सुविचार 338 | Oct 26, 2014 | सुविचार दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै. इस में कांटे हैं, इस में गुलाब के फूल हैं, इस में रातें हैं, इस में दिन भी हैं, दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै, संतुलित – इस में सब कुछ है.
सुविचार 337 | Oct 26, 2014 | सुविचार थोड़ा मान पाने के लिए अपमान भी सहना पड़ता है, थोड़ा सुख पाने के लिए दुःख भी सहना पड़ता है.
सुविचार- पुच्छल्ला, पुछल्ला, पिछलग्गु, दुँबाला, साथ न छोड़नेवाला – 336 | Oct 26, 2014 | सुविचार किसी के साथ होने में तभी मज़ा है जब किसी को आपकी ज़रूरत हो.. _ वरना तो आप फ़ालतू पुच्छल्ले की तरह पीछे लगे हुए हैं. .… अरे नहीं, नहीं, पुच्छल्ले कहाँ फ़ालतू होते हैं ? उनकी ज़रूरत तो सब से ज़्यादा होती है. _ किसी को आपकी ज़रूरत इंसान के रूप में हो, न हो, पुच्छल्ले के रूप में ज़रूर अच्छी लगेगी. _ क्योंकि पुच्छल्ला सिर्फ़ सेवादार होता है, उसे कुछ चाहने का हक़ नहीं होता. – Manika Mohini
सुविचार – शर्म – 335 | Oct 25, 2014 | सुविचार शर्म एक ऐसा भाव है, जो बताता है कि, हमारे जीवन में कहीं कुछ गड़बड़ है. इस के कारण हम दूसरों से कटने लगते हैं और आत्मसम्मान की कमी का अनुभव करते हैं.
सुविचार 334 | Oct 25, 2014 | सुविचार नकारात्मक सोच में जीने वाला एक व्यक्ति अनेक उत्साही व्यक्तियों को भ्रमित कर देता है अतः कभी भी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति की संगति न करें.