सुविचार – 【अंतर्मन】- 1034

*【अंतर्मन】*

घनघोर अंधेरा छाये जब

कोई राह नज़र ना आये जब

कोई तुमको फिर बहकाये जब

इस बात पे थोड़ी देर तलक

तुम आँखें अपनी बंद करना

और अंतरमन की सुन लेना

मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें

पर अंतरमन सच बोलेगा……….

 

जब लम्हा-लम्हा ‘आरी’ हो

और ग़म खुशियों पे भारी हो

दिल मुश्किल में जब पड़ जाये

कोई तीर सोच की ‘अड़’ जाये

तुम आँखें अपनी बंद करना

और अंतरमन की सुन लेना

मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें

पर अंतरमन सच बोलेगा……..

 

जब सच-झूठ में फर्क ना हो

जब गलत-सही में घिर जाओ

तुम नज़र में अपनी गिर जाओ

इस बात पे थोड़ी देर तलक

तुम आँखें अपनी बंद करना

और अंतरमन की सुन लेना

मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें

पर अंतरमन सच बोलेगा……..

 

ये जीवन एक छाया है

दुख, दर्द, मुसीबत माया है

दुनिया की भीड़ में खोने लगो

तुम खुद से दूर होने लगो

तुम आँखें अपनी बंद करना

और अंतरमन की सुन लेना

मुमकिन है हम तुम झूठ कहें

पर अंतरमन सच बोलेगा ……।

सुविचार 1033

यदि आप का मित्र या संबधी आप से अपने मन की बात कहता है तो चुपचाप सुन कर उसे गुप्त ही रखें. याद रखें, वे बातें उस ने आप को अपना समझ कर की थी.

सुविचार – कुछ बातों की गोपनीयता-निजता बना कर रखें – 1032

कुछ बातों की गोपनीयता बना कर रखें.

_सहानुभूति पाने और अपना मन हलका करने के लिए हम अपने मन की बात दूसरों से करते तो हैं,
_ लेकिन दूसरों की नजर में गिर भी जाते हैं.
_ जगहंसाई भी इसी से मिलती है.
_ बात मुंह बदलते देर नहीं करती.
_ दूसरों को दोष देने से पहले यह तो सोचें,
_ जो बात आप अपने पेट में नहीं रख सके, दूसरा क्यों रखेगा.
 
जब आप अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े विवरण को हर किसी से बताना बंद कर देते हैं, तो आपके दुश्मन जानकारी से वंचित हो जाते हैं.
_ कोई गपशप नहीं फैलने पाती.
_ कोई आपकी पसंदों का मजाक नहीं उड़ाता.
_ जो लोग आपसे दोस्ती और अपने होने का दावा करते हैं,
_ वे सभी असल में आपके दोस्त और अपने नहीं होते…
_ कुछ लोग सिर्फ यह दिखावा करते हैं कि वे आपके साथ हैं, ताकि वे आपके दुश्मनों को जानकारी दे सकें.
_ सावधान रहें कि आप किसे अपना दोस्त और अपना कहते हैं,
_ क्योंकि पृथ्वी पर सबसे खतरनाक दुश्मन वे लोग होते हैं जो आपके दोस्त और अपना होने का नाटक करते हैं.
_ गोपनीयता ही शक्ति है, जो लोग नहीं जानते, वे उसे नष्ट नहीं कर सकते.
 
