सुविचार 124

ज़िन्दगी के 3 आसान नियम-

1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.

2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.

3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!

सुविचार – वर्तमान – प्रेजेंट – इस समय – इस क्षण – 123

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अगर आप एक दिन को जीवन मान कर जी सको,

तो आप सम्पूर्ण जीवन को अत्यन्त मूल्यवान बना सकते हो.

वर्तमान में जीने का यही फायदा होता है कि हम भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होते.!!
वर्तमान में जीने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भविष्य की चिंता नही होती, क्योंकि वर्तमान से ही भविष्य बनता है _

_ वर्तमान में जीने का यही लाभ है की हम जीवन को जी रहे हैं. भुत और भविष्य के बारे में सोच कर हम जो जीते है उसे जीवन नहीं कहते हैं.

वर्तमान में जीने से हम एक एक क्षण का आनंद ले सकते हैं.

आप पास्ट और फ्यूचर की सोच में वर्तमान को इगनोर न करें.

हमें वर्तमान में रहना चाहिए. जो हो रहा है उसे अपना बैस्ट दो.

अक्सर बहुत दूर की चीजों की ओर आकर्षित होते रहने से पास की चीजें कब छूट जाती हैं, पता भी नहीं चलता,

_ इसलिए कई बार भविष्य की योजनाओं से ज्यादा जरूरी अपने वर्तमान को सहेजना होता है.!!
भाग कर आप अपना केवल स्थान बदल सकते हैं, वर्तमान स्थिति नहीं !!
“बस वर्तमान को याद रखें.”

_और सुन्दर बात यह है कि यदि आप सचमुच इस क्षण में हैं, तो आप सोच नहीं सकते; यह तकनीकी रूप से असंभव है.

_सोचना केवल अतीत या भविष्य में ही संभव है, वर्तमान में कभी नहीं.

_अतीत में मत गिरो ​​और भविष्य की ओर मत भागो.

_उस क्षण में रहो, वह क्षण जो अभी घटित हो रहा है.

_जब आप खा रहे हों तो खायें – और कुछ न करें.

_जब आप सुन रहे हों, तो सुनें- और कुछ न करें.

_जब आप चल रहे हों तो चलें और कुछ न करें.

_वर्तमान क्षण में बने रहें, जो गतिविधि आप अभी कर रहे हैं उसमें बने रहें.– वर्तमान सबके लिए एक समान है; इसका नुकसान सभी के लिए समान है; और यह स्पष्ट होना चाहिए कि एक संक्षिप्त क्षण ही वह सब कुछ है जो खो गया है.

_क्योंकि आप न तो अतीत को खो सकते हैं और न ही भविष्य को; जो आपके पास नहीं है उसे आप कैसे खो सकते हैं ?

_ “वर्तमान ही वह सब कुछ है” और जो आपके पास [अतीत या भविष्य] नहीं है, उसे आप खो नहीं सकते.

“खोया हुआ वर्तमान”

_ कभी-कभी जीवन हमें ऐसा आईना दिखाता है जिसमें हम खुद को खोजते-खोजते ही खो देते हैं.
_ बीते हुए कल की परछाइयाँ और आने वाले कल की धुंध — दोनों मिलकर आज की रोशनी को ढक देती हैं.
_ जब घटनाएँ भीतर की चमक को निगलने लगती हैं, तब हमें रुककर पूछना चाहिए —
“क्या मैं अभी यहां हूं… सच में ?”
_ जब हम इस पल की सच्चाई को महसूस करते हैं —
साँसों की गति, मन की हलचल, आसपास की खामोशी — तभी वर्तमान की नमी लौटने लगती है.
> “क्या मैं अपने वर्तमान को जी रहा हूँ, या बस सोचने की आदत में जी रहा हूँ ?”
जिस चीज को हम भविष्य के लिए बचा लेते हैं, हम ख़ुद भी नहीं जानते कि वो कभी औरों के या ख़ुद हमारे भी काम आ सकेगी या नहीं.

_ ‘कल’ के लिए इतना कुछ बचा लिया जाता है, कि वो किसी के ‘आज’ को लील जाता है, और कभी-कभी ख़ुद के ‘आज’ को भी.!!
” जीवन आज जीया जा सकता था..
_ उसे लोग अक्सर ‘कभी बाद में’ के लिए बचा लेते हैं”

सुविचार 122

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अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं,

तो ये मत सोचिए कि वो कितना बेवकूफ है,

बल्कि ये सोचिए कि उसे आप पर कितना विश्वास है.

हम चाहें तो केवल अपने लिए कोई दीप जला सकते हैं,

लेकिन उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते

कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो.

 

सुविचार – उपहार – तोहफा – गिफ्ट – प्रेजेंट – 121

स्नेहपूर्वक भेंट किये गये उपहारों में हृदय की विशालता और नेह भावना निहित होती है.

