सुविचार – अमीर – अमीरी – 157

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अमीर वो व्यक्ति होता है, जिसके पास सबसे ज्यादा वो चीजें हैं,

_ जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती.

अमीर वो नहीं जो कमाता ज्यादा है..
_ अमीर वो है जो खर्च अलग तरीके से करता है.!!
चाहे कोई अमीर हो या गरीब, सबको शारीरिक-मानसिक दुख, सामाजिक परेशानियां एक जैसी ही झेलनी पड़ती हैं.

_ भगवान की तरफ़ से अमीरों को कोई रियायत नहीं.
– Manika Mohini
फैशन और ग्लैमर की दुनिया से जुड़े लोगों का जीवन आम मध्यम वर्गीय परिवारों से अलग होता है.

_ उच्च वर्गीय परिवार भी अपनी इच्छानुसार चलते हैं.
_ उन्हें कैसा भी, यानि जो आम जनता की नज़र में गलत हो, जीवन जीने पर अपने मन-मुताबिक़ रास्ते मिल जाते हैं.
_ अन्य अनेक लोग हैं, जिन्हें इस समाज के नियम बाँध नहीं सके, अनेक मायनों में वे बेहतर जीवन जी रहे हैं.
_ जो लोग इनके खिलाफ रहते हैं, वे अपना ही जीवन अपने तरीके से और सही तरीके से नहीं जी पाते..- तो उनके मन में कहीं यह दंश तो रहता ही है कि हम सामाजिक मान्यताओं की रक्षा के लिए हम इतना मर-खप के भी जीवन का अच्छी तरह उपभोग नहीं कर पा रहे, और ये हैं कि बिना किसी ज़िम्मेदारी के, आज़ाद रह कर जीवन का असली आनंद ले रहे हैं.
_ भई कुछ तो नया करो.
_ खुद नहीं कर सकते तो जो कर रहे हैं, उन्हें तो चैन से जीने दो.!!
– Manika Mohini
मैंने ऐसे ऐसे धनी लोग देखे हैं..
_ जिनकी अपनी कोठी तो शानदार है,
_ लेकिन उनकी कोठी तक जाने वाला रास्ता बेहद खराब है.!!
अमीर लोग छोटी छोटी बातों पर ध्यान देते हैं..

_ और गरीब लोग बड़ी बड़ी बातों पर.!!

जिन अमीरों की जड़ों में अमीरी होती है, वे विनम्र होते हैं.
_ अकड़ नवधनाढ्यों में होती है.
सचमुच का अमीर चाहे कितना ही गरीब हो जाए..

_ पर उतना गरीब नहीं होता, जितना सचमुच का गरीब.!!

सुदामा कृष्ण का वक़्त गुज़र गया..

_अब अमीर किसी ग़रीब को दोस्त नहीं बनाता.!!

एक समझदार व्यक्ति अपनी कमाई का 10 प्रतिशत घर, गाड़ी और सुविधाओं पर खर्च करता है बाकि के 90 प्रतिशत फिर से बिजनस मे लगा देता है.

_मगर एक आम आदमी अपनी कमाई का सारा पैसा घर बनाने मे लगा देता है.
_ कुछ लोग तो ऋण उठाकर कर्जदार बन जाते हैं और फिर जीवनभर ऋण की किश्ते भरते रहते हैं.
_ इसलिए वे कभी भी अमीर नहीं बन पाते.!!
अमीर वो नहीं जिसके पास रोटी है, अमीर वो है जिसे भूख लगती है.

_ अमीर वो नहीं जिसके पास बढ़िया गद्दा है, अमीर वो है जिसे नींद आती है.
_ अमीर वो नहीं जिनके पास भारी भरकम मेडिकल कार्ड है, अमीर वो है जिसे कोई बीमारी नहीं.
_ अमीर वो नहीं जिनके अलमारी में ढेरों कपड़े हैं, अमीर वो हैं जिनकी शोहरत कपड़ों से नहीं किरदारों से है.
_ अमीर वो नहीं जिसके कलाई पर महंगी घड़ी है, अमीर वो है जिसके पास तुम्हारे लिए वक्त है.
_ अमीर वो नहीं जो कहीं भी कभी भी घूमने जा सकते हैं, अमीर वो हैं जो कहीं भी कभी भी घूमने चले जाते हैं.
सिर्फ़ कुछ ही लोग अमीर बनते हैं क्यूंकि-

