सुविचार – धारणा – 133

13600591563_4fa4a37da1

जीवन एक बहुरूपी दर्पण है.

_ हम जो देखते हैं, वह अक्सर हमारी अपनी सोच और अनुभवों का प्रतिबिंब होता है.
_ हम हर व्यक्ति को अपनी धारणाओं के चश्मे से देखते हैं..
_ लेकिन क्या यह धारणा उस व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप होती हैं ?
_ या यह केवल हमारे पूर्वाग्रह और कल्पनाओं का परिणाम होती हैं ?
अनुभूति के आधार पर ही, धारणाएं निर्मित होती है,
विवेक की कसौटी पर कसा विचार ही सच्चा-ज्ञान है.
धारणाएं एक जाल हैं, जिसमें हम खुद को कैद कर लेते हैं.
_ सच वह रोशनी है, जो हर अंधेरे को मिटा सकती है.
गलत धारणा दूसरे को कम, खुद को अधिक पीड़ा पहुंचाती है.
_ अपनी धारणा को सच में तब्दील कीजिए या फिर उसे बदलिए.
किसी भी व्यक्ति के लिए आप जैसा सोचोगे, आप बस वही धारणा बनाओगे.!!
हमारी जो खुद की धारणा होती है हम सिर्फ उसे ही सच मानने लग जाते हैं..

_ और जब उसके विरोध में कोई बात कहता है तो हम उस पर यकीं नहीं करते, चाहे वह सच ही क्यों न हो..
_ और जब कोई छोटी सी भी बात हमारी धारणा के समर्थन में कही जाती है तो हम उस पर तुरंत यकीं कर लेते हैं और खुश हो जाते हैं…!
कुछ लोगों को दूसरों को जज करने में महारत हासिल होती है.

_ अपने गिरेबान में झांकते नहीं और दूसरों की पूरी कुंडली निकाल कर रख देते हैं..
_उनका स्वभाव है ये..
_अपनी धारणाओं से खुद की शांति भंग करते ही हैं, नेगेटिव वाइब्ज दूसरों तक भी भेजते हैं.
_ अपना चैन बनाए रखने के लिए ऐसों को इग्नोर करना बेहतर होता है.!!

सुविचार – भीड़ – Crowd – 132

13586496263_876db5af14

जो सुकून अज्ञात बन कर रहने में है न, वो भीड़ में कहाँ.!![
भीड़ अब सिर्फ जगहों में नहीं, हमारे जीवन में बस गई है –

हर मोड़ पर धक्का, हर कदम पर हुज्जत, हर दिन किसी न किसी अपमान को निगल जाना..
_ लंबी लाइनों में खड़े होना अब मजबूरी नहीं, हमारी नई आदत बन गई है.
_ अजीब बात यह है कि हम इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि यह सब अब असामान्य भी नहीं लगता.
_ मानो भीड़ सहना ही हमारी सबसे बुनियादी शर्त बन गई हो.!!
भीड़ का हिस्सा नहीं, एकांत की ताकत बनो ;
_ जहां कद्र ना हो, वहां खामोश रहना ही जीत है.!!

सुविचार – जनसंख्या – आबादी – Population – 131

13580965303_079bdd4216

आज समूचा विश्व कई समस्याओं से जूझ रहा है, सृष्टि अपने सबसे भयानक दौर में है.

_ अगर सभी समस्याओं के मूल में जाएं, तो अत्यधिक आबादी को पायेंगे.
_ पृथ्वी की छमता सीमित है और मनुष्य की आबादी असीमित.
_ इतने सुंदर ग्रह को हमने बर्बाद कर दिया और रहने लायक नहीं छोड़ा है.
_ हम ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, बढ़ते समुद्री जल स्तर, ओजोन लेयर में छेद, भुखमरी, आतंकवाद, परमाणु खतरा इत्यादि समस्याओं से घिरे हैं.
_ इन सबकी जड़ में जनसंख्या है.
_ अगर हम अपना अस्तित्व बचाये रखना चाहते हैं, तो सोच समझकर इस दुनिया में बच्चे लाएं और उनके लिए अच्छी दुनिया छोड़ जाएँ.
_अगर जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही तो हमारे पास आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से भी ज्यादा बेहतर भविष्य नहीं है.
इस धरती पर आठ सौ करोड़ की जनसँख्या destructive [विनाशकारी] है.. प्रकृति के लिए, जो पहले कभी नहीं थी.

_ चाहे जैसे हो, चाहे जिस विधि से हो, जनसंख्या एक बार कम हो और होनी ही चाहिए.!!
प्रकृति अपना संतुलन स्थापित स्वयं करती है और संभावना है कि प्रकृति आने वाले कुछ वर्षों में जनसंख्या संतुलन भी अपने दम पर कर लेगी.!!
बाजारवाद और जनसंख्या विस्फोट ने मनुष्य से सब कुछ छीन लिया है.!!
आज आबादी का ये हाल है कि चाहे कितनी भी ट्रेनें, बसें और हवाई जहाज चला लें,

_ कहीं जगह नहीं है.
_ स्कूल और कालेज खोल दिए जाएं,- सीट नहीं है,
_ हर जगह भीड़ ही भीड़ और चारों ओर पसरी अव्यवस्था..!!
प्राइवेट जॉब में कब जॉब चली जाए, पता नहीं.!

_ दूसरी कब मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, पता नहीं..
_ सभी कुछ व्यवसाय कर पायें, संभव नहीं..
_ इसीलिए सारी मारामारी और समस्यायें..
_आबादी पर नियंत्रण, कानूनन और समुचित औद्योगिकीकरण ही राहत दे सकता है.!!
अगर एक नाव में जरुरत से ज्यादा लोगों को बैठाते हैं तो उसका डूबना तय है,

_ तो अत्यधिक जनसंख्या ले कर विकसित होना कैसे सोचा जा सकता है.

आप 100 रूपए 10 लोगों में बांटते हैं, और अगर वही 100 रूपए 100 लोगों में बांटते हैं तो एक के हिस्से कितने आएंगे,

_ बस यही है जनसंख्या का गरीबी से रिश्ता.

सुविचार – स्मृति, स्मृतियाँ, स्मृतियां, स्मृतिया, यादें, यादों, याद, फोटो, तस्वीर, तसवीर, तस्वीरें – 130

13563053185_63b3db702b

स्मृतिया….यादें…..

स्मृतियों का नियंत्रण यदि आपके पास है तो जीवन में काफी कुछ आसान हो जाता है, क्यूंकि ज्यादातर हम विगत की अच्छी और बुरी यादों और बातों में उलझे रहते है ! और उनके अनुसार अपना वर्तमान बनाते है या प्रभावित कर लेते है !
अतः ऐसी चीज़ों पर नियंत्रण रखिये _क्युकी जो बीत गया वो कितना ही अच्छा या बुरा हो वर्तमान काल सर्वश्रेष्ठ होता है !!
बहुत पुरानी स्मृतियां कभी-कभी यूं कौंधती है कि मन विचलित हो जाता है और लगता है कि.. “आ अब लौट चलें.”
मुझे लगता है कि मेरी ज़िन्दगी खाली है, पर इस खाली ज़िन्दगी में भी इतना कुछ भरा हुआ है कि उड़ेंलते-उड़ेंलते भी खाली नहीं हो रहा.

_ घटनाएँ घटित होनी बंद होंगी, तो भीतर यादें भर जाएँगी.
_ यादों को मैं किसी रचना में ढाल दूँगी तो भीतर, और कुछ नहीं तो, खालीपन ही भर जाएगा.
_ ये चटखते हुए सपने, ये दरकते हुए अपने, ये रिश्तों के महल अधबने, लगता है कि ये ज़िन्दगी का सार तत्व निचोड़ कर ले गए और जीवन को खाली कर गए.
_ लेकिन नहीं, ये हमारी ज़िन्दगी को जुगुप्सा, वितृष्णा, हीन-भावना और आत्मग्लानि के साथ-साथ नाना प्रकार के रोमांचक अहसासों और अनोखे अनुभवों से भरते हैं, खट्टी-मीठी यादों से भरते हैं, दिवा-स्वप्नों की रचना करते हैं.
_ जीवन में जीवन के खालीपन को भरने के लिए रोज़ तो कुछ घटेगा नहीं, जो घट चुका होता है, वही हमारी जमा-पूँजी है, वही हमारी अचल सम्पत्ति है, जो हमें खाली होने के अहसास के साथ-साथ भरा होने का अहसास भी कराती है.
_ ज़िन्दगी हमें लगती है कि खाली है, लेकिन वह वस्तुतः खाली नहीं होती, खालीपन से भरी हुई होती है.!!
– Manika Mohini
हम कुछ भी कर लें, सफ़ल हो जाएं पर मन में छिपी कुछ शून्यताओं को कभी नहीं भर पाते …

_ वो स्मृतियों के दंश के रूप में वर्तमान रहकर हमेशा चुभती रहती हैं..!
_ कभी–कभी जीवन हर तरफ़ से ठीक दिखता है—काम, ज़िम्मेदारियाँ, सफलताएँ… सब अपनी जगह पर..
_ फिर भी भीतर कुछ खाली-सा रह जाता है.
_ ये वही शून्यताएँ हैं जिन्हें न हम भर पाते हैं, न उनसे भाग पाते हैं.
_ कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जो समय के साथ धुंधली नहीं पड़तीं—
_ वे वर्तमान के अंदर ही जड़ें जमाकर बैठ जाती हैं.
_ दिन में नहीं तो रात के सन्नाटे में चुभ जाती हैं.
_ और हमें याद दिलाती हैं कि अनकही बातें, अधूरे रिश्ते, खोए हुए पल—
मन में अपनी जगह कभी नहीं छोड़ते.
_ “मैं किन यादों को ढो रहा हूँ, जिन्हें छोड़ने का वक्त आ चुका है ?”
_ ये प्रश्न हल नहीं देते, लेकिन भीतर एक शांत खिड़की खोल देते हैं—
जहाँ सच बिना डर के दिखने लगता है.!!
खोए हुए पल और लम्हें कहाँ मिलते हैं ?
_ अगर मिलते हैं किसी की यादों से, किसी की बातों से, किसी की मुलाकातों से और सबसे बढ़कर किसी की संजोई हुई किसी वस्तु या कहानियों के माध्यम से तो जीवन का महत्व समझ में आता है कि हम उसे पल पल कितना क्षीण कर रहे हैं..!!
इंसान इस दुनिया में आने के बाद अकेला नहीं चलता, उसके साथ बहुत लोग होते हैं.

