हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. यह स्वांग ही एक दिन हमें निगल जाता है. इसके बजाय अगर हम अपनी कमियों- कमजोरियों को स्वीकार करते हुए चलें, तो जीवन का सफ़र बड़े सकून से कट सकता है और लोगों का सहयोग भी भरपूर मिल सकता है.
उतार चढ़ाव तो जीवन के अभिन्न अंग हैं. उन से घबराने के बजाय उन का मुकाबला करना चाहिए. हम आखिर ऐसी गारन्टी ले कर चलते ही क्यों है कि दुःख हमारे पास फटकेगा ही नहीं और सुख हमेशा बाहें फैलाए खड़ा रहेगा.
झूठे वादे, कोरे आश्वासन व खोखली सहानुभूति से छणिक सामीप्य हासिल किया जा सकता है, परन्तु सच के सामने आते ही दूरी बढ़ जाती है.
सुविचार 233
जिन्दगी के हर कदम में, हर छन में कोई न कोई खतरा होगा, कोई न कोई जोखिम होगा, जो जोखिम का सामना कर सकता है उसी को विजय मिला करती है.
सुविचार 232
उन सारे विचारों को मन में न आने दें, जो आपको निराशा की गहरी खाइयों में धकेल के ले जाएँ. उन विचारों को आने दें, कि जिससे आप उत्साहित होकर संसार में अपना कर्त्तव्य कर सकें.
सुविचार – ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ???? – 231
ऐसा क्यों (Why) ? विचार कीजियेगा ????
जिसकी आँखों में नींद है …. उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं …
जिसके पास अच्छा बिस्तर है …….उसकी आँखों में नींद नहीं ….
जिसके मन में दया है ….उसके पास खर्च करने के लिए धन नहीं ….
जिसके पास खर्च करने के लिए धन है ….उसके मन में दया नहीं ….
जिन्हे कद्र है रिश्तों की … उन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता …
जिनसे रिश्ता रखना चाहते हैं ….उन्हें कद्र नहीं है रिश्तों की ….
जिसको भूख है ………उसके पास खाने के लिए भोजन नहीं….
जिसके पास खाने के लिए भोजन है ………उसको भूख नहीं…
कोई अपनों के लिए…. रोटी छोड़ देता है…
कोई रोटी के लिए….. अपनों को छोड़ देता है….
ये दुनिया भी कितनी निराली है, कभी वक्त मिले तो सोचना..
सुविचार 230
जागो और देखो कि जीवन अत्यन्त छोटा है, यह अहसास कि जीवन छोटा है, आपके जीवन में गतिशीलता लाता है – अनचाही चीजें, विकर्षण और बाधाएं स्वतः ही छूट जाती हैं.
सुविचार – जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – 229
हमें किसी खास समय का इंतजार नहीं करना चाहिए..
_ बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि हमारा हर एक पल खास बनें.!!
जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – अपने कर्मों को लेकर, अपने अतीत को लेकर और अपने वर्तमान को लेकर – बहुधा आम, अमरूद या मीठे फलों के लगाए हुए पौधे बड़े होकर बबूल या बेशर्म में तब्दील हो जाते हैं..
_ और आपको इन्हें देखकर दुख होता है कि आपका जीवन इन्हें पालते और पोसते हुए निकल गया और आप पछतावे में हाथ मलते रह जाते हैं.
_ बेहतर है कि अपने – आपसे एकाकार हो जाईए, आप जब अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सकते,
_ तो बाहरी चीजों या वस्तुओं से बदलने की क्या और कैसी उम्मीद रखेंगे.!!
– Sandip Naik