_ सिर्फ़ कुछ ही लोग सुबह की मीठी नींद त्याग दफ्तर पहुँच जाते हैं.
_ सिर्फ़ कुछ ही लोग किसी भी उम्र में हर वर्ष 12-15 किताबें पढ़ अपने आपको बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं.
_ सिर्फ कुछ ही लोगो पैसा कमाने के बाद उससे शौक पूरे करने के बजाय अपनी बेहतरी में लगाते हैं,
_ सिर्फ कुछ ही लोग अपने हर काम को करने का टाइमटेबल बनाते और उसका अनुसरण करते हैं.
_ सिर्फ कुछ ही लोग बड़े बनने के बाजवूद अपने आपको बड़ा नहीं समझते और हमेशा अपना एक गुरु खोजते हैं.
_ सिर्फ कुछ ही लोग अपनी मेहनत के नतीजों की स्पष्ट रूप से कल्पना कर पाते हैं.
_ सिर्फ कुछ ही लोग हार कर, खून बहाकर, चोट पर पट्टी बांधकर वापस मैदान में उतरते हैं, हार नहीं मानते.
_ सिर्फ कुछ ही लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपनी सेहत से समझौता कर खेल से बाहर नहीं होते.
_ सिर्फ कुछ ही लोग सिर्फ पैसों से ही नहीं, बल्कि उसको कमाने की प्रक्रिया से भी प्यार करते हैं.
_ सिर्फ कुछ ही लोग बहाने बनाकर बचते नहीं, बल्कि अपनी कमियों का आँख मिलाकर सामना करते हैं.
– क्या मैंने सही कहा ?
– बताइयेगा.!
धन्यवाद!
– Neha Chandra
हम सबको एक दिन मरना है लेकिन फिर भी लोग इस सांसारिक मोह माया में क्यों पड़े हुए हैं ?

_ सही बात है क्यों पड़े हुए हैं, नहीं पड़ना चाहिए ! वाजिब बात है.
_ लेकिन एक बात जरूर बोलना चाहूंगी, मरना किसी भी जीवात्मा के जीवन का एक इवेंट है, एक इवेंट पूरा जीवन नहीं होता.
_ मरना एक दिन है, दिन भी नहीं…..मरना एक क्षण है.
_ एक क्षण के लिए बाकी के पूरे जीवन पर क्यों प्रश्न खड़े करना ?
_ जब तक जी रहे हैं तब तक जीवन के मज़े नहीं लिए तो क्या जिये ?
_ जीवन के, इस दुनियां के, इस अजब-गजब संसार के विभिन्न अनुभव नहीं लिए तो फिर क्या ही किया.
– Neha Chandra

सुविचार – गरीब – गरीबी – अभाव – 156

मुझे न तो गरीबी दो और न ही अमीरी ;

_मुझे मेरे लिये सुविधाजनक जीवन दो.!!
यहाँ गरीबी बहुत गहरी है.. इतनी कि रोज़मर्रा की ज़रूरतें भी बोझ बन जाती हैं.!!
अभाव से समृद्धि की यात्रा आमतौर पर व्यक्ति से उसका मूल व्यक्तित्व छीन लेती है.!!
इंसान को हमेशा सादगी में रहना चाहिए, भले ही वो आज गरीब और कल मालदार क्यों न हो जाए,

_ आपको सरलता के महत्व को जरूर समझना चाहिए.