_ सारे अंत तक साथ नहीं जाते, कुछ बीच रास्ते में छूट जाते हैं.
_ ये बीच रास्ते में छूटे हुए लोग चाहे बाद के जीवन में ज़रूरी नहीं रह जाते,
_ हम उनके बिना जीना भी सीख जाते हैं लेकिन वे हमारी यादों में जीवित रहते हैं..!!
कुछ पुरानी तस्वीर हाथ लगी आज — धुंधली सी, लेकिन उसमें सब कुछ साफ़ था.

_ चेहरों पर वो मुस्कानें थीं, जो अब यादों में रहती हैं.
_ वक़्त जैसे थम गया हो उस एक फ्रेम में..
_ कोई आवाज़ नहीं, कोई हलचल नहीं — बस एक ख़ामोश एहसास, जो सीधा दिल में उतर गया.
_ तस्वीरें कभी बूढ़ी नहीं होतीं..
_ लोग बदल जाते हैं, रिश्ते छूट जाते हैं, लेकिन तस्वीरें वही रहती हैं — एक ठहरी हुई दुनिया में साँस लेती हुई.
_ यादें जब तस्वीर बन जाएँ, तो वो सिर्फ देखी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं..
_ जैसे किसी ने वक्त की धड़कनों को कागज़ पर छाप दिया हो.
_ कुछ तस्वीरें मुस्कुरा देती हैं, और कुछ… आँखें नम कर जाती हैं.!!
यादें भूलने के लिए नहीं होतीं.

_ इन्हें अपने दिलों और दिमाग में संजो कर रखना होता है.
_ अच्छी यादें खुद को तरोताजा करने के लिये और बुरी यादें सावधानी बरतने के लिये.!!
कुछ लोग, जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करके, एक दिन अचानक आख़िरी “सीन” के साथ गुम हो जाते हैं,

_ जैसे हम कभी थे ही नहीं, जैसे वो कभी थे ही नहीं, छोड़ जाते हैं बस कुछ यादें अधूरी बातें, अधूरे सपने, और वो खामोशी.. जो अब कभी-कभार याद आती है.!!
वक़्त के साथ यादों का बक्सा हल्का होता जाता है,

_ कुछ यादें खो जाती हैं, कुछ धुंधली हो जाती हैं और हम खुद भी महसूसों में, जज़्बातों में थोड़े-थोड़े खर्च हो जाते हैं,
_ जैसे पुराने सिक्के, जो चलते-चलते घिस जाते हैं.!!
‘दिमाग वही याद रखता है.. जो ज़रूरी हो, फिर भी कहीं भीतर एक कोना ऐसा होता है..’
_ जहाँ हर ज़रूरी–गैरज़रूरी बात सहेज ली जाती है..
_ कुछ यादें काम की नहीं होतीं, फिर भी मिटाई नहीं जातीं.. बस मन के किसी रीसायकल बिन में चुपचाप पड़ी रहती हैं, और वक़्त-बेवक़्त एहसास बनकर फिर से ज़िंदा हो उठती हैं.!!
जिंदगी के बचतखाते में सिर्फ कुछ यादें ही हैं, अच्छी हैं बहोत हैं पर वो कम याद आती है,

_ बुरी है जो भुलाये नही भूलती जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, बुरी यादें अपना असल सूद सब मिलाके एक वजनदार बोझ बन जाती है, उस बोझ को कम करने के चक्कर मे हम बेकार ही खर्च हुए जाते हैं.!
हम हमेशा उन्हें क्यों याद करते हैं जो हमारे नहीं हो सकते ?
Why do we always miss those who can’t be ours ?
खुशमिज़ाज इंसान से वह मेरी पहली और अंतिम मुलाकात साबित हुई.
_ अब याद ही याद.
कदर तब कीजिए जब कोई आपके पास है,

_ बाद में तो बस यादें और पछतावा रह जाता है.!!
“जब शब्द कम पड़ते हैं, तो तस्वीर बोलने लगती है”
यह अजीब है कि लोग कैसे कहते हैं कि वे आपको याद करते हैं,

_ लेकिन आपसे मिलने का प्रयास भी नहीं करते..!!
किसी को भूलने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसे बिल्कुल भी याद ही न करो.!!
“जो आज है, वही सबसे कीमती है..- कल सिर्फ याद बन जाता है.”
याद करता हूँ तो आंख भर आती है.

_ न तब नासमझ था, न आज बेवकूफ़ हूँ.. _”बस वक्त का फेर है सारा”
गुजरे हुए लोगों को याद करके रो लेना,
_ मगर ‘गए-गुजरों’ को याद करके.. अपनी यादों को मलिन और खराब मत करना.!!
कुछ यादें गहरी नींद में हैं.. उन्हें गहरी नींद में सोने दो !

_ हम उन्हें बेवजह क्यों जगाएँ और परेशान करें ?
_ अगर हम उन्हें जगा भी दें तो परेशानी उन जगाने वालों को ही होगी.!!
कुछ लोग ऐसे होते हैं.. जिनसे सालों बात नहीं होती, फिर भी यादों में चुपचाप बसे रहते हैं..

_ और कुछ लोग ऐसे होते हैं.. जो रोज़ सामने होते हैं, फिर भी भीतर कहीं अनजान से लगते हैं..
_ जैसे उनसे कभी सही मायनों में मुलाक़ात ही न हुई हो.!!
जैसे हम ठहर जाते है कोई बात कहते कहते,

_ रुक जाने पर भी बात होती ही है कहीं न कहीं, ख़त्म थोड़े ही हो जाती है..
_ ख़त्म हुई बात भी कहाँ ख़त्म होती है पूरी तरह, _ वह एक याद की तरह बची ही रहती है..
_ क्योंकि बातों की उम्र लंबी है, इसलिए बातें होती रहनी चाहिए, चाहे बेवजह ही सही.!!
“यादें असल में अकेलेपन की साथी होती हैं,
_ जो आपको अकेलेपन से बचाकर रखती हैं.”
फोटो और तस्वीरों का होना ज़रूरी हैं..
_ जो आपको बाद में आपके सभी रस्मों-अनुष्ठानों की एक झलक दिखाए..!!
देखना, मिल पाना, बातें कर लेना, हमेशा संभव नहीं,

_ शायद इसीलिए होती होंगी तस्वीरें.!!
कुछ यादें हम इसीलिए सहेज कर रखते हैं..

_ क्योंकि वे जीवन भर हमारे मुस्कुराते रहने की वजह बनती हैं.!!
समय के साथ बहुत कुछ भूल जाते हैं…
_ लेकिन कुछ खास यादें बहुत याद आती हैं !!
तस्वीरों और यादों में रह जाते हैं कुछ लोग..
_ जिनके साथ हम पूरी जिंदगी रहना चाहते हैं.!!
“जो तस्वीर देखकर सांस गहरी हो जाए,
_ वही घर में सजावट के लिए सही होती है.”
कुछ यादों से झूझना ज़िन्दगी के सबसे कठिन पहलुओं में से हैं,
_ जहाँ इंसान पल-पल मरकर भी नही मरता…!
लोग सिर्फ काम पड़ने पर याद करते है, बाद में पहचानना भी भूल जाते हैं.
यादें भी कुछ कहती हैँ, अतीत में जो मिला उसको फिर से पाना चाहती हैँ.
यादें क्यों नहीं बिछड़ जाती है, लोग तो पल भर में बिछड़ जाते हैं.!!
संजीवनी होती हैं स्मृतियाँ बशर्ते उन्हे जीवित रखा जाये, – गाहे बगाहे आँखें भिगो ही देती हैं.!!
अजीब लोगों का बसेरा हैं यहाँ, गुरुर में मिट जाते हैं मगर याद नहीं करते..
कुछ यादें फूलों जैसी होती हैं, लेकिन चुभती कांटों जैसी हैं..!!
आज जो पास हैं, कल याद बन सकते हैं.. – यही ज़िंदगी की सच्चाई है.!!
एक समय के बाद- याद न करने से यादों से उतर जाते हैं लोग.!!
बातें भूल जाती हैं, यादें याद आती हैं.!!
छोटी छोटी यादें ही जिंदगी का सरमाया होती हैं..

_जिन्हे याद करते जिंदगीभर कुछ खुशी तो कुछ गम दामन को बार-बार भिगोते रहते हैँ !!

याद रखना कि आज जो स्मृति में जगह बनाए हुए है, कल वह विस्मृत होगा.

_ और जो विस्मृत हो चुका है वह ज़रूर कभी न कभी स्मृति में लौटेगा.. “क्योंकि यही जीवन है..”

कभी-कभी यादों का भी अपना अलग ही मिज़ाज होता है..

_ सालों पुरानी बातें, पुराने लम्हे आज भी उतने ही साफ़ याद रहते हैं और कभी हाल ही की कोई बात ऐसे खो जाती है, जैसे वो कभी हुई ही न हो.!!

कुछ बातें ऐसी होती हैं.. जिन्हें हम दिल से मिटा देना चाहते हैं इस कदर कि उनका ख़याल भी कभी लौटकर न आए..