अपना मुंह बंद रखें !!! एक घर खरीदना हो ?
अपना मुंह बंद रखें !!🙊एक नई कार खरीदना हो ?
अपना मुंह बंद रखें !!🙊शादी होना ?
अपना मुंह बंद रखें !! 🙊छुट्टी पर जा रहे हैं ?
अपना मुंह बंद रखें !! 🙊कोर्स करने जा रहे हैं ?
अपना मुंह बंद रखें !! 🙊पद्दोनती हुई ?
99% मामलों में हमारे सपने/दृष्टांत सच नहीं होते हैं, क्योंकि हम गलत समय पर गलत लोगों के लिए बहुत जल्दी अपना मुंह खोल देते हैं.
हम अपनी परियोजनाओं/सफलताओं को उन लोगों के साथ साझा करने में गलत थे, जो “दोस्त” होने का दावा करते हैं ;
नीची ईर्ष्या _लोगों के लिए पर्याप्त हैं, उसे खाने और फाड़ने के लिए, _इससे पहले कि ऐसा होता भी है, इसलिए … अपना मुंह बंद रखें !!!
आपके अधिकांश “दोस्त”, आपको अच्छा करते देखना चाहते हैं लेकिन _उनसे बेहतर कभी नहीं !!
और सिर्फ एक रिमाइंडर ! यहाँ तक कि परिवार के कुछ सदस्यों में भी छिपी ईर्ष्या होती है !!!
लेकिन, वे उसे रोक नहीं सकते जो परमेश्वर ने आपके लिए रखा है !
इसलिए अपना मुंह बंद रखें !!! “बुद्धिमान के लिए एक शब्द ही काफी है”
 
SHUT YOUR MOUTH !!!
Buying a house?
Close your mouth. 🙊
Buying a new car?
Close your mouth. 🙊
Getting married?
Close your mouth. 🙊
Going on a holiday?
Close your mouth. 🙊
Going to do a course?
Close your mouth. 🙊
Got promoted?
Close your mouth. 🙊
99% of the time the reason that our dreams/visions don’t come true when they are supposed to, is because we open our mouth too soon to the wrong people at the wrong time.
We were wrong to share our projects/successes with people who claim to be “friends”. The envy and the low key jealousy is enough for people to feed off and tear down what COULD HAVE BEEN, before it even happens, so… Close your mouth!!! 🙊
The majority of your “friends”, want to see you do well but Never better than them!!
And just a reminder! Even Some family members have a hidden envy!!!
But, they can’t stop what God has for you!
Be Wise , Remember If Fish 🐠 closed its mouth 👄 The hook of the Fisher man won’t catch it.
A word is enough for the wise.”

सुविचार – देर से ही सही, शायद मुझे जीना आ गया है. – 1031

देर से ही सही, शायद मुझे जीना आ गया है.!!

