सुविचार – मेहमान – अतिथि – गेस्ट – 048

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आपके यहाँ जब कोई मेहमान आये तो..

_ उसके लिए ऐसा प्रयास करो कि ..उसे कोई तकलीफ़ न हो,
_ और जब कहीं आप मेहमान बन कर जाओ तो..
_ ऐसे रहो कि मेज़बान को अहसास न हो कि.. आप को कोई तकलीफ़ या कमी है.
सच्चाई तो आज की ये है आज कल गेस्ट आते ही कम हैं और आते भी हैं तो जाने की जल्दी और उनको भेजने की जल्दी के साथ..!

रिश्ते पनपे कैसे ?
_ अगर आप जाएंगे नहीं तो आपके पास भी कोई आएगा कैसे..
_ नई पीढ़ी भी यूं ही अजनबियत के साथ पल पुस जाएगी..
_ कल को एक दूसरे को पहचानेगी ही नहीं बर्दाश्त करना तो दूर की बात है..!!
आजकल कोई गेस्ट आता कहाँ है.

_ कोई आता भी है तो १-२ घंटे के लिए..
_ रात को रुकने का तो कोई सवाल ही नही..
_ सब रिश्ते धीरे धीरे ख़तम होते जा रहे हैं, ज्यादातर खून के रिश्ते..
_ किसी के पास वक़्त ही नही है और खासकर महानगरो मे रहने वालो के लिए..
_ फ्लैट का साइज जरूर बढ़ रहा है, लेकिन दिलो के साइज छोटे होते जा रहे हैं..!!
यह सही है कि अब गेस्ट का आना कोई पसंद नहीं करता..

_ और गेस्ट भी किसी के घर जाना पसंद नही करता..
_ हकीकत यह है कि हम सब की अपनी एक जीवन शैली हो गयी है..
_ हमारी अपनी प्रातः चर्या और दिनचर्या है, दूसरे के घर मे यह लागू नहीं हो पाती..
_ घर बड़ा हो, उसमें पर्याप्त जगह भी हो.. मगर अब गेस्ट कम ही आते हैं..!!
पहले मेहमानों के लिए दिल में जगह थी, सब जरा सी जगह में ही समा जाते थे.

_ पुरानी बातें अब सब हवा हो गई..
_ अब वास्तव मे किसी के घर जल्दी कोई रुकता नहीं है..
_ हमारा शरीर अब आराम का इतना अभ्यस्त हो गया है ज़मीं पर बैठ लेट ही नहीं पाता है, सबको अपना कमरा और पलंग चाहिए !!
पहले की तरह तो आना जाना सब खत्म हो गया,

_ पहले सब एक-दूसरे के घर हाल-चाल व राजी-खुशी पूछने जाते थे,
_ पर अब किसी के पास समय नहीं है, कोई किसी के घर जाता ही नहीं..
_ अब तो कोई फंक्शन होने पर ही जाते हैं, बेवजह किसी के घर नहीं जाते.!!
पहले हम कभी भी बिना पूर्व सूचना के किसी के घर चले जाते थे और कोई हमारे घर आ जाता था… अच्छा लगता था.

_ पहले पूर्व सूचना देने की सुविधा भी नहीं थी, न ज़रूरत महसूस होती थी.
_ आज शब्दों में तो सब नज़दीक हैं.. लेकिन वैसे बहुत दूरियां हैं.
_ यह नए ज़माने का बदलाव है.
_ बदलाव अच्छा हो या बुरा, पसंद आए या न आए, स्वीकारना ही होता है.!!
– Manika Mohini
किसी के घर जाओ तो अपनी आँखों को काबू में रखो, ताकि उसकी कमियां न दिखे !

_ किसी के घर से निकलो तो जुबान को काबू में रखो, ताकि उसके घर की इज्जत और राज़ दोनों सलामत रहें,
_ कौन क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है और क्यूँ कर रहा है, इन सबसे आप जितना दूर रहोगे, उतना ही खुश रहोगे,
_ जितना हो सके खामोश रहना ही अच्छा है, क्योंकि सबसे ज्यादा गुनाह इंसान से उसकी जुबान ही करवाती है,
_ बोलने से पहले सोचो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया जाता है..!!
अब मेहमान बदल गये हैँ, अब मेहमान आते हैँ तो वह चाहते हैँ कि उनको होटल जैसा ट्रीटमेंट मिले.!!
पहले दिन अतिथि, दूसरे दिन बोझ और तीसरे दिन कंटक है.!!
आजकल तो अपने भी कहलाते हैं मेहमान..

_एक वो दौर था मेहमान भी मेहमान नहीं थे.!!
हमें तो अच्छा लगता है कि कोई अतिथि हमारे पास आया है,
_ अपनी सुविधा और छमता के अनुरूप उनका ह्रदय से स्वागत करते हैं.!!