_ पर अजीब विडंबना है कि जिस पल हम अपने दिमाग़ को झटका देकर उन्हें भूलने की कोशिश करते हैं, वही दिमाग़ उन्हीं यादों को और ज़ोर से सामने ला खड़ा करता है.. _ शायद कुछ यादें भुलाई नहीं जातीं, वे बस भीतर कहीं शांत होकर हमारे साथ जीना सीख लेती हैं और हम भी.!!
समय के साथ यादों का पिटारा हल्का होता जाता है, कुछ यादें कहीं सिमट जाती हैं,

_ कुछ धुंधली होकर भी अंदर ही अंदर झिलमिलाती रहती हैं और हम धीरे-धीरे एहसासों और संवेदनाओं में खो जाते हैं,
_ पुराने सिक्कों की तरह, जो प्रचलन में रहते हुए अपनी पहचान खो देते हैं.!!
भूल जाना याद रखने जैसी सरल प्रक्रिया नहीं है, कुछ समय की यादें मन के किसी कोने में चुपचाप सहेजी रह जाती हैं और जीवन के अंतिम पहर में, वे अचानक आँखों के सामने से गुजरती हैं, मानो पूरी ज़िंदगी उन क्षणों में सिमट आई हो.!!
आप देखें कि कितने ही लोग थे, जो कभी आपकी तारीफ़ करते नहीं थकते थे,

_ पर आज जब पुरानी यादों की मेमोरी में उन्हें देखेंगे, तो वे जा चुके हैं, अपनी अलग दुनिया में मग्न हैं.
_ वक्त के साथ तारीफें खामोश हो जाती हैं, जो साथ थे.. वो ज़रूरी नहीं कि हमेशा साथ ही रहें..
_ बस यादें बची रह जाती हैं, कुछ मीठी, कुछ चुभती हुई.!!
अपनी यादें बनाएं … कहीं भी कैसे भी बनाएं..

_ ये वक्त जो बीत रहा है, लौट कर नहीं आएगा.
_ इससे बेहतर होगा, पर यह नहीं होगा.. इस वक्त की मासूमियत नहीं होगी..!!

_ ज़िंदगी यादों का पिटारा है, _ यादें हैं तो ज़िंदगी है.

_ हर आदमी की ज़िंदगी सिवाय यादों के कुछ भी नहीं..
_ कई यादें संयोग भी होती है.
_ ज़िंदगी के डॉट्स जोड़ेंगे तो कई कहानियां उभरेंगी.
_ सारी यादें बहुत सुखद हैं.
_ सुखद यादों को संजो कर रखना चाहिए..
_ मुश्किल घड़ी में ये यादें बड़ा सहारा बन जाती हैं..!!
अतीत कि अच्छी यादें प्रायः ही दोहराई जाने के कारण हमारे मस्तिष्क में रह जाती हैं..

_जब कि उस जीवन की कठिनाइयाँ हम भूल जाते हैं.
_ उस काल का जीवन भी कुछ अच्छा रहता था कुछ कठिन..
_ पर हमें उसके चुनिंदा पल ही याद रह जाते हैं..
_ और सोचा जाए तो यह हमारे लिए, हमारे स्वास्थ के लिए बहुत अच्छी बात भी है.
_ निःसंदेह आज की तरह उस समय भागदौड़ नहीं होती थी, प्रकृति से सामंजस्य था.
_ लोग शारिरिक श्रम करते थे ..अतः स्वस्थ्य रहते थे.
_ बड़े बड़े परिवार एक संग रहते थे और इसलिए परिवार के छोटे बड़े सब स्वयं को संरक्षित महसूस करते थे.
हमारे जीवन के कुछ ऐसे पहलू होते हैं.. जिन्हें हम कभी नहीं भूलना चाहते.

_ ये वो यादें हैं.. जिन्हें हम हमेशा अपने ज़ेहन में संजोकर रखना चाहते हैं,
_ क्योंकि चाहे कितनी भी उलझन हो, ये हमेशा हमारे चेहरे पर मुस्कान ला सकती हैं.
_ और इसी तरह हम मुश्किलों से उबरते हैं, यह याद रखकर कि हमने ज़िंदगी में काफ़ी अच्छे पल जीए हैं.
_ ये हमें एक वजह देते हैं, उन यादों में हम जिन लोगों को देखते हैं, वही हमारे ज़िंदा रहने की असली वजह है और यह खूबसूरत है.!!
हमें केवल वही याद रहता है.. जो हमें वास्तव में पसंद या नापसंद था, बाकी सब कुछ समय की धुंध में खो जाता है.

_ कुछ लम्हे मुस्कान बनकर रह जाते हैं, कुछ ज़ख्म बनकर..
_ आखिर यादों को दिल ही चुनता है, दिमाग नहीं… कि कौन-सी यादें रहनी चाहिए.!!
मुझे सहेजना पसंद है, फिर चाहे वस्तुएं हों, गीत हों, मित्र हों, या किसी पसंदीदा शख्स की स्मृतियां हों..

_ यह सब छोड़कर मैं आगे नहीं बढ़ पाता..
_ अतीत में घटी कुछ अप्रिय घटनाओं ने जरूर निराश किया,
_ परंतु कुछ अच्छे लम्हों को भी मैं भूला नहीं हूं,
_ ज़िन्दगी अनन्त दुःखों और उम्मीदों से भरी है…!!
मैं अक्सर रियल फोटो पोस्ट करता हूँ.
_मुझे ख़ुद को नेचुरल लुक में रहना और दिखना पंसद भी है.!!
कभी-कभी हम जीवन में अच्छी यादें बनाने के लिए कितना कुछ कर जाते हैं.
_ अपना समय, अपनी ऊर्जा, यहाँ तक कि अपनी शांति तक लगा देते हैं हम..
_ छोटे-छोटे पलों को खूबसूरत बनाने की कोशिश करते हैं,
_ किसी मुस्कान, किसी मुलाक़ात या किसी सफ़र में वो गर्माहट ढूँढते हैं.. जो हमें लंबे समय तक संभाले रखे.
_ पर यादें बनाना हमेशा आसान नहीं होता..
_कभी हालात साथ नहीं देते, कभी लोग बदल जाते हैं, और कभी हम खुद ही पल को सही तरह पकड़ नहीं पाते..
_ फिर भी हम कोशिश करते रहते हैं,
_ क्योंकि अंत में इंसान के पास उसी के बनाए हुए पल होते हैं, जिन्हें याद करके वह फिर से जी लेता है.!!

सुविचार – खुशबू, इत्र, महक, सुवास, सुरभि, सुगंध – 129

13557534785_57d3555969

रात सुबह का इन्तजार नहीं करती, खुशबु मौसम का इन्तजार नहीं करती.

जो भी ज़िन्दगी से मिले उसको ख़ुशी से जीयो,

क्योंकि ज़िन्दगी वक़्त का इन्तजार नहीं करती.

यह आपके ऊपर है कि आप कूड़ा बनना चाहते हैं..

_या फूलों से महकता आंगन..!!

आदमी स्वभाव से खुशबू पसंद है, संसार में किसी को बदबू पसंद नहीं..

_ कि जब आप किसी से मिलें तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए,
_ जैसे आपके शरीर से किसी तरह की बदबू न आए.
_ आप स्त्री हों, पुरुष हों ..ये आपका कर्तव्य है कि ..जब आपको किसी से मिलना हो तो ..न्यूनतम हाइजिन का ध्यान रखा जाए.
_ आपके बदन, बाल, दांत से बदबू न आए.
_ अगर ये बदबू आती है और आप लोगों से उस बदबू के साथ मिलते हैं तो ..यकीन कीजिए, ये एक तरह का अत्याचार है.
_ ये आपका कर्तव्य है कि जब किसी से मिलें तो भले आपके पास परफ्यूम न हो, पर दुर्गंध से बचने के उपाय आपको पता होने चाहिए.
_ आप चाहे घर में हों, बाहर हों, आपका रहन-सहन ऐसा हो कि ..आपके साथ रहने वालों के साथ ऐसा कोई अत्याचार न हो, जिसे वो कह भी न सके, सह भी न सके.
_ आपकी उम्र चाहे जितनी हो, ये आपकी जिम्मेदारी है कि किसी को आपके सामने पड़ने पर पीड़ा न हो.
मैं नहीं मानता कि किसी को कभी ये पता ही नहीं चलता होगा कि उसके मुंह से, पसीने से बदबू आती है.

_ आप किसी को नहीं टोक सकते हैं.
_ अपनी पत्नी/पति को भी नहीं.
_ बहुत आसान नहीं होता है किसी को उसके सच का अहसास कराना.
_ असल में ये बचपन से घर में मिली ट्रेनिंग का हिस्सा है.
_ आदमी समझ कर भी अनजान बना रहता है तो इसके पीछे सिर्फ लापरवाही, अज्ञानता कारण है.
_ अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं.
_ बिना कर्तव्य के अधिकार का कोई मतलब नहीं रह जाता है.
_ किसी का अधिकार हो सकता है नहीं नहाना..
_ लेकिन जब आप किसी के साथ हैं, किसी के सामने हैं तो आपका कर्तव्य हो जाता है कि सामने वाले को आपसे तकलीफ़ न हो.
_ हम रोज़ की ज़िंदगी में इस बात का ख़्याल नहीं रखते कि ..हमारी वजह से उन्हे तकलीफ़ तो नहीं हो रही, जिनके साथ हम हैं.
_ ज़िंदगी में ऐसी बहुत-सी छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं, आदतें होती हैं जिन्हें हम नज़रअंदाज करते हैं.
_ हमें बहुत बार घर में ही नहीं सिखाया जाता कि मनुष्य एक समाजिक प्राणी है ..इसका अर्थ क्या है।
_हमें समाज के बीच कैसे उठना-बैठना और चलना है, कैसे रहना है ?
_ हमारे यहाँ बचपन से रूमाल का इस्तेमाल नहीं सिखाया जाता.
_ये नहीं सिखाया जाता कि सार्वजनिक जीवन में क्या नहीं करना चाहिए.
_अब ये विषय ऐसा है कि इस पर क्या और कितना लिखें..
_कोई किसी को टोक नहीं सकता है.
_ये खुद का धर्म (ड्यूटी) है कि हर आदमी अपना ख्याल रखे.
_साफ-सफाई से रहने, सुघड़ता से रहने में कोई खर्चा नहीं आता है.
_ अपना ख्याल रखिए, अपने चाहने वालों का ख्याल रखिए.
_साफ-सफाई का होना सामाजिक होने के कारण ज़रूरी है.
हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि लोग हमें याद रखें सुगंध के रूप में ना कि एक दुर्गंध के रूप में..