मैं जितने साल जी चुका हूँ, उससे अब कम साल मुझे जीना है। यह समझ आने के बाद मुझमें यह परिवर्तन आया है :
१. किसी प्रियजन की विदाई से अब मैं रोना छोड़ चुका हूँ क्योंकि आज नहीं तो कल मेरी बारी है।
२. उसी प्रकार,अगर मेरी विदाई अचानक हो जाती है, तो मेरे बाद लोगों का क्या होगा, यह सोचना भी छोड़ दिया है क्योंकि मेरे जाने के बाद कोई भूखा नहीं रहेगा और मेरी संपत्ति को कोई छोड़ने या दान करने की ज़रूरत नहीं है।
३. सामने वाले व्यक्ति के पैसे, पावर और पोजीशन से अब मैं डरता नहीं हूँ।
४. खुद के लिए सबसे अधिक समय निकालता हूँ। मान लिया है कि दुनिया मेरे कंधों पर टिकी नहीं है। मेरे बिना कुछ रुकने वाला नहीं है।
५. छोटे व्यापारियों और फेरीवालों के साथ मोल-भाव करना बंद कर दिया है। कभी-कभी जानता हूँ कि मैं ठगा जा रहा हूँ, फिर भी हँसते-मुस्कुराते चला जाता हूँ।
६. कबाड़ उठाने वालों को फटी या खाली तेल की डिब्बी वैसे ही दे देता हूँ, पच्चीस-पचास रुपये खर्च करता हूँl जब उनके चेहरे पर लाखों मिलने की खुशी देखता हूँ तो खुश हो जाता हूँ।
७. सड़क पर व्यापार करने वालों से कभी-कभी बेकार की चीज़ भी खरीद लेता हूँ।
८. बुजुर्गों और बच्चों की एक ही बात कितनी बार सुन लेता हूँ। कहने की आदत छोड़ दी है कि उन्होंने यह बात कई बार कही है।
९. गलत व्यक्ति के साथ बहस करने की बजाय मानसिक शांति बनाए रखना पसंद करता हूँ।
१०. लोगों के अच्छे काम या विचारों की खुले दिल से प्रशंसा करता हूँ। ऐसा करने से मिलने वाले आनंद का मजा लेता हूँ।
११. ब्रांडेड कपड़ों, मोबाइल या अन्य किसी ब्रांडेड चीज़ से व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना छोड़ दिया है। व्यक्तित्व विचारों से निखरता है, ब्रांडेड चीज़ों से नहीं, यह समझ गया हूँ।
१२. मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ जो अपनी बुरी आदतों और जड़ मान्यताओं को मुझ पर थोपने की कोशिश करते हैं। अब उन्हें सुधारने की कोशिश नहीं करता क्योंकि कई लोगों ने यह पहले ही कर दिया है।
१३. जब कोई मुझे जीवन की दौड़ में पीछे छोड़ने के लिए चालें खेलता है, तो मैं शांत रहकर उसे रास्ता दे देता हूँ। आखिरकार, ना तो मैं जीवन की प्रतिस्पर्धा में हूँ, ना ही मेरा कोई प्रतिद्वंद्वी है।
१४. मैं वही करता हूँ जिससे मुझे आनंद आता है। लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे, इसकी चिंता छोड़ दी है। चार लोगों को खुश रखने के लिए अपना मन मारना छोड़ दिया है।
१५. फाइव स्टार होटल में रहने की बजाय प्रकृति के करीब जाना पसंद करता हूँ। जंक फूड की बजाय बाजरे की रोटी और आलू की सब्जी में संतोष पाता हूँ।
१६. अपने ऊपर हजारों रुपये खर्च करने की बजाय किसी जरूरतमंद के हाथ में पाँच सौ हजार रुपये देने का आनंद लेना सीख गया हूँ। और हर किसी की मदद पहले भी करता था और अब भी करता हूँ।
१७. गलत के सामने सही साबित करने की बजाय मौन रहना पसंद करने लगा हूँ। बोलने की बजाय चुप रहना पसंद करने लगा हूँ। खुद से प्यार करने लगा हूँ।
१८. मैं बस इस दुनिया का यात्री हूँl मैं अपने साथ केवल वह प्रेम, आदर और मानवता ही ले जा सकूंगा जो मैंने बाँटी हैl यह मैंने स्वीकार कर लिया है।
१९. मेरा शरीर मेरे माता-पिता का दिया हुआ हैl आत्मा परम कृपालु प्रकृति का दान है और नाम फॉइबा का दिया हुआ है… जब मेरा अपना कुछ भी नहीं है, तो लाभ-हानि की क्या गणना?
२०. अपनी सभी प्रकार की कठिनाइयाँ या दुख लोगों को कहना छोड़ दिया है, क्योंकि मुझे समझ आ गया है कि जो समझता है उसे कहना नहीं पड़ता और जिसे कहना पड़ता है वह समझता ही नहीं।
२१. अब अपने आनंद में ही मस्त रहता हूँ क्योंकि मेरे किसी भी सुख या दुख के लिए केवल मैं ही जिम्मेदार हूँl यह मुझे समझ आ गया है।
२२. हर पल को जीना सीख गया हूँ क्योंकि अब समझ आ गया है कि जीवन बहुत ही अमूल्य हैl यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं हैl कुछ भी कभी भी हो सकता है, ये दिन भी बीत जाएँगे।
२३. आंतरिक आनंद के लिए मानव सेवा, जीव दया और प्रकृति की सेवा में डूब गया हूँl मुझे समझ आया है कि अनंत का मार्ग इन्हीं से मिलता है।
२४. प्रकृति और देवी-देवताओं की गोद में रहने लगा हूँl मुझे समझ आया है कि अंत में उन्हीं की गोद में समा जाना है।
देर से ही सही, लेकिन समझ आ गया हैl शायद मुझे जीना आ गया हैl

सुविचार – नकारात्मक विचारों को कैसे खत्म करें ? – 1030

नकारात्मक विचारों को कैसे खत्म करें ?

