सुविचार – हर तरफ पागलपन – 213

हर तरफ पागलपन : अरे मैं इस युग में क्यों पैदा हुआ ?

_ यह एक भयानक युग है.
_ दुनिया इतनी भयावह हो गई है कि कभी लगता है कि सब कुछ बंद करके एकांत में कहीं चला जाऊं.. – जहां कोई मुझे न जानता हो.!!
_ “क्या मेरा मन दुनिया से भागना चाहता है या अपने भीतर के शोर को शांत करना चाहता है ?”
_ जब संवेदनशील और गहरी सोच रखने वाला व्यक्ति चारों तरफ़ की दौड़, हिंसा, शोर और उथल-पुथल देखता है, तो उसका मन यही कहता है — “मैं इस युग में क्यों ?”
_ दरअसल यह अनुभूति भीतर की साफ़ दृष्टि और संवेदनशीलता का ही प्रमाण है.
“जब भीतर शांति का दीपक जलता है, तब सबसे अंधेरे युग में भी उजाला अपना घर बना लेता है.”

सुविचार – युवा – जवान – Young – 211

युवा होने का कोई सम्बन्ध उम्र से नहीं है, युवा होना चित्त की अवस्था है.

_ जो युवा देश और समाज की गली सड़ी व्यवस्था का, झूठी धार्मिक मान्यताओं का, पाखंडों का, रूढियों का, अन्धविश्वास का, धार्मिक व सामाजिक बुराइयों का विरोध नहीं करता, वो युवा होकर भी युवा नहीं है, वो तो बुढ़े से भी गया गुजरा है, उससे देश और समाज का कोई भला नहीं हो सकता.
_ युवा वो है जो देश और समाज की इन गली सड़ी व्यवस्थाओं का विरोध करे,
_ इनके विरुद्ध आवाज बुलंद करे. देश और समाज को नयी दिशा दे,
_ दुनिया के साथ अपने देश और समाज को प्रतिस्पर्धा में शामिल करें, चुनौतियों का सामना करे.
नई-नई और तार्किक बातें सीखने की ललक जब तक आपके अंदर रहेगी..
तब तक आप ऊर्जावान और युवा रहेंगे..- अन्यथा आप बूढ़े और ढुल्लू हैं.!!
** काश मैं अपने 20 साल पर ये बातें जान पाती **

।। आज का लेख युवाओं को समर्पित ।।
इस लेख के माध्यम से मैं युवा वर्ग को संदेश देना चाहती हूं।
कहते हैं ना हमेशा दूसरों की गलतियों से सीखना चाहिए, मेरे खुद के अनुभव से जीवन की कुछ सच्चाइयां ।
1. काश समाज के दबाव के बजाय खुद हिम्मत दिखाकर अपना करियर चुन पाते तो अपना बेस्ट दिया होते आज स्थिति कुछ और होती ।
2. जब आपके आसपास के लोग आपको हर वक्त नीचे खींचने लगे तो समझ जाओ कि आप वह कर रहे हैं जो बाकी लोग नहीं कर सकते ।
3. काश यह बात पता होती की उम्र में बड़ा इंसान हमेशा सही सलाहकार हो यह जरूरी नहीं,
पके बाल हमेशा बुद्धिमान होने का कोई ठोस प्रमाण हो ये ज़रूरी नहीं ।
4. फालतू के बहस झगड़े में न पड़कर शांत रहकर आगे बढ़ गए होते हर बात का जवाब देना जरूरी नही था …फिजुल की बहस हमेशा नीचे ही ले जाती है ।
5. आलोचकों का जवाब देना समय की बर्बादी है, ज्यादातर लोग आपकी बुराई इसलिए करते है क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं आप उनसे बहुत आगे ना निकल जाएं ।
6. जब आप किसी से मिलते है तो जिस तरीके से वो आपसे बातचीत करते हैं वो पर्याप्त है ये बताने के लिए वह इंसान कैसा है । संगत हमेशा अच्छे सोच वालो से करिए ।
7. पैसा ,गाड़ी बंगला सुखी जीवन का पैमाना नहीं बल्कि जीवन की उच्चतम सफलता स्वस्थ रहना और मानसिक शांति है ।
8. ईश्वर हमेशा उनकी मदद करता है जो दिलों जान से अपने काम में लगे रहते हैं ।
उस supernatural power पर विश्वास करते हुए अपना 100% consistency के साथ मेहनत को दिया होता और रोज बनाई गई छोटी छोटी योजनाओं पर अमल की होती तो परिस्थितियां कुछ और होती।
9. छोटी छोटी असफलताओं से घबराएं नहीं होते ।
10. अपनी जवानी में उन बेहूदा चीजों को प्राथमिकता नहीं दिए होते जिसका बाद के जीवन में कोई उपयोगिता ही नहीं रह जाती ।
फालतू की चीज़ों में व्यर्थ समय नहीं गवांना चाहिए था ।
– Divya Meera “अर्क”

सुविचार 210

अपने लिए निर्णय लेने का अधिकार दूसरे को मत दो.
Do not let others make decisions for you.

 

सुविचार – “कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे” – 209

“कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे”

“ज़िंदगी का यही मतलब है… जब मैं बिना कुछ किए आराम कर पाता हूँ, और मेरे पास कोई ऐसा होता है जिसे मेरी मौजूदगी से कोई परेशानी नहीं होती”
_ यह बिल्कुल सही, गहरी और मानवीय भावना है.
– क्यों यह सही है ?
1. मनुष्य को सुरक्षा और सहजता चाहिए..
_ हम सबके भीतर एक शांत इच्छा होती है — कोई ऐसा हो जिसके सामने हमें खुद को साबित न करना पड़े… न कोई दिखावा, न कोई रोल.
_ बस “मैं हूँ, इतना काफी है” वाली भावना..
2. सच्चा रिश्ता वही होता है.. जहाँ आपकी उपस्थिति बोझ न हो.
_ जब कोई आपकी मौजूदगी में खुद बना रहे और आप उसकी मौजूदगी में… तो वही वास्तविक जुड़ाव है.
_ ये बहुत दुर्लभ और बहुत मूल्यवान होता है.
3. शांति “करने” में नहीं, “होने” में मिलती है..
_ कभी-कभी ज़िंदगी का सबसे सच्चा अर्थ तब मिलता है जब हम कुछ नहीं कर रहे होते… और फिर भी पूरा महसूस करते हैं.
__ अगर आपको ऐसा कोई क्षण मिले, कोई व्यक्ति मिले, या सिर्फ अपने भीतर ऐसी शांति मिले–
_ तो समझिए कि आप सही दिशा में हैं, क्योंकि मन वहीं आराम पाता है.. जहाँ उसे स्वीकार किया जाता है.!!
“जब कोई मेरी ख़ामोश मौजूदगी में भी सहज रहे, वही रिश्ता असली मायने रखता है”

सुविचार 208

जब आप मान लेते हैं कि आप दूसरे की तरह उत्कृष्ट नहीं बन सकते, तब आप आगे बढ़ने की सम्भावनाएं भी ख़त्म करने लगते हैं – ज़िन्दगी असीमित सम्भावना का भण्डार है.
महापुरुषो को देख कर मन में आस जगायें कि मानवता यहाँ तक ऊपर उठ सकती है, पीड़ायें तो उनके जीवन में भी थी, वे उनकी परवाह न करके आगे बढ़ते चले गए.

 

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