सुविचार – परिवार – फैमिली – Family – 047

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जाने के लिए कुछ जगह होना घर है,

किसी से प्यार करना ही परिवार है,
दोनों का होना एक आशीर्वाद है.
Having some place to go is HOME
Having someone to love is FAMILY
Having both is a BLESSING.
मानव जीवन में परिवार की भूमिका उस कुशन या गद्दे की तरह की होती है,

_ जो हमें जीवन में सफलता की ऊंचाइयों से अचानक गिरने पर हमें जख्मी होने से बचाती है.
_ इसलिए सफलता पाने की कोशिश में केवल संघर्ष ही अनिवार्य नहीं है,
_ बल्कि उन अपनों के प्यार व सहानुभूति की भी दरकार होती है..
_ जिनकी उपस्थिति के बिना जीवन तथा जहान की सारी खुशियां अधूरी प्रतीत होती है.
_ आप के अपने आप के सपनों के पीछे भागने की रेस में आप के साथ होंगे तो आप को एक अद्भुत ऊर्जा तथा प्रेरणा का एहसास पलप्रतिपल होगा.
_ अपनों के प्यार को खो कर पाई गई किसी भी कामयाबी की कीमत कभी भी इतनी अधिक नहीं होती,
_ जो आप के जीवन की भावनात्मक कमी की भरपाई कर सके.
‘परिवार बहुत जरूरी है’.. बिना परिवार का इंसान कटी हुई पतंग की तरह होता है.. जिसे लोग या तो लूट लेते है या फिर फाड़ देते हैं.

_ इसलिए परिवार से जुड़े रहिए. मुसीबत मे सिर्फ परिवार ही काम आता है.
परिवार सुख-दुःख, खुशी-गम यानि जीवन के हर रंग के अनुभवों का संगम है.

_ यूं अकेले भी जीवन आराम से जिया जाता है,
_ यूं परिवार को दुखों की जड़ कहा जाता है, लेकिन दुख और परेशानी के समय अगर परिवार का साथ मिले तो व्यक्ति मुसीबतों में भी निश्चिंत रहता है,
_ उसे अपना ख्याल रखने की भी चिंता नहीं होती.
_ जिनका अपना परिवार नहीं होता यानी खून का रिश्ता नहीं होता, वे अजनबियों से रिश्ते बनाते हैं.
_ मित्र भी सीमित रूप से ही आपका साथ देते हैं, वे स्थायी सहारा नहीं होते.
_ परिवार एकमात्र ऐसा सुख है जो वरदान स्वरूप मिलता है..!!
अगर परिवार में नई और पुरानी पीढ़ी एक दूसरे कि भावना को समझ कर परस्पर सामंजस्य बिठाये तो _जटिल परिस्थितियां कभी उत्पन्न ही नहीं होंगी,

_यदि दोनों थोडा- थोडा झुक जाएँ तो खुशियों का वृत्त अपने आप ही पूरा हो जायेगा.

दुनिया बहुत बड़ी है, मगर एक इंसान की दुनिया वह होती है, जिनके सुख और दुख से वह प्रभावित होता है.

_ अर्थात परिवार और चन्द दोस्त और रिश्तेदार..!
_ कोशिश ये कीजिए कि आपकी दुनिया में शामिल खास लोगों को आपसे कोई शिकायत न रहे.
_ बाकी दुनिया की चिंता छोड़ दीजिए..!!
जीवन में सच्ची खुशी उस बड़े बड़े मकान में नहीं, बल्कि उस छोटे से कोने में है.. जहां हम अपने परिवार के साथ हंसते-बोलते हैं.
_ सच्ची समृद्धि बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि भीतर की शांति और संतोष में है.
परिवार एक पेड़ की शाखाओं की तरह होता है,

_ जो बढ़ती तो अलग- अलग दिशाओं में है, लेकिन सब की जड़ एक ही है !

परिवार में अगर छोटी-छोटी बातों को बड़ा बनाओगे,

_ तो आपका बड़ा परिवार छोटा होता जाएगा..!!

बेशुमार पैसा और दुनिया का कोई भी ब्रांड, आपको वो ख़ुशी नहीं दे सकता ;

_ जो आपको आपका परिवार दे सकता है.

इस खूबसूरत जीवन मे दो रोटी रूखी-सुखी ही हो.. परिवार के साथ खाने में जो सुकूँ है.. वो सबसे बड़ा है,

_ पैसा -रूतबा- झगड़ा ये सब बस जीवन की खूबसूरती को बर्बाद करने के लिए ही है..!!

परिवार को मालिक बनकर नहीं बल्कि माली बनकर संभालो,

_ जो ध्यान तो सबका रखता हो.. पर अधिकार किसी पर ना जताता हो..

किसी घर में एकसाथ रहना परिवार नहीं कहलाता, बल्कि एकसाथ जीना, एक-दूसरे को समझना और एक-दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है.!!

जीवन में कुछ लोग हमारे लिये सिर्फ लोग नहीं होते, वो होते हैं हमारें जीनें की वजह..
_ हमारे मुस्कुराने की वजह, उनके होने मात्र से सब सही-सा लगता है.!!
परिवार की नीवं जब मिल- जुलकर अनेक कंधों पर सवार होती है,

तब वह मजबूत बनती है.

परिवार में बहुत समस्याएँ होती हैं, पर वे लोग खुशनसीब हैं जिनका परिवार होता है.!
” पारिवारिक बंधन एक पेड़ की तरह होता है, यह झुक सकता है लेकिन टूट नहीं सकता “
परिवार उस वृक्ष की तरह होता है, जिसकी घनी छांह में हम खुद को सुखद स्थिति में महसूस करते हैं.
परिवार वो है जो मुश्किल घड़ी में आपके काम आए.. ना की आपके बारे में बातें बनाये..!!
विडंबना ये है कि घात करने वाले अब परिवार