🌿 “अभाव” – एक गुरु के रूप में :->

_ सही जीवन जीना सीखने के लिए.. हर इंसान के जीवन में कुछ साल अभाव के ज़रूर होने चाहिए.!!
_ जीवन में जो कुछ हमें तुरंत मिल जाता है, उसका मूल्य हम अक्सर नहीं समझते.
_ लेकिन अभाव – चाहे वो पैसा हो, साथ हो, सुविधा हो, या अपनापन –
हमें दो बड़ी बातें सिखाता है :->
1. जीवन का सत्य:
_ अभाव दिखाता है कि किस चीज़ के बिना भी जिया जा सकता है..
और कौन सी चीज़ हमें जीवन से सच में जोड़ती है.
2. अन्तर्दृष्टि और विनम्रता:
_ जब सब कुछ होता है तो मन बाहर भागता है,
_ लेकिन जब कुछ नहीं होता, तो मन पहली बार अंदर देखता है.
_ हर इंसान को शायद एक “तपस्या का दौर” चाहिए – जहां उसे मिले नहीं, और वो देख सके – कि अंदर क्या बचा है जब बाहर कुछ नहीं होता.
> “जिसने अभाव में सीखा है जीना, वही जानता है कि वास्तव में ज़रूरी क्या है”
“मैं अभाव के माध्यम से समृद्ध बन गया हूँ – अंदर से..”
न तो गरीबी और न ही अमीरी; जीवन सुविधाजनक होना चाहिए.!!

_ अत्यधिक गरीबी इंसान को विवश और थका देती है, और अत्यधिक अमीरी अक्सर अहंकार, लालच और असंतोष को जन्म देती है.
_ सच्चा सुख न तो अभाव में है और न ही अति में—वह तो सरल, सहज और अपनी ज़रूरत के अनुसार मिले जीवन में है.
_ यह भाव यह याद दिलाता है कि “जीवन की वास्तविक सम्पन्नता” संतोष, सादगी और सामंजस्य में है, न कि बाहरी चकाचौंध में..
👉—जहाँ हम अपने भीतर इतना संतुलन बना लें कि बाहरी परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, मन हमेशा स्थिर और सहज रहे.
“ना ज़्यादा चाह, ना कम—बस उतना ही, जितना सच्चा और सहज बनाए रखे”
अपने वित्तीय जीवन [Financial life] को बहुत गंभीरता से लें,

_ बहुत सारा पैसा कमाएँ. ‘दुनिया गरीबों के लिए बहुत क्रूर है.’

गरीब आदमी बेज्जती से बहुत डरता है..

_अमीर आदमी एकदम इसका उल्टा होता है.
किसी की गरीबी की इमोशन पर मत पिघला करो, जो गरीब है वह अपने कर्मों के कारण गरीब है और वह अपनी गरीबी को केवल अपने कर्मों से ही दूर कर सकता है.

_ इस दुनिया में कुछ गरीब लोग इतने बदतमीज होते हैं कि वे हमारी मेंटल peace की धज्जियां उड़ा देंगे और आखिर में हमें ही blame कर देंगे.!!
सच्चे इंसान के साथ गरीबी भी सहज लगती है..

_ और गलत इंसान के साथ.. दौलत भी बोझ बन जाती है.!!

अगर संपन्न परिवार का बच्चा पढ़ाई में पिछड़ भी जाए, तो उसके पास आगे बढ़ने के कई रास्ते होते हैं – क्योंकि आर्थिक तंगी उसकी राह में कोई बाधा नहीं बनती.

_ लेकिन अगर गरीब परिवार का बच्चा पढ़ाई में पिछड़ जाए, तो उसकी ज़िंदगी की रफ़्तार थम सी जाती है.!!
यकीन मानिए, अमीरों से ज़्यादा गरीब सुखी रहते हैं.

1. गरीब के घर खूब मिर्च-मसालेदार चटपटा खाना बनता है, स्वास्थ्य-सजग अमीर के घर सीधा-सादा.
2. गरीब खूब मस्ती से त्यौहार मनाता है, सजावट के सारे तामझाम के साथ, धूम-धड़ाके के साथ.
अमीर pollution के डर से पटाखे तक नहीं छोड़ पाता.
3. गरीब अन्य के दुःख में भी ज़ोर-ज़ोर से रोकर शोक के असली रंग का माहौल पैदा कर देता है.
अमीर किसी अपने के मर जाने पर भी सभ्यता के नाते आवाज़ निकाल कर नहीं रोता, घुट-घुट कर ग़म गलत करता है.
4. गरीब ख़ुशी में दोहरा हो जाता है, किसी भी तरह की मुखमुद्रा बना कर नाचता-गाता है.
अमीर सभ्य और शालीन दिखने की कोशिश में लाज-लज्जा के ख्याल से ज़ोर से हँस भी नहीं पाता.
5. गरीब के पास पेट भरने और तन ढकने के सिवा और कोई खर्चे नहीं होते,
इसलिए गरीब महीने की 5-7 हज़ार की तनख्वाह में से भी कुछ जोड़-बचा लेता है.
अमीर को रख-रखाव दुरुस्त रखने के अनेक खर्चे होते हैं,
इसलिए महीने में 5-7 लाख की तनख्वाह भी कम पड़ती है.
6. गरीब अपनी छोटी-मोटी नौकरी में ही मस्त रहता है, क्योंकि उसे पता होता है कि वह उससे बड़ी नौकरी पाने के काबिल नहीं.
अमीर अगर नौकरी में है तो CEO बन कर भी चैन से नहीं है, क्योंकि उसे job satisfaction नहीं होता, उसे हर नौकरी में लगता है, मैं और ऊँची जगह जा सकता हूँ.
[I deserve a better job. I deserve more.]
— “सही बात”
अमीरी में जीना हो तो कोई भी जी लेगा – गरीबी में जी कर दिखाओ.