_थोड़ी खुशबू उन हाथों में भी रह जाती है, जो किसो को गुलाब देते हैं.

सुविचार – प्रेम – प्यार – मोह – 128

13739782314_d871e7614a

ज्यों ज्यों प्रेम खोता गया, जीवन समृद्ध होता गया..!!- टैगोर
अगर कोई सिर्फ इसलिए साथ है कि दूसरा उसे संभाले या अर्थ दे, तो प्रेम धीरे-धीरे बोझ बन जाता है.

_ असली स्वतंत्रता तब है जब इंसान अपने भीतर ही जड़ें और पंख दोनों विकसित कर ले.

  • Rahul Kumar Jha
“जहाँ प्रेम हो, वहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं, और आँखें बोल पड़ती हैं”
प्रेम की कोई समय-सीमा नहीं होती, वो बस होता है बिना कारण, बिना शर्त, और बिना किसी वक़्त के बंधन के.!!
अपरिपक्व प्रेम जहाँ हमें बाँधे रखता है, _ वहीँ परिपक्व प्रेम मुक्त कर देता है.
जो प्रेम करते हैं, वो रास्ता देते हैं जीने का‚ जीतने का‚ और जाने का भी…!
प्रेम है और दंभ नहीं है तो जिंदगी बहुत खूबसूरत है.!!
‘प्रेम वह है’ जिसमें यह चाहत होती है कि जिससे हम प्रेम करते हैं,

_ वो हमेशा खुश रहे, कैसे भी हो ‘बस खुश रहे’

जो व्यक्ति बाहरी दुनिया को छोड़कर अंदर प्रवेश कर लेता है ..उसे खुद से प्रेम हो जाता है.!!
जो खुद से प्रेम करना सीख जाता.. वह कभी किसी के प्रेम का मोहताज नही होता है.
उन लोगों के करीब रहिए.. जो आपके लिए बहुत कुछ चाहते हैं, “यही प्रेम है.!!”
अगर प्रेम है तो सम्मान की अलग से जरूरत नहीं पड़ती है.. ‘प्रेम सबसे बड़ा सम्मान है’
असल प्रेम आपको कुछ और दे या न दे,

_ लेकिन आपके जीवन को खिलने में मदद ज़रूर करता है.!!

लोग प्यार शब्द आसानी से कह तो देते हैं,

_ पर फिर उसे संभाल नहीं पाते..!!

प्रेम का दीपक ख़ुद के भीतर हमेशा जलाएं रखो,

_ इसे कभी भी दूसरों की वजह से बुझने मत दो..!!

“प्रेम बनाम मोह”

_बढ़ती उम्र के साथ मुझे प्रेम और मोह में एक बारीक सा अंतर समझ में आया है,
_ जब आप मोह को अपने से दूर कर देते हैं यानि किसी के मोह में नहीं होते, तब आप सबसे ज्यादा सुखी होते हैं.
_ लेकिन यह सिर्फ मज़बूरी में होता है.. क्योंकि मोह को आप जानबूझ कर अपने से दूर नहीं कर सकते, मोह में बड़ा आकर्षण होता है.
_ मोह वह है कि जब हम अपनी किसी पसंदीदा चीज को अपने पास रखना चाहते हैं और किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते ..फिर चाहे दम घुट जाए,
_ जबकि प्रेम वह है कि जब हम अपनी पसंदीदा किसी चीज को मुक्त रखते हैं या जो जगह उसके लिए बेहतर है ..उस जगह जाने से नहीं रोकते,
_ ये जानते हुए भी की इस तरह हम उसे दोबारा नहीं देख पायेंगे.
_ दरअसल यही तो प्रेम है ..
_ जहां हमारी खुशी से ज्यादा उस व्यक्ति/पशु/पक्षी की खुशी महत्वपूर्व है..
_ जिससे हम प्रेम करते हैं.
आज प्रेम एक अनुभव से अधिक एक विचार और प्रदर्शन बन गया है.

_ प्रेम कोई “सिद्धांत” नहीं, बल्कि एक जीवित अनुभूति है — जो तब खिलती है जब हम दूसरों की परिभाषाओं से मुक्त होकर उसे स्वयं जीने का साहस करते हैं.
“क्या मैंने प्रेम को अपने अनुभव से समझा है — या अब तक दूसरों की कही परिभाषाओं में ही उलझा रहा हूँ ?”
“ प्रेम करने की और देने की चीज है.”

_ प्रेम देने के बजाय.. जब हम प्रेम मांगने लगते हैं, तो समस्या शुरू हो जाती है.
_ अपेक्षाएं बढ़ने लगती हैं..
_ प्रेम का आधार बदलते ही इसका स्वरूप बिगड़ने लगता है..!!
दिल हल्का हो जाता है, जब मन से ऐसे लोग उतर जाते हैं, जो हमारे प्यार के कभी लायक ही नहीं थे ;

” प्यार में हम उन लोगों को भी ग्लोरीफाय कर लेते हैं, जो हमारे समय और ऊर्जा के कभी काबिल ही नहीं थे.!!”
_ सर्वप्रथम स्वयं का ध्यान रखें, स्वयं के हित का ध्यान न रखकर, स्वयं के साथ अन्याय कर, दूसरे के जीवन को संवारनें के प्रयास में स्वयं को खो देना मूर्खता के अतिरिक्त कुछ नहीं है.
_ पहले स्वयं को संवारो, जब खुद का जीवन सँवर जाये तो दूसरों की सहायता करो उनका जीवन संवारनें में.
_ लेकिन ध्यान रहे अपनें संवरे जीवन को बिगाड़ कर नहीं.!!
किसी और के लिए खुद को बदलना कोई बदलाव न होकर महज़ एक समझौता है.

_ जो आपसे प्रेम करता है.. वह आपको वैसे ही ख़ुशी से स्वीकार करेगा “जैसे आप हैं”
_ ये अलग बात है कि उसके प्रेम की वजह से आप खुद ही खुद को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दें.!!
जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो आप उनसे हर समय, बिल्कुल उसी तरह, पल-पल प्यार नहीं कर सकते, यह असंभव है ;

_और फिर भी हममें से अधिकांश लोग प्यार का दिखावा करने कि मांग करते हैं.!!
क्या हम किसी को वास्तव में प्रेम करते हैं, या हम उस ‘छवि’ से प्रेम करते हैं.. जो हमने उनके बारे में अपने मन में बना रखी है ?

_ यदि वे उस छवि के विपरीत आचरण करें, तो क्या हमारा प्रेम शेष रहेगा ?
प्रेम का भी कोई मापक होना चाहिए, क्योंकि आवश्यकता से अधिक किसी से प्रेम करने से उसके लिए आपका प्रेम बोझ हो जाता है और आप मजाक के पात्र.!!
लोग एकतरफा प्यार में पागल हो रहे हैं.. अच्छी बात है,

_ पर प्यार के लिए गिड़गिड़ाना, चरणों में लेट जाना, साथ रहने के लिए हाथ जोड़ना,
_ प्यार में आत्मसमर्पण जरूर है चाहे एकतरफा ही क्यों न हो..
_ पर इसके लिए आत्मसम्मान को त्याग देना, ये किस तरह का प्यार है ?
_ जहां दूसरा व्यक्ति कोई सम्मान नहीं दे रहा…!!
“हर व्यक्ति दया, ममता और प्रेम का पात्र नहीं होता.
_ अपनी बहुमूल्य ऊर्जा और भावनाएं केवल योग्य लोगों के लिए ही संचित रखें.”
आप प्रेम करने के लिए किसी को मजबूर नहीं कर सकते..

_ प्रेम एक पवित्र भाव है.. जो यदि किसी को आपके प्रति होगा तो वह स्वत: ही हो जाएगा..!!
_ आप तमाम स्टाइल मारके बढ़िया कपड़े पहन के अपने आप को धनी दिखा के किसी का मात्र कुछ समय के लिए अटेंशन ले सकतें हैं.. प्रेम नहीं.!!
हम सब यहाँ जो प्यार, स्नेह और भावनाएँ दिखाते हैं, असल ज़िंदगी में वो कहीं हैं ही नहीं..

हम बस दूसरों को दिखाना चाहते हैं कि हम ही प्यार के रचयिता हैं, खैर…
सब ढकोसलेबाज़ी है, शब्दों का दिखावा और भावनाओं का बाज़ार भर.!!
ये प्रेम भी बड़ा अजीब है, जिसे चाहिए, उसे मिलता नहीं, और जिसे मिलता है, वो उसे चाहता नहीं..

_ कभी वक्त गलत होता है, कभी इंसान, कभी हम पास होकर भी दूर रह जाते हैं, और कभी दूर रहकर भी किसी के भीतर बस जाते हैं.
_ शायद प्रेम की यही विडंबना है…
_ यह मिलन में नहीं, अभाव में अपना अर्थ पाता है.!!
कोई यकीन करे या न करे, पर कुछ लोग आज भी वही किताबों वाला प्रेम कर सकते हैं..