_ ये उपहार जीवनपर्यंत संभाल कर रखे जाते हैं.
_ जब भी इन पर दृष्टि जाती है..
_ उपहार देने वाले की स्मृति जीवंत हो उठती है.
हम कोई भी वस्तु कभी भी खरीद सकते हैं,
_ लेकिन किसी खास मौके पर उपहार में मिली वस्तु का महत्व बढ़ जाता है.
उपहार हमेशा सराहनीय होता है, क्योंकि वह सिर्फ़ वस्तु नहीं होता,
_ बल्कि उसके साथ देने वाले की भावनाएं जुड़ी होती हैं..!!
उपहार को चीज़ मान लेना, उसकी बेकद्री है, उपहार भावना होती है.
जिन लोगों से हमें तोहफा मिलता है,
_ वे उनके दिल का स्वाद और पहचान है ..जो हमारे साथ चलती हैं.

सुविचार – ध्वनि प्रदूषण [noise pollution], गपशप, बकबक, ज्यादा बोलना, निरंतर बातचीत, ज्यादा बातचीत करना, – 120

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ज़्यादातर समय, किसी भी चीज़ के बारे में बात न करना ही बेहतर होता है.

_ यही सबसे अच्छी चीज़ है जो कोई भी कर सकता है.
_ हमने अपने ध्वनि प्रदूषण से उस शांति को नष्ट कर दिया है.
_ हम में से ज़्यादातर लोग नहीं जानते कि इस लगातार बातचीत को कैसे रोकें.
_ अगर कोई नहीं है, तो हम खुद से ही बातें करते रहते हैं.
_ यह ध्वनि प्रदूषण और बकबक करता मन हमारे भीतर की क्रिस्टल जैसी स्पष्टता को नष्ट कर देता है.!!
रिसर्च [Research] करके बोलने वाला अंदर से निश्चिंत और क्लैरिटी ळिए हुए रहता है,

_ सिर्फ़ बोलने के ळिए बोलने वाला अंदर से खाली और खोखला होता है.!!
ज़िन्दगी में इतने काम होते हैं, गपशप करने के लिए वक़्त कोई कहाँ से निकाले ?_गपशप तो छोड़ो, अपने से ही बात करने का समय नहीं मिल पाता..

_ अपने से बात करना, अपने भीतर झांकना, अपने आप से मिलना कितना ज़रूरी है,
_ इस आत्मसुख को जानिए, बहुत सारी उलझनों से मुक्ति मिल जाएगी.!!
केवल गपशप और तुलना करके हम अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं..

_ जिसका हमारे जीवन में कोई अर्थ या मूल्य नहीं है.
_ महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अपने आप को देखें, उस दयनीय, ​​तुच्छ अस्तित्व को देखें.. जो हम अपने लिए बना रहे हैं.
_ फिर महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में जीने के महत्व को समझें.
_ हम सभी के लिए अपने भीतर गहराई में जाने और उस क्षमता को पहचानने का समय आ गया है.. जो हमारे भीतर छिपी हुई है, जो छोटी-छोटी गपशप और तुलनाओं द्वारा मन की अंतहीन बकबक से ढकी हुई है. – “”पूर्वाग्रह और निष्कर्ष””
_ जागृत होइए, जीवित बनिए और अपने भीतर की क्षमता को देखना शुरू कीजिए.!!
हमारे यहाँ बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है तो कोई भी कुछ भी अनाप सनाप बोलना शुरू कर देता है.

_ बुद्धि और विवेक लुप्त हो गए हैं, यहाँ तक कि वाणी की मर्यादा भी खो गई है.
_ मानसिक संतुलन इतना बिगड़ गया है कि किसी भी विषय पर बोलने से पहले हम यह नहीं सोचते कि कहाँ, क्या, कैसे और कितना बोलना है,
_ क्योंकि हमें तो बस बोलने से मतलब है.!!
आजकल लोग बोलते नहीं, तोलते हैं.. क्योंकि अब बातें नहीं, मतलब निकाले जाते हैं.!!
हर “इसान” अपनी “जुबां” के “पीछे” “छुपा” हुआ है,अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!
जहां मुमकिन ही नहीं, वहां संवाद की कोशिशें सिर्फ फजीहत करवाती हैं.!!

सुविचार- जिंदगी क्या है.. – 119

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जिंदगी के 60 साल बीतने के बाद आप जान पाते है कि जिंदगी क्या है..

_ इसे जीना कैसे था.. क्या करना जरुरी था जो छूट गया और क्या क्या गैर-जरुरी करते रहे..
_ और यही बात अगर 30 साल की उम्र मे जान गये तो समझिये अगले 30 साल मिल जाएंगे.. जिंदगी जीने के लिये.!!
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