_ फटे कपड़े, उधड़े जूते, बदन पर पसीने की चिपचिपाहट, होंठों पर अवसाद की रेखाएं, खाली जेब वगैरह वगैरह और फिर भी संतोष.!!
_ अमीरों के द्वारा बेइज्जत होना गलियों में फटे कपड़ों का मजाक उड़वाना, सामाजिक कार्यों में शामिल न करना बहुत कुछ सहन करना पड़ता है.
_ ऐसी जिंदगी को तपा हुआ सोना कहते हैं, कभी कभी उस जिंदगी पर बड़ा हृदय रोता है..
_ रोते हुए आँसुओं का जबाब तक नहीं दे पाते अमीरजादे..!!
प्रतिष्ठित परिवार के बच्चों पर अपने परिवार की, पूर्वजों की प्रतिष्ठा बचाए रखने का बड़ा तनाव होता है.

_ शिक्षित माँ-बाप के बच्चों के मस्तिष्क पर पढ़ाई में अव्वल आने का तनाव रहता है.
_ अमीरों के बच्चे इस तनाव में रहते हैं कि माँ-बाप के कमाए धन को कैसे ठिकाने लगाया जाए..
_ बिना तनाव के मस्त रहते हैं तो बस ग़रीबों के बच्चे, जो मिट्टी में लोट-लिपट कर, रूखा-सूखा खाकर मस्त रहते हैं.
_ उन्होंने जो कभी देखा ही नहीं, उसे बचाने या गँवाने का तनाव कैसा ?
_ असली आनंदमय जीवन जीते हैं ग़रीब..
_अमीर की तरह चिन्ता में तिल-तिल नहीं मरते..!!
_ अमीरों का आराम गरीबों के मजबूत कंधों पर टिका रहता है.!!
– Manika Mohini
दो ही श्रेणियाँ खुले दिमाग़ की होती हैं, निम्न वर्ग और उच्च वर्ग.

_ मध्यम वर्ग अपने दिमाग़ को इतना खोल नहीं सकता, क्योंकि वह समाज के डर और परम्पराओं के निर्वहन की ज़िम्मेदारी निभाने में लिप्त रहता है.
_ दकियानूसी होना उसकी नियति है, जिससे वह छुटकारा नहीं पा सकता.
– Manika Mohini
“मध्यम वर्ग अक्सर सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच फँसा रहता है.

_ इसलिए उसके लिए खुले दिमाग से जीना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं”
एक दिन अभाव थे और इतने थे कि उनके होने से ही ज़िन्दगी थी,