_ जहाँ इंतज़ार में भी सुकून होता है, और एक तसवीर से ही पूरा दिन रोशन हो जाता है. _ जहाँ बातों से ज़्यादा ख़ामोशियाँ समझी जाती हैं, और वादे काग़ज़ पर नहीं, दिल में लिखे जाते हैं.
_ इस आधुनिक दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं.. जो आज भी पुराने पन्नों की तरह सच्चा, सादा और हमेशा के लिए प्रेम करना जानते हैं.!!
जो प्रेम को जानेगा.. जानता है..वो मौन रहता है…
_ अगर दिखावा है तो प्रेम के नाम से भ्रमित है वो.. उतना ही अंदर से खोखला है वो ..!!
जो परंपरागत रूप से एक-दूसरे से प्यार करते हैं, वे लड़ते रहते हैं;

_तो एक-दूसरे से कहें, “कृपया – कम प्यार, और नार्मल व्यवहार !!

आपके जीवन में जो लोग वास्तव में आपसे प्रेम करते हैं,

_ वे आपके बदलाव के लिए कभी परेशान नहीं होंगे, बल्कि वे आपको प्रेरित करेंगे.!!

जिन्हें आप प्रेम करते हैं उन्हें उड़ने के लिए पंख दें,

_ वापस आने के लिए जड़ें और रहने के लिए कारण दें.!!

प्रेम में पकड़ नहीं होती, बस एक गहरी चाह होती है..
_ जो चाहकर भी किसी पर थोपी नहीं जा सकती.!!
‘ज़िंदगी एक नदी है’ – जिसमें हर क्षण नया पानी आता है और बह जाता है ;

_ जो बह जाता है फिर लौट कर नहीं आता, “वही प्रेम है”

चाहे प्रेम का कोई आर्थिक मूल्य ना हो..

_ लेकिन, यह परम सुख जरूर दे जाया करता है.
_ तभी तो सब कुछ त्याग कर लोग इसी के इर्द गिर्द भटका करते हैं..
_ वरना उन्हें ये क्यों समझ नही आता कि प्रेम जीवन हो सकता है, पर जीविका का साधन नही.!
प्रेम अपनी अनुपस्थिति में सबसे व्यापक होता है.

_ जब व्यक्ति सामने मौजूद होता है, तो प्रेम सीमाओं में सिमट जाता है: शब्द, नज़रें और मुलाक़ात की औपचारिकता..
_ पर जैसे ही वह चला जाता है, प्रेम रूपों से मुक्त होकर हवा में, रातों में, यादों में, दर्द में फैल जाता है.!!
इस संसार की हर चीज़ की तरह ‘प्रेम’ के भी दो पहलू होते हैं..

_ मिलना और बिछड़ना.. पर अंत में यह हमारे बस में नहीं होता कि हमें कौन-सा हिस्सा मिलेगा..
_ यह तो भाग्यरेखा ही तय करती है कि कोई इंसान हमारी जिंदगी में ठहरने आया है या सिर्फ याद बनकर रह जाने के लिए.!!
आप किसी का ध्यान रखते हैं… पर क्या वो ध्यान आप मोह में आ कर रखते हैं या प्रेम में…

_ मोह भी प्रेम की तरह ही लगता है.. पर यह प्रेम का धोखा है.!!
जिसे आप प्यार करें, ज़रूरी नहीं कि उस पर विश्वास भी करें.

_ लेकिन जिस पर आपको विश्वास है, उसे आप प्यार अवश्य करेंगे.
कल्पनाएं त्याग कर वास्तविकता की ओर जाना ही..असल जीवन प्रेम है और राह भी..!!

_ मन पर भ्रम का ताला लग जाता है.. जो वास्तविकता से दूर ले जाता.!!
‘प्रेम संयोगवश नहीं होता’ _ यह एक ऐसा निर्णय है.. जो हम स्पष्टता, प्रमाण और परिचितता के आधार पर किसी व्यक्ति के प्रति लेते हैं.!!
यह सचमुच दुःखद है कि आजकल के लोग प्रेम को सही अर्थों में नहीं समझ पा रहे हैं.!!
जो इंसान न वास्तविक है और न ही सहज.. उससे कोई कैसे प्रेम कर सकता है ?
प्रेम से भी जरूरी बहुत काम है.. – प्रेम सबकुछ नहीं है जिंदगी के लिए..!!
प्रेम में एकाधिकार की भावना प्रेम को खत्म करती है.
“प्रेम झूठा नहीं होता, प्रेमी झूठे होते हैं”
हमेशा प्रेम की भाषा बोलिए, इसे बहरे भी सुन सकते हैं और गुंगे भी समझ सकते हैं.
‘सर्वप्रथम हमें खुद से प्रेम करना चाहिए’
_ अगर हम शुरुआत खुद से प्यार करके पूरी दुनिया से प्यार करें तो तब हम बेहतर हो सकते हैं.!!
टेम्पररी [temporary] चीजों को आनंद बोल कर आनंद की बेज़्ज़ती मत करें.
_जो प्रेम नहीं है, उसे प्रेम बोलकर प्रेम की बेज़्ज़ती न करें.
खूबसूरत होने से प्रेम नहीं होता,
_ जिस से भी प्रेम होता है वही खूबसूरत और सुंदर दिखने लगता है..!!
प्रेम का दुश्मन भी सारा संसार, प्रेम का भूखा भी सारा संसार ❓
_ प्रेम नहीं तो जीवन में कुछ भी नहीं ?
यदि प्रेम आप को बेहतर, सुन्दर और सरल नहीं कर रहा है तो..

_वो चाहे जो हो “प्रेम नहीं है”

प्रेम कभी ज़िन्दगी नहीं बर्बाद करता,

_प्रेम के नाम पर ढोंग से बने रिश्ते_ ज़िन्दगी बर्बाद करते हैं..!!

इतना कुछ है दुनिया में देखने- समझने को,

_पर लोग ज़रा से प्यार में डूब कर जीवन बिता देते हैं..!!

प्रेम एक एहसास से कहीं ज्यादा गहरा होता है.

_इसका अर्थ है कि हम उस व्यक्ति के साथ हमेशा सही और सम्मानपूर्वक व्यवहार करें.

सच्चे प्रेम का अर्थ है, जिससे आप प्रेम करें, उसे उसके ही रूप में अपनाना होता है.

_न कि उसे अपनी सोच के सांचे में ढालें..!!

प्रेम का आनंद हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है,

_ जो उसकी परिस्थितियों और अतीत पर भी निर्भर करता है.!!

किसी भी नाम के धागे खोल दिए मैंने..

_ बंधनों में प्रेम मुझे अच्छा नहीं लगता..

अब न कोई उम्मीद है, और न ही इसकी सम्भावना कि ‘मुझे प्रेम है’

_ अगर मैं कह भी रहा हूँ, तो बस समझ लो.. मैं नयापन तलाश रहा हूँ.. ‘प्रेम नहीं’
_ क्योंकि प्रेम तो अब बीते मौसमों की तरह मेरी ज़िन्दगी से गुज़र चुका है, और उसकी खुशबू तक हवा में नहीं बची.!!
जिससे प्रेम होता है न और जो मन को भा जाता है वो हर हाल में खूबसूरत लगता है, प्रेम को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए, प्रेम कोई कारोबार नहीं जिसका ढिंढोरा बाजार में पीटा जाए,

_ प्रेम तो शांत लहरों सा मन में उठता हुआ एक खूबसूरत सा सुकून है किसी के लिए…!
प्रेम करना मनुष्य की प्रवृत्ति है, जो लोग कहते हैं की किसी चले जाने के बाद उनका प्रेम से विश्वास उठ गया, वे बस दुनिया को भ्रम में रखते हैं.

_ क्योंकि अंतर्मन में प्रेम का भाव कभी समाप्त नहीं होता..
_ हर कोई कहीं न कहीं चाहता है कि कोई आए, सीने से लगाए और कहे अब तुम्हारा विश्वास दोबारा नहीं टूटेगा.!!
कुछ प्रेम इतने खूबसूरत होते हैं कि टूट कर चूर-चूर हो जाने के बाद भी हर टूटे टुकड़े में खूबसूरती बची रह जाती है.!!
हम सब प्रेम-प्यार के भूखे होते हैं, हमें कहीं से भी थोड़ा सा प्यार और अटेंशन मिल जाता है तो.. हम बौखला जाते हैं,

_ उस थोड़े से प्यार के बदले में इतना ज्यादा प्यार, अटेंशन और रिस्पेक्ट दे देते हैं कि.. सामने वाले को हजम नहीं हो पाता है,
_ और हमारी बर्बादी का रास्ता यही से प्रारंभ हो जाता है.!!!
_ दुनिया का प्रेम तब तक ही है, जब तक आपका सितारा बुलंद है.!!
मनुष्य की बड़ी भूल यही है कि.. जो उसके वश में नहीं, उसे वश में करने लगता है.

_ हम भूल जाते हैं.. इंसान को प्रभावित किया जा सकता है, नियंत्रित नहीं.
_ डर से बना रिश्ता, रिश्ता नहीं होता – वह एक कैद होती है.
_ यही बीमारी प्रेम तक पहुँच जाती है,
जहाँ अपनापन नियंत्रण में बदलने लगता है.
_ जब प्रेम में आज़ादी नहीं रहती, तो प्रेम धीरे-धीरे साँस लेना भूल जाता है.!!
कभी कभी जिंदगी की राह में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिन्हें देखते ही लगता है ये तो अपने जैसा है, थोड़ा सा इसके साथ जी लेते हैं.