– योग और ध्यान करें, जिससे नकारात्मकता खत्म हो जाएगी और विचारों में स्पष्टता आ जाएगी.
– मोटिवेशनल किताबें पढ़ें.
– हमेशा सकारात्मक विचार वाले लोगों का साथ करें.
– सैड म्यूजिक सुनने से बचें, मन को शांत रखने वाले म्यूजिक सुनें.
– टाइम मैनेजमेंट करें.
– आलोचना सुनने और करने से बचें.
– हर कार्य को हाथ में न लें.
– किसी नकारात्मक बहस का हिस्सा न बनें.
– लोगों से उम्मीद न रखें.
– परोपकार तथा लोगों की सहायता करने की कोशिश करिए.
– लोगों को माफ करने की आदत डालिए.

कोई शख्स अचानक से क्यों अच्छा नहीं लग रहा है, पहले तो ऐसा नहीं था..!

_ दरअसल आप चाहें कितना ही सकारात्मक क्यों ना हों,
_ सामने वाला अपनी नकारात्मकता ..आप तक पहुंचा ही देता है.
_ बेवजह चिढ़ने वाले की चिढ़ ..आप तक पहुंच ही जाती है.
_ फिर क्या.. हमारे जैसे तो अपने रास्ते.. तू अपने रास्ते..!!
जब हम विचारों में होते हैं तो हम जीवन को समझते हैं..

_ सोचते हैं कि जीवन भर क्या खोया है और क्या पाया है..
_ जो पाया जाता है उसे अंत में खोना ही पड़ता है,
_ जिंदगी धुंधली हो जाती है..
_ इसी उलझन के कारण जीवन की पहेली अबूझ रह जाती है.
_ फिर भी जिंदगी कब सुलझती है ?
_ जिंदगी इसी में ऐसे ही चलती रहती है.!!
नकारात्मक लोगों की बातों पर आप जितना कम ध्यान देते हो,
_ आपकी ज़िंदगी उतनी ही ख़ुशहाल होती चली जाती है.!!
नकारात्मक लोगों से दूर रहो, क्योंकि ये ख़ुद तो कुछ करते नहीं..

_ आपको भी कुछ नहीं करने देंगे.!!

सुविचार – वो ज़माना और था. – बात उन दिनों की है – 1029

यदि सुख-चैन पाना है तो एक बार फिर पीछे की ओर चलो, सिर्फ़ इतना पीछे कि संस्कारों को छू सको, लेकिन आगे भी अनछुआ न रह जाए.