_ उनके होने से ही गर्व होता था, उनको खुलकर बताते थे और अपनी खुशियाँ जाहिर करते थे,
_ ये अभाव इतने ताकतवर थे कि एक बहुत बड़े – मतलब वृहद समाज से एक झटके में अलग कर पहचान बना देते थे,
_ चीन्हना बहुत आसान था – किसी को खोजना नही पड़ता था कि कौन, क्या है, कहाँ है और किस हाल में है,
_ वह दुनिया बहुत सुकून वाली थी – जब कुछ नही था तो कोई गलाकाट स्पर्धा नही, कोई होड़ नही – दौड़ नही, कही आने – जाने की जल्दी नही, किसी से जलन नही, बैर और ईर्ष्या का सवाल नही..
– बस जो मिलता था – उसी में संतोष था, उसी में सुख था – सुख जो किसी कच्ची दीवार में बना दिये गए तिकोने से आले की गोद रहता – दिन में धूप, शाम को गर्माहट और रात में किसी अलाव सा दीया बनकर जीवन के आँगन में जलता रहता,
_ यह नही पता था कि इस छोटे से सुख के लिये भी माँ – बाप का खून उसकी लौ को जिलाये रखने के लिये चौबीसों घण्टे जल रहा है.
_ जब संसार को देखना भोगना और महसूस करना शुरू किया तो सब कुछ इकठ्ठा करने की प्रवृत्ति जागने लगी –
– एक सुई से लेकर धागा, चम्मच, कपड़े, और वो सब जिसे जर, सम्पत्ति या माया कहते हैं इकठ्ठी करने में लग गए –
– धरती के विशाल कैनवास पर अजस्र योजन सेना को खड़े करने लायक मैदान पर सफ़ेद चुने की एक पँक्ति पर खड़े होकर देखा कि यह दौड़ बहुत छोटी है,
_ बस क्षणभर में सारी बाधाएं पार कर सोने का तमगा हासिल कर लेंगे तो बगैर किसी सीटी के या इशारे के दौड़ना शुरू कर दिया –
– हर जगह, हर बाधा को तोड़ने का जोश और हर जोश के बाद उपलब्धियों की शोहरत की ऐसी चरस चख ली कि नशा उतरता ही नही,
_ दौड़ता रहा, भागता रहा और अभी भी मन नही भरा है
जबकि अपनी बाज़ी के सारे खाने उठ गए है – कोई तयशुदा मैयार नही, माज़ी का अवसाद सर चढ़कर बोलता है कि बस करो – एकदम चुप, पर कहाँ ….
_ सब कुछ खोता गया – घर, परिवार, जीवन, सुख, शांति, भीतर का चैन, उजियारा, मन को तृप्त करने वाला दृश्य, क्षुधा मिटाने वाला हर वो अमृत पेय या पदार्थ..
जिसको छककर जीवन को बचाये रखना था, वितृष्णा हो गई – पर नही, इस सबमें वह सब जमा हो गया – जिससे शरीर ही नही, आत्मा के घावों में छाले पड़ गए और अब वे टींस दे रहें है तो पलटकर देखने की इच्छा नही होती –
– अपनी सजी हुई उपलब्धियों की दुकान, जर – ज़मीन को देखकर अपनी ही परछाई खोज रहा हूँ – जो इस सबके बीच खो गई है और अब जब परछाई को ओढ़कर जीने का स्वांग भरना है, तो लगता है सब कुछ लूटा दूँ, छोड़ दूँ यह सब..
_ और सिर्फ़ अपनी एकमेव सम्पत्ति यानी परछाई को संग लेकर चल दूँ कही –
– उसी अभाव की बेफ़िक्र दुनिया में ताकि जब फांकाकशी में पालथी मारकर किसी धूप के टुकड़े पर बैठूँ तो प्रकृति से निशुल्क मिलें बेशकीमती हवा, पानी और प्रकाश को भोग सकूँ.
_ मन ऊब गया है, बैरागी हो गया हूँ और शरीर – काया का गुमान छोड़ रहा है अपने अनंत में मिल जाना चाहता है,
_ रक्तरंजित आत्मा अपने ही बोझ से दबी जा रही हैं, किसी निर्धारित दिन पर एक ऐसे समय जब धरती थम रही हो, आसमान हाँफ रहा हो और इस पृथ्वी पर कोई चैतन्य अवस्था में ना हो ….. छोड़कर चल दूँगा.
_ सबके बावजूद भी ज़िन्दगी खूबसूरत है कि इतने मौके दिए और यह समझ भी कि भले – बुरे, अपने – परायों को पहचान पा रहा हूँ और यह सब सोचने – समझने – लिखने की शक्ति दी है बस यह बनी रहें और पूरे होशोहवास में दम निकलें चलते -फ़िरते, किसी का मोहताज ना बनूँ.
– Sandip Naik

सुविचार – ईमानदार – ईमानदारी – 155

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ईमानदारी एक महंगा उपहार है; इसकी उम्मीद सस्ते लोगों से न रखें.
कभी कभी सच्चे और ईमानदार व्यक्ति को भी लगने लगता है की वो गलत रास्ते पर चल रहा है,

_क्योंकि सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर दूर दूर तक उसे कोई दूसरा दिखाई नहीं पड़ता..