_ फिर हम उसे स्पेशल समझने लग जाते हैं.
_ धीरे धीरे वो जीवन मे ऐसे उतर जाता है कि.. उसकी हर बात अच्छी लगने लगती है.
_ उसे देखना, उसे सुनना अच्छा लगता है, मगर ज्यों ही हम उसे भाव देने लगते हैं.. वो महंगा होता जाता है.
_ एक समय ऐसा भी आता है कि.. हम अपने स्वाभिमान को दांव पर लगा कर उससे मनुहार करते हैं,, उसके सामने गिड़गिडाते हैं, रिक्वेस्ट करते हैं.
_ मगर उसके भाव बढ़ते ही जाते हैं.
_ फिर दिल पर पत्थर रखकर.. हमें उससे दूर होना पड़ता है.
_ उसे जिंदगी से निकालने के लिए उसकी कमियों पर गौर करना पड़ता है,
_ ज्यों जी चाहत का नशा उतरता है.. हमे ये अहसास होता है कि..
_ जिसके लिए इतना पागल थे.. वो तो हमारे लायक ही नहीं था.
_ फिर खुद से नफरत होने लगती है कि.. ऐसे इंसान को हमने दिल में जगह ही क्यों दी थी.!!
क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार, जो शुरू में इतना खूबसूरत लगता है,

आखिर में इतना दुख क्यों देता है ?
_ शायद यह प्यार नहीं है.. जो दुख देता है – बल्कि वह सब कुछ है.. जो हम उससे जोड़ते हैं.
_ उम्मीदें, वादे, हमेशा के लिए जीने का सपना..
_ सच्चा प्यार सरल होता है, पल में जीवंत होता है – जैसे कोई खुशबू जो आप अपने साथ रखते हैं.
_ यह दूसरे व्यक्ति से यह माँग नहीं करता कि वह आपके साथ रहे, एक खास तरीके से व्यवहार करे, या आपको पूरा करे.
_ लेकिन हम प्यार से शुरू करते हैं और धीरे-धीरे निर्भरता, अपेक्षाओं में ढल जाते हैं..
_ और जब कल्पना का भविष्य टूटता है, तो यह विश्वासघात जैसा लगता है.
_ इसलिए ये समझें कि क्या सच है और क्या भ्रम.!!
इंसान किसी की चाहत बस उस सुंदरता को खत्म और उसको मिट्टी करने के लिए ही करता है, जो दूर रह कर भाती है.

_ बस उस पर कब्जा हो जाए मेरी हो जाए, बस उस में ऐसा कुछ न बचे जिससे वो भा रही थी.
_ इंसानी मन ऐसा ही बना हुआ है.
_ इंसान मन को समझना ही नहीं चाहता.
_ निराश दुखी रह लेगा – मगर दौड़ बाहर की तरफ ही रखेगा.!!
– Dhara Pravaah
प्रेम करने का कोई तरीका नहीं है.

_ आप इसे खरीद नहीं सकते, न ही इसे किसी और चीज़ के बदले में दे सकते हैं.
_ प्रेम को सचमुच महसूस किया जाना चाहिए और जिया जाना चाहिए.
_ यह तब अस्तित्व में आता है जब सुख और दुःख, निराशा की भावना, दूसरे में पूर्णता की माँग का भाव, जब ‘मैं’ और ‘मेरे सुख’ का यह भाव समाप्त हो जाता है..
_ और यह सबसे कठिन और कष्टसाध्य चीजों में से एक है.
_ हम प्रेम को लेकर भावुक हो सकते हैं, लेकिन वह प्रेम नहीं है.
_ किसी एक से प्रेम करने में, आप पूरी मानवता से प्रेम करते हैं.
_ लेकिन अगर आप किसी एक से प्रेम करना नहीं जानते – अपने बच्चे से, अपने पति या पत्नी से, अपने पड़ोसी से – तो सभी से प्रेम करने का विचार बहुत कम अर्थ रखता है.
_ आखिरकार, एक ही संपूर्ण है.
– Dhara Pravaah
“पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले, झूठा ही सही”

_ प्यार के लिए हर दिल इतना तरसा-भटका रहता है कि ..दुआ माँगी जाती है कि..
..चाहे कोई पल भर के लिए ही प्यार कर ले, बस कर ले, झूठा ही कर ले, बस कर ले.
_ लेकिन आज तक कोई पल भर के प्यार से संतुष्ट हुआ है ?
_ और झूठे प्यार से ? नहीं ना ? तो खुद को भुलावे में क्यों रखना ?
_ साफ़ कह दो कि ..यहाँ पल-दो-पल के लिए झूठा प्यार जताने कोई न आए,
_ आना हो तो सारी उम्र के लिए सच्चा प्यार करने आए ..वरना न आए..!!
जब हम प्रेम में होते हैं, तो उसके मन की हल्की-सी टीस भी हमें अपनी लगने लगती है.

_ उसका दुख, उसकी बेचैनी, उसका हर दर्द हमारे भीतर कहीं गहरे उतर जाता है.
_ तब हम चाहे शब्दों से हों, साथ से हों या किसी छोटे-से हावभाव से..
_ हर सम्भव कोशिश करते हैं कि उसकी पीड़ा कम हो जाए..
_ क्योंकि प्रेम में दिल सिर्फ़ महसूस नहीं करता, वो साझेदारी भी करता है..
_ उसके दर्द की, उसकी थकान की, उसकी हर बेचैनी की.!!
प्रेम या सम्मान का भाव उन्हीं के प्रति रखिये जो आपके मन की भावनाओं को समझते हैं, अन्यथा खुद को दुःख के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिलेगा..!!
आजकल प्यार तो सब करते हैं, – मगर कदर और इज्जत ?
_वो तो बड़े नसीब वालों को ही मिलती है.!!
जैसे जरूरी नहीं है कि हम जिसेसे प्रेम करे शादी भी उसी से हो,

_ उसी तरह जरूरी नहीं कि जिससे शादी हो उनसे प्रेम भी हो,
_ प्रेम उस स्तर का व्यक्तिगत और संवदेनशील विषय है कि एक उम्र के बाद हम अपने आप से इसके जिक्र से बचते है.!!
हम जिससे प्रेम करते हैं, उसका सब कुछ हमारा हो जाता है.

_ सिर्फ उसका प्रेम ही नहीं, उसका गुस्सा, उसकी नाराज़गी और उसकी चुप्पी भी..
_ ये सब उसी रिश्ते का हिस्सा होते हैं और सच यही है कि प्रेम को वही संभाल सकता है..
_ जो इन सबको समझने और अपनाने की क्षमता रखता हो.!!
प्रेम आपको धूल से उठाकर वापस उसी में मिला सकता है.!!

_हर किसी में सबसे बुरा दिखावा करने और उसे जीवन भर जीने का साहस नहीं होता.!!!

“प्रेम एक रोज़ हमें ख़ुद सिखा देता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सुख प्रेम नहीं है.!!”
फूल देना प्रेम नहीं, _फूलों की तरह रखना प्रेम है..!!
प्रेम कहीं नहीं है, सब तरफ सिर्फ आकर्षण है.!!
प्रेम अनजाने में उदासियों को दिया गया एक आमंत्रण मात्र ही तो है…!

_ जिसे सच्चा प्रेम कहते हैं, उससे बड़ा झूठ कोई नहीं.!!

किसी को बेइंतहा प्यार करने के धुन में खुद के वजूद को खोते जाना..

_ दुनिया की सबसे दर्दनाक घटना है.!!
दो अक्लमंद व्यक्तियों के मध्य प्रेम संभव नहीं है.

_ प्रेम हुआ तो समझो, दोनों में से एक मूर्ख है.!!
प्रेम आपको खुश तो कर सकता है, लेकिन जीवन जीने में मदद नहीं कर सकता.

_ आपको अपने प्रेम के साथ.. जीने के लिए भी कुछ करना होगा.!!
सच्चे प्रेम में अहंकार नहीं होता, पर सच्चा प्रेम खुद को मिटाने का नाम भी नहीं है.!!
जहां भी मिले झूठा प्यार, वहीं से लेते जाओ, सच्चे का कोई भरोसा नहीं..!!
प्रेम जिंदगी का वो खूबसूरत पल है,

_ जिसकी कीमत हम हर पल आंसुओं से चुकाते हैं.!!

एक तरफ़ा प्रेम से दो तरफा दोस्ती बेहतर है !!
“प्रेम की बातें छोड़ें..” और एक दूसरे की परवाह करें.!!

_ आमतौर पर प्रेम सिर्फ बेमतलब की माथापच्ची ही हुआ करता है,
_ अब मेरी बातों से सहमत होना न होना दूसरी बात है..
_ मैं केवल यही चाहता हूं आप प्रेम की तरफ ध्यान, स्वयं अपने विचार किए हुए निष्कर्षो पर पहुंचे,
_ कथित विशेषज्ञों के बहकावे मे न आओ कि “प्रेम कोई खूबसूरत चीज है….!”
मैं प्रेम में चेहरों पर यक़ीन नहीं करता.