– Manika Mohini

वो ज़माना और था…

कि जब पड़ोसियों के आधे बर्तन हमारे घर और हमारे बर्तन उनके घर मे होते थे।
वो ज़माना और था ..😌
कि जब पड़ोस के घर बेटी पीहर आती थी तो सारे मौहल्ले में रौनक होती थी।
कि जब गेंहूँ साफ करना किटी पार्टी सा हुआ करता था ,
कि जब ब्याह में मेहमानों को ठहराने के लिए होटल नहीं लिए जाते थे,
पड़ोसियों के घर उनके बिस्तर लगाए जाते थे।
वो ज़माना और था…😌
कि जब छतों पर किसके पापड़ और आलू चिप्स सूख रहें है बताना मुश्किल था।
कि जब हर रोज़ दरवाजे पर लगा लेटर बॉक्स टटोला जाता था।
कि जब डाकिये का अपने घर की तरफ रुख मन मे उत्सुकता भर देता था ।
वो ज़माना और था…😌
कि जब रिश्तेदारों का आना,
घर को त्योहार सा कर जाता था।
कि जब आठ मकान आगे रहने वाली माताजी हर तीसरे दिन तोरई भेज देती थीं,
और हमारा बचपन कहता था , कुछ अच्छा नहीं उगा सकती थीं ये।
वो ज़माना और था…
कि जब बच्चे के हर जन्मदिन पर महिलाएं बधाईयाँ गाती थीं……और बच्चा गले मे फूलों की माला लटकाए अपने को शहंशाह समझता था।
कि जब भुआ और मामा जाते समय जबरन हमारे हाथों में पैसे पकड़ाते थे,
और बड़े आपस मे मना करने और देने की बहस में एक दूसरे को अपनी सौगन्ध दिया करते थे।
वो ज़माना और था …😌
कि जब शादियों में स्कूल के लिए खरीदे काले नए चमचमाते जूते पहनना किसी शान से कम नहीं हुआ करता था।
कि जब छुट्टियों में हिल स्टेशन नहीं मामा के घर जाया करते थे….और अगले साल तक के लिए यादों का पिटारा भर के लाते थे।
कि जब स्कूलों में शिक्षक हमारे गुण नहीं हमारी कमियां बताया करते थे।
वो ज़माना और था..😌
कि जब शादी के निमंत्रण के साथ पीले चावल आया करते थे।
कि जब बिना हाथ धोये मटकी छूने की इज़ाज़त नहीं थी।
वो ज़माना और था….😌
कि जब गर्मियों की शामों को छतों पर पानी का छिड़काव करना जरूरी हुआ करता था।
कि जब सर्दियों की गुनगुनी धूप में स्वेटर बुने जाते थे और हर सलाई पर नया किस्सा सुनाया जाता था।
कि जब रात में नाख़ून काटना मना था…..जब संध्या समय झाड़ू लगाना बुरा था ।
वो ज़माना और था…..
कि जब बच्चे की आँख में काजल और माथे पे नज़र का टीका जरूरी था।
कि जब रातों को दादी नानी की कहानी हुआ करती थी ।
कि जब कजिन नहीं सभी भाई बहन हुआ करते थे ।
वो ज़माना और था….😌
कि जब डीजे नहीं , ढोलक पर थाप लगा करती थी,
कि जब गले सुरीले होना जरूरी नहीं था, दिल खोल कर बन्ने बन्नी गाये जाते थे।
कि जब शादी में एक दिन का महिला संगीत नहीं होता था आठ दस दिन तक गीत गाये जाते थे।
वो ज़माना और था…😌
कि जब बिना AC रेल का लंबा सफर पूड़ी, आलू और अचार के साथ बेहद सुहाना लगता था।
वो ज़माना और था..😌
कि जब चंद खट्टे बेरों के स्वाद के आगे कटीली झाड़ियों की चुभन भूल जाए करते थे।
वो ज़माना और था….😌
कि जब सबके घर अपने लगते थे……बिना घंटी बजाए बेतकल्लुफी से किसी भी पड़ौसी के घर घुस जाया करते थे।
वो ज़माना और था..😌
कि जब पेड़ों की शाखें हमारा बोझ उठाने को बैचेन हुआ करती थी।
कि जब एक लकड़ी से पहिये को लंबी दूरी तक संतुलित करना विजयी मुस्कान देता था।
कि जब गिल्ली डंडा, चंगा पो, सतोलिया और कंचे दोस्ती के पुल हुआ करते थे।
वो ज़माना और था…
कि जब हम डॉक्टर को दिखाने कम जाते थे डॉक्टर हमारे घर आते थे,
डॉक्टर साहब का बैग उठाकर उन्हें छोड़ कर आना तहज़ीब हुआ करती थी ।
कि जब इमली और कैरी खट्टी नहीं मीठी लगा करती थी।
वो ज़माना और था…😌
कि जब बड़े भाई बहनों के छोटे हुए कपड़े ख़ज़ाने से लगते थे।
कि जब लू भरी दोपहरी में नंगे पाँव गलियां नापा करते थे।
कि जब कुल्फी वाले की घंटी पर मीलों की दौड़ मंज़ूर थी ।
वो ज़माना और था😌
कि जब मोबाइल नहीं धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सरिता और कादम्बिनी के साथ दिन फिसलते जाते थे।
कि जब TV नहीं प्रेमचंद के उपन्यास हमें कहानियाँ सुनाते थे।
वो ज़माना और था😌
कि जब मुल्तानी मिट्टी से बालों को रेशमी बनाया जाता था ।
कि जब दस पैसे की चूरन की गोलियां ज़िंदगी मे नया जायका घोला करती थी ।
कि जब पीतल के बर्तनों में दाल उबाली जाती थी।
कि जब चटनी सिल पर पीसी जाती थी।
वो ज़माना और था,
वो ज़माना वाकई कुछ और था।
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