पूरी तरह ईमानदार जैसा भी कोई किरदार नहीं होता.

_ छोटी मोटी बेईमानियाँ हम सबके भीतर होती हैं.
_ अगर आपके जीवन में कुछ ऐसे लोग हैं.. जो छल से कभी किसी का फायदा नहीं उठाते तो आप बहुत खुश किस्मत हैं.
_ जो कहे मैं बहुत ईमानदार हूँ.. ऐसे लोगों पर बस मुस्कुराना और आगे बढ़ जाना,, रुकना मत..!!
ईमानदार बनना तो अकारण ही बनना..

_क्योंकि अगर किसी तरह के लाभ या किसी तरह सम्मान के चक्कर में ईमानदार बन गये,
_ तो कुछ ही समय में ईमानदारी बोझ लगने लगेगी..
__ और फिर सिवाय दुःख एवं तकलीफ के और कुछ हासिल नहीं होगा..!!
— लेकिन कोई हमारे साथ बेईमानी और धूर्तता कर रहा तो क्या करें..??
_एक बार धोखा खाकर पीछा छुड़ा लें..!!
आप केवल स्वयं से ईमानदार रहें,

_ आप को किसी को सफ़ाई देने की जरुरत नहीं है ;
_ क्यूंकि लोग अक्सर वही समझते हैं जो उन्हें समझना होता है,
_ आप अपने कीमती समय उन्हें समझाने में नष्ट कर देंगे तो भी वो नहीं समझेंगे,
_ जीवन अनमोल है ..इसलिए आप अच्छे से जीएं..!!
यदि आपकी ईमानदारी के बाद भी आपको धोखे मिलते हैं, तो आप जान लें..

_ आपको सफलता के लिए नहीं बल्कि महानता के लिए तैयार किया जा रहा है,
_ इसलिए अपनी ईमानदारी न छोड़ें.!!
“काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता.

_ हर ईमानदारी से किया गया काम..- किसी न किसी का जीवन थोड़ा आसान बनाता है”
ईमानदारी एक बहुत महंगा उपहार है..
_ इसकी उम्मीद घटिया लोगों से न करें.
ईमानदारी का जीवन कठिन नहीं बल्कि आनंददायी होता है.

_ यह एक जीवन शैली है.. जो हमारे सोच और व्यक्तित्व को नए आयाम देती है.!!
भ्रष्ट व्यक्ति और ईमानदार व्यक्ति में अंतर है:

_ भ्रष्ट व्यक्ति की कोई कीमत नहीं होती है और ईमानदार व्यक्ति की कीमत..!!

हर इंसान खुद को बेहतर जान सकता है और बेहतर कर सकता है खुद को..

_ इस प्रक्रिया मे खुद के लिये बरती गई ईमानदारी बहुत काम आती है.!!

सुविचार 154

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हर आदमी के अन्दर एक महामानव है, आवश्यकता इस बात की है कि अपनी शक्ति को समझे और अपने आप को जागृत करे. 

 

सुविचार – भविष्य – Future – 153

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हम भविष्य के बारे में कुछ भी नहीं जानते, हमें नहीं पता कि यह कैसा होगा..

_ जो चीजें असंभव लगती हैं, वो भविष्य में संभव हो सकती हैं.
_ दूसरा यहां तक कि अगर आप किसी ऐसी चीज के बारे में निश्चित हैं, जिसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी चीज के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए आपको यह नहीं मिल रहा है.
_ यदि कुछ आपके लिए नहीं है तो आपके पास निश्चित रूप से चीजें अन्य तरीके से होंगी.
_ इसका मतलब यह है कि आप अलग डिजाइन किए गए हैं, बुरी तरह से नहीं..
_ एक फर्क है..
_ हर कोई और सब कुछ एक दूसरे के लिए नहीं होता है.
_ बहुत सी चीजें हैं जो कई लोगों के लिए काम करती हैं,
_ लेकिन साथ ही वे कई लोगों के लिए काम नहीं करती हैं.
_ यह किसी को अच्छा नहीं बनाता है या पर्याप्त अच्छा नहीं है.
_ इसका सीधा सा मतलब है कि, वह बात उनके लिए नहीं थी.
हम अपना पूरा जीवन भूलभुलैया में फंसे हुए बिताते हैं,