_ पहली नज़र में दिल लग जाना मेरे लिए कोई चमत्कार नहीं.
_ मैं प्रेम करता हूँ पहली बार बहस में, पहली बार जब कोई अपनी बात में डटकर खड़ा होता है.
_ पहली बार जब किसी के साथ ठहाका लगता है—वो हँसी जो वर्षों के दर्द के बाद आती है.
_ मैं प्रेम करता हूँ उस ख़ामोशी से, जो असहज नहीं लगती.
_ उस पहली बातचीत से, जिसमें आत्मा खुद को खोल देती है, जहाँ कोई मुखौटा नहीं होता.
_ प्रेम वहाँ होता है, जहाँ कोई साथ देता है मुश्किल वक़्त में, जहाँ दर्द बाँटा जाता है और ख़ुशियाँ दुगनी होती हैं.!!
बाहरी सृष्टि में मैंने दुःख को देखा,

_ जब खुद के अंदर गया तो मैं देख पा रहा हूं..
_ यहां खुशियां ही खुशियां हैं.. यहां प्रेम ही प्रेम है.. यहां परमात्मा ही प्रेम है.!!
प्यार करना यह नहीं है कि किसी और के जीवन का बोझ अपनी पीठ पर ढोना;

_ यह एक साथ चलना है, स्वतंत्र, हल्का..हो कर.!
_ प्यार ऐसा नहीं होना चाहिए.. जो ज़रूरत से ज्यादा दर्द दे;
_ प्यार, जब सच्चा होता है, तो निर्माण करता है, विनाश नहीं.!!
प्रेम को सिर्फ दिल से निभाना काफी नहीं होता,

_ किस्मत और हालात का साथ भी ज़रूरी होता है,
_ जब वक़्त साथ नहीं देता तो सबसे सच्चा रिश्ता भी टूट जाता है…!
कुछ लोग प्यार और स्नेह तभी दिखाते हैं, जब हम उन्हें आमने-सामने देखते हैं.

_ उस समय उनका प्यार का इज़हार हमें ऐसा महसूस कराता है.. जैसे कोई और हमसे उतना प्यार नहीं करता.. जितना वे करते हैं.
_ उन्हें तो यह भी नहीं पता कि हम पहले कितने लोगों का ऐसा तमाशा देख चुके हैं.!!
प्रेम में यथा संभव दूरी को बचाए रखिए और जब दूरी अवश्यंभावी हो जाए तो मिलने की गुंजाइश रखिए.
_ मिलन की आस दूरी के आंसू पोंछ लेती है.!!
प्रेम में अक्सर हम वो बातें भी सुनते हैं जो कही नहीं जातीं.

_ असली ख़ुशी का कारण यही होता है.!!

वो जो बहुत कुछ कर सकते थे,

_ प्रेम कर लेते हैं, और कुछ नहीं कर पाते !!

प्रेम का वास्तविक आनंद तो तब है,

_ जब कोई आपसे दूर रहे कभी कोई आभास ना हो, मिलने की कभी कोई गुंजाइश ना हो फिर भी आप हर समय सिर्फ उसे ही सोचते रहे.!!
अधिकार जताना प्रेम नहीं हो सकता, यह भय का परिणाम है.!!
प्रेम में ठहराव दूरियों की वजह से नहीं होता..

_ झूठ की वजह से आ जाता है..!!

एक दूसरे की ज़रूरत महसूस होने को ही प्यार कहते हैं.

_ एक दूसरे की ज़रूरत महसूस न हो तो समझो, प्यार खत्म.!!

कुछ लोगों से हम प्रेम करते हैं ..कुछ लोग हमसे प्रेम करते हैं..

_ अब होना तो ये चाहिए कि हम उनका ख़्याल ज्यादा रखें ..जो हमसे प्रेम करते हैं.
_ मगर ऐसा कभी हो नहीं पाता…
_ हम हमेशा उनका ख़्याल ज्यादा रखते हैं या रखने की कोशिश करते हैं ..जिनसे हम प्रेम करते हैं..
_ बस यही छोटी सी बात भविष्य में दुःख का कारण बनती है.
प्रेम या सम्मान का भाव उन्हीं के प्रति रखिए, जो भावनाओं को समझते हैं,

_ अन्यथा खुद को दुःख के अलावा कुछ नहीं मिलेगा.!
जब तक कोई पुरुष या स्त्री खुद से प्रेम करना नहीं सीखता, तब तक यह सब ऐसे ही चलता रहेगा.

_ दुनियादारी भी ढंग से ना चल पा रहे हैं, क्योंकि हम अंदर से खोखले हैं.
जब आप किसी से प्रेम करने लगने लगना तो ..मत बताना उसे कि ..आपको उससे प्रेम है,

_ प्रेम कोई बताकर करने वाली चीज है ही नही ..या बता भी दिए तो ..इसका जिक्र बार बार मत करना,
_ क्योंकि एक ही अल्फाज़ की पुनरावृति से उसकी महत्ता खोने की सम्भावना है.
_ प्रेम में अपेक्षा मत करना कि मैं आज इतना प्रेम दे रहा, मुझे भी इतना या इससे अधिक मिलना चाहिए.
_ जिस दिन आप ये सोचने लग गए कि ..मुझे क्यों नही मिल पा रहा वैसा ही प्रेम ..जैसा मैं कर रहा,
_ प्रेम का अस्तित्व खत्म हो चुका होगा..!!
यदि कोई पुरुष सोचता है कि.. वह अपनी धन-दौलत के बल पर किसी स्त्री को बाँध कर रख सकता है.. तो वह ग़लत सोचता है.

_ यदि कोई स्त्री सोचती है कि.. वह अपने रूप-सौंदर्य के बल पर किसी पुरुष को बाँध कर रख सकती है.. तो वह ग़लत सोचती है.
_ न दौलत किसी को बाँध सकती है, न रूप-सौंदर्य.
_ बांध सकता है तो केवल आपसी care, सद्भाव और निःस्वार्थ अपनत्व का भाव.!!
_ परवाह करना ऐसा प्रेम है, जो रिश्तों को जिन्दा रखता है.
प्यार शब्द बहुत पुराना और अवास्तविक और अर्थहीन है,

_ नहीं पता कि लोग इसे करते क्यों हैं,
_ शायद इसलिए कि प्यार के पक्ष में इतनी सारी झूठी बातें कही गई हैं कि उन्हें बार-बार सुन कर लगता है कि..
_ ये सब बातें अनमोल हैं, सच्ची और गंभीर हैं.
_ हाँ, ठीक है !… , .इसमें कही सारे बातें नितांत मूर्खतापूर्ण है…!
प्रेम एक मामूली चीज़ है और इसके मामूली बने रहने में ही भलाई है.

_ जब-जब इसे विशिष्ट समझा जाएगा या विशिष्ट बताकर परोसा जाएगा, तब-तब इसमें सामान्यतः
: निर्मम पलायन, संवेदनहीन भटकाव, घोर आत्मनिष्ठता और क्रूर सुखजीविता स्वयं को सही ठहराने के लिए इसमें आश्रय खोज रहे होंगे.!!
प्रेम अक्सर किसी अभाव को दूर करने, किसी ख़ालीपन को भरने या किन्हीं भग्नाशाओं की क्षतिपूर्ति के प्रयास में उपजता है.

_ इंसान की ज़रूरतें वक़्त-वक़्त पर पूरी होती रहें, वह साधन-संपन्न बना रहे तो उसके लिए प्रेम कोई प्रबल भावना नहीं है.
_ प्रेम सामान्यतः हारे हुए का हथियार है.!!
प्रेम कभी समझदार नहीं होता..

_ यह हमेशा किसी खास किस्म के पागलपन से भरा होता है..
_ समझदार इंसान यह कर ही नहीं सकता..
_ यह हमेशा बचपने और पागलपन से भरा होता है…
_ जैसे आँखे मूँद कर विश्वास करना..
_ मिलने वाले का इंतजार करना..
_ या फिर अपना सुख छोड़.. किसी दूसरे के दुःख को अपनाने की इच्छा करना.
_ या किसी की सारे दुख सारी पीड़ा छीन लेना…
_ अपने हिस्से का सारा सुख खुशीयां उसके हिस्से देने के लिए ..ऊपर वाले तक को मजबूर करना..
_ उसके जीवन के बदले.. अपना जीवन दांव पर लगाने के लिए दबाव बनाना..
_ यह सिर्फ दिल कर सकता है.. दिमाग नहीं..
_ इसलिए ये सब कभी कोई समझदार इंसान नहीं कर सकता..!!
खुद को छोड़ कर किसी से प्रेम की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए,

_ जब आप किसी से प्रेम की अपेक्षा रखते हो और सामने वाला आपसे प्रेम नहीं करता है तो आत्म सम्मान को क्षति पहुँचती है,
_ और इंसान सोचने लगता है कि क्या वो इतना भी काबिल नहीं कि कोई उससे प्रेम करे,
_ वो खुद को इस नजर से देखता है जैसे उसी का कोई कसूर हो
_ और जब कोई इंसान खुद को प्रेम न मिलने का कसूरबार खुद को ही समझ बैठता है तो उससे अधिक नीरस व्यक्ति कोई नहीं रह जाता संसार मे…!
भीतर जब प्रेम फूटता है तो आबो-हवा ख़ुशगवार हो जाती है.

_ मन हिलोरें लेने लगता है.
_ संसार में सबसे बड़ी घटना है, ‘प्रेम’
_ जब प्रेम होता है, संसार रमता दिखने लगता है.
_ प्रेम एक भाव है.
_हर व्यक्ति को इससे गुजरना होता है.
_ लेकिन बहुत कम होते हैं, जो प्रेम को जी पाते हैं..!!
हम जीवन की राह पर हैं..

_ मैंने सबसे ज्यादा खोया है औरों के हितों के लिए.
_ इसलिए सच्चे प्रियजन को पाने के लिए जीवन में कम से कम एक बार खतरे में पड़ना जरूरी है.
_ तभी आप खतरे में पड़े नकाबपोश लोगों को पहचान सकते हैं.
_ सच्चा प्यार करने वाला चाहे अपनी जान खतरे में डाल दे..
_ लेकिन आपका साथ कभी नहीं छोड़ता.!!
जो हमारे अपने होते हैं और जो हमसे प्रेम करते हैं, वो हमारी मजबूरियों और ज़रूरतों को समझते भी हैं..

