहिए था.. वो यही है.!!
_ या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं.!!
_ जब तक दिल में कोई चिंगारी ना हो.!! ~तेज
_और इसी जंग में हम बिखर जाते हैं,!!
_ तो दिल अपने आप दीवार खड़ी कर लेता है.!!
_पर कुछ लोग ऐसे थे, जो इसे भी तोड़ गए.!!
_इसे हमेशा खुश रखें – चाहे आपका हो या दूसरों का..!!
_ कुछ बातें यूँही दिल से निकल जाती है.!!
_ इसलिए किसी से भी अपने दिल की बात कहने से पहले सोचो ज़रूर.!!
_ लेकिन दिमाग को उसे स्वीकारने में वक्त चाहिए होता है.
_ क्योंकि उनकी सच्चाई को कम ही लोग स्वीकार कर पाते हैं.!!
सुविचार 1049
_ अपने जीवन को खूबसूरत और खुशगवार बनाना हमारे ही हाथ में है.
_बस अपनी परिस्थितियों को देखने के नजरिए में थोड़ा सा परिवर्तन कीजिए और पाइए ढेर सारा फर्क अपने जीवन में.
_अक्सर कुछ अनसोचा, अनचाहा होने पर हम भावनात्मक रूप से थक जाते हैं और उदास हो जाते हैं.
_ यह जरुरी है कि कुछ समय ऐसे पलों को भी भरपूर जीएं.
_ याद रखें, यह मानसिक टूटन या थकान अस्थायी होती है,
_ कुछ प्रयासों द्वारा इसे दूर कर इस स्थिति से उबरा जा सकता है.