_ यह सोचते हुए कि हम एक दिन इससे निकल जायेंगे,
_ और यह तब कितना खूबसूरत होगा, और उस भविष्य की कल्पना ही हमे आगे बढ़ाती है,
_ लेकिन हम हकीकत में ऐसा कुछ कभी नहीं करते, जिससे कि उस भूलभुलैया से निकल पाएं,
_ हम सिर्फ भविष्य की कल्पना का उपयोग करते हैं वर्तमान से बचने के लिए.!!
बहुत कम इंसान ऐसे होते हैं.. जो जीवन-यात्रा में अपना पहला कदम सही रख पाएँ.

_ यह पहला कदम ही हमारे भविष्य की बुनियाद होता है.
_ यदि यात्रा के मध्य में हमें हमारे गलत कदम का अहसास हो जाए तो.. उसे सही दिशा की ओर मोड़ने में संकोच कैसा ?
_ गिनती कभी भी एक से शुरू की जा सकती है.
_ बढ़ना तो सौ की ओर ही है ना ?
_ जो गलत चल लिया, चल लिया, जब आँख खुले तभी सवेरा.!!
कुछ लोग किस्मत पर भरोसा करते हैं, कुछ भाग्य पर.. पर मेरा यक़ीन है कि आने वाला कल हमारी मेहनत और फैसलों से ही बनता है.. भविष्य लिखा नहीं जाता, उसे जी कर गढ़ा जाता है.
जीवन का हर पड़ाव एक चौराहा है, चाहे जो भी रास्ता चुना जाए, वह रास्ता अतीत से वर्तमान तक ले जाता है और भविष्य तय करता है कि रास्ते का चुनाव सही था या गलत.!!
भविष्य का धुंधलापन डराता ज़रूर है.. पर आज को थाम लो, वही कल को रोशन करने का एकमात्र सहारा है.!!
जीवन का बहुत कुछ खत्म हो जाता है,
_ फिर भी भविष्य में झेलने के लिए बहुत कुछ बचा रहता है.!!
भविष्य का महल तो सब बनाना चाहते हैं,

_ पर आज की ईंट उठाने से सब कतराते हैं.!
हम अच्छे भविष्य की आकांक्षा रखते हैं और कभी भी आगे जाने का प्रयास नहीं करते.!!
भविष्य के बारे में सोचना भी ज़रूरी होता है,
_ क्योंकि हर चीज़ को केवल समय पर छोड़ देना भी शायद ठीक नहीं होता.!

सुविचार – बातें बेवजह की – 152

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लोग कैसे पूरा समय सिर्फ खाने और पकाने की बात कर सकते हैं ;

_किसी को अपडेट देने के लिए बातें ..सिर्फ खाने और पीने की, सब कुछ कुशल हो गया, खाना पीना बढ़िया हो गया _ ही दिए जाते हैं..!!
_कितनी बोरियत भरी है जिंदगी…कितना पाखंड है..
_ कहीं तो सुधार जाओ… कहीं तो कुछ छोड़ दो..
_ज्यादातर लोग ठग, धूर्त हैं, और पैरों की एकरसता, घर, भोजन, गगनचुंबी इमारतें, जॉब, प्यार…
_..शून्यता के एक खोखले गड्ढे पर खड़ी ..एक पूरी दुनिया !!
_अर्थहीन !!! बिल्कुल अर्थहीन !!
आपका जीवन बेहतर हो रहा है, इसका एक प्रमाण यह होगा कि आपको व्यर्थ बातों में रूचि नहीं बचेगी ; कम होती जाएगी, – कम होती जाएगी..

_कोई आपको आकर के फ़िज़ूल कि बातें बताना शुरू भी कर देगा तो _आपको उबासी आने लगेगी,
_और आप उनकी फिजूल बातों की आंतरिक [internally ]रूप से उपेक्षा [ignore] करते रहेंगे.
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