_ और उस हिसाब से हमारी सहूलियत का ध्यान रखते हुए ख़ुद को एडजस्ट करके हमारी हरसंभव मदद करते हैं..!!
प्रेम में एक और चीज़ जो ज़रूरी है, वो ये कि अपने साथी को उसके ख़ुद के लिए पँख फैलाने देना और ख़ुद की परवाज़ को समझने देना ;
_ ये होगा तभी प्रेम में साथ होने पर लोग दूसरे को बेहतर होने में मदद कर पाते हैं.!!
इंसान प्रेम में खुद को समर्पित करता है, शायद यह सोचकर कि अब अकेलापन नहीं रहेगा..
_ लेकिन प्रेम जब टूटता है या बदलता है, तो जो अकेलापन वापस लौटता है, वो पहले से कहीं अधिक गहरा और अधिक चुभने वाला होता है…!
सचमुच, कितना आसान था, उसे प्रेम करना, जो हम से प्रेम करता था..

_ पर जिसे हम प्रेम न कर सके !!

आप अपनी ऊर्जा प्रेम के प्रसार पर लगाइये,

_ नफ़रत तो वैसे ही भरपूर है इस दुनिया में !!

जिसने मनचाहे ख़ज़ाने खो दिये हों,,
_उसे पांच-पच्चीस का मोह नहीं होता.!!
हम किसी से प्रेम नहीं करते, खुद से प्रेम करते हैं तो..

_ उस प्रेम को देने की इच्छा होती है, लेने वाले सोचते हैं कि वह हमारे अधीन हो गया..!!

दिल की बातों में आ ही जाता है,, प्रेम नादान है समझ न पाता है !!
“सच्चे प्यार का मतलब है कि जो मेरा है वह तुम्हारा है”
“True love means what’s mine is yours.”
“हर तरह का प्यार प्यार है, लेकिन उनमें आत्म-प्रेम सर्वोच्च है”
“Every kind of love is love, but self-love is supreme among them.”
“आप जानते हैं कि आप किससे प्यार करते हैं लेकिन आप यह नहीं जान सकते कि कौन आपसे प्यार करता है.
“You know who you love but you can’t know who loves you.”
प्रेम और आकर्षण में फर्क है, दुनिया में ज्यादातर प्रेम केवल आकर्षण है..!!
“जो फूलदान से प्यार करता है, वह अंदर से भी प्यार करता है”
“One who loves the vase, loves also what is inside.”
“अगर पूर्णिमा तुमसे प्यार करती है, तो सितारों की चिंता क्यों करें ?”
“If the full moon loves you, why worry about the stars ?”
“प्यार में सच्चाई होनी चाहिए और सच्चाई में प्यार”
“Truth should be in love and love in truth.”
“प्रेमियों का झगड़ा प्रेम का नवीनीकरण है”
“The quarrel of lovers is the renewal of love.”
प्रेम में एक स्थिति यह भी आती है जब एक के कहे बिना दूसरा सुन लेता है.
There comes a situation in love when one listens without the other saying anything.
कोई प्यार जताए तो उसे पाने के योग्य बनिए, न कि उसका नाजायज फायदा उठाइए.
(पहले योग्य बनिए, फिर चाहत रखिए)
प्रेम शब्द का उच्चारण करते समय देखिएगा कि आप यह महज कर्मकांड की तरह जप रहे या इसे सचमुच जी रहे हैं..!!
किसी से कितना भी प्रेम करो, कितना भी सच्चा करो पर उसके नाम का टैटू मत बनवाना, शरीर के किसी हिस्से पर..

_ प्रेम खत्म हो सकता है, सच्चा प्रेम भी खत्म हो सकता है..
..पर नामुराद टैटू नहीं मिट सकता, मरने पर भी..
हमारे चारों ओर अनगिनत प्रेम- प्यार बिखरा हुआ है;
हम बेवजह ही नफरत में उलझे हुए हैं;
जो मिला है उसका दामन तो थामे रखो;
क्यों गैरों में उलझे हुए हैं…
प्यार और जिम्मेदारी में बहुत फर्क होता है,

_ हर जिम्मेदारी में प्यार नहीं होता, लेकिन सभी प्यार में बिना पूछे जिम्मेदारी आ जाती है.
_ प्यार लोगों को प्रियजनों के बारे में शिक्षित करता है.
_ वह शिक्षा जो उसने पहले नहीं सीखी है.
_ जो चीज़ उसे नापसंद थी ..वो अपने चाहने वाले के लिए लाइक करना सीख जाता है.
_ प्यार अपने प्रियजनों की खुशी के लिए खुद को तैयार करना है..
_ और जिम्मेदारी है परिवार के धर्म का पालन करना..!!
आम तौर पर हम मिलन को प्रेम समझ बैठते हैं.

_ जबकि सच क्या है ?
_ जहां पाने की शर्त है, वहां प्रेम नहीं..
_ प्रेम की पहली शर्त ही है परावर्तित कर देना, छोड़ देना..
_ सबसे बड़ा उदाहरण ‘राधा’ है..
_ “सारा संसार राधा को प्रेम की देवी मानता है”
_ राधा ने अपने प्रेम में सब छोड़ दिया..
_ प्रेमी को भी..
_ हम क्या गलती करते हैं ?
_प्रेम कहानी में मिलन तलाशते हैं.
_यही कारण है कि हम पूरी ज़िंदगी प्रेम की तलाश करते हैं, प्रेम को पा नहीं पाते.
_ और जिसे हम प्रेम कहते हैं, उसकी मियाद पांच मिनट होती है.
_ हम प्रेम के उपभोक्ता बन जाते हैं.
_हम समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं, वो हमारा गुलाम है.
_ हम प्रेम को जंजीरों में जकड़ लेना चाहते हैं.
_ समझ ही नहीं पाते कि ..छोड़ेंगे तभी तो प्रेम नज़र आएगा.
“जब कोई आपको खास और बेहतर महसूस कराने के लिए अपना सब कुछ दे रहा है, तो उसकी सराहना करें.

_ हर कोई आपके लिए ऐसा नहीं करेगा.
_ हर कोई आपको प्यार महसूस कराने के लिए अपनी सीमा और उससे आगे नहीं जाएगा.
_ प्रयास दुर्लभ हैं, इसलिए इसके खत्म होने से पहले इसकी सराहना करें,
_ क्योंकि कोई व्यक्ति चाहे आपकी कितनी भी परवाह क्यों न करे,
_ अगर उसके निरंतर प्रयासों की उचित तरीके से सराहना नहीं की जाती है,
_ तो यह उसे धीरे-धीरे आपसे दूर कर देगा.
_ इसलिए उन प्रयासों की सराहना करें और उन्हें महत्व दें,
_ इससे पहले कि आप बहुत सारे पछतावे और दुखों से घिर जाएं.”
यदि आप किसी के प्रति प्रेम महसूस नहीं करते हैं तो उसकी भावनाओं से न खेलें,

सच कहें और उसे जाने दें, अन्यथा आप उसे मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति बना देंगे.
if you don’t feel love for someone then don’t play with their emotions, say truly and let them go, otherwise you will make him or her mentally ill person.
हम अक्सर दूसरों के लिए जीने लगते हैं.

_ परिवार, दोस्त, सहकर्मी – हर किसी की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश में हम खुद को कहीं पीछे छोड़ देते हैं.
_ हमारे दिन की शुरुआत किसी और की मांगों से होती है, और रात किसी की उम्मीदों को पूरा करते हुए बीत जाती है.
_ और धीरे-धीरे, बिना हमें महसूस कराए, हम भीतर से खाली होने लगते हैं.
_ खालीपन सिर्फ एक भाव नहीं होता, वो धीरे-धीरे हमारे चेहरे पर उतर आता है, हमारी मुस्कान में झलकने लगता है.
_ हम थकते नहीं हैं, बल्कि सूखने लगते हैं – उस नदी की तरह जो दूसरों को सींचते-सींचते खुद बंजर हो जाए.
— पर क्या आपने कभी सोचा है —
_ अगर एक दीपक खुद बुझ जाए, तो वह किसी और के जीवन में रोशनी कैसे करेगा ?
_ अगर हमारे अंदर ही स्नेह, ऊर्जा और प्रेम का स्रोत न बचे, तो हम दूसरों को क्या दे पाएंगे ?
_ खुद की देखभाल करना स्वार्थ नहीं है, यह आत्म-सम्मान है.
_ यह स्वीकार करना है कि मैं भी उतना ही महत्वपूर्ण हूँ जितना कोई और..
_ कि मेरी थकान भी मायने रखती है, मेरी भावनाएँ भी ध्यान चाहती हैं, और मेरी आत्मा को भी प्यार की ज़रूरत है.
_ हम अपने प्रियजनों के लिए सब कुछ करना चाहते हैं — उनकी मदद करना, उन्हें मुस्कुराता देखना..
_ लेकिन सच यही है कि जब तक हम खुद को नहीं संवारते, तब तक वो सच्ची ऊर्जा, वो गहराई, वो स्थिरता हम दूसरों को नहीं दे सकते.
_ जब हम भीतर से भरे होते हैं — आत्मविश्वास, स्नेह और संतुलन से — तभी हमारे रिश्ते भी फलते-फूलते हैं.
_ इसलिए ज़रूरी है कि हम रोज़ थोड़ी देर खुद के साथ बिताएं.
_ वो चुप्पी में बैठकर आत्मा से संवाद करना हो सकता है, कोई किताब पढ़ना, खुलकर हँसना, एक लंबी साँस लेना, या बस बिना अपराधबोध के खुद के लिए कुछ अच्छा करना.
_ अपने आप को थामना, खुद को समझना और खुद से प्रेम करना — यही आत्म-देखभाल है.
_ क्योंकि अंत में, जब हम खुद से जुड़े होते हैं, तब ही हम सच्चे अर्थों में दूसरों से भी जुड़ सकते हैं.
_ और यही जीवन की सबसे सुंदर बात है — जब हम भीतर से भरे होते हैं, तब ही हमारे हाथों से बहकर दूसरों तक प्रेम पहुँचता है.
– Rahul Jha
error: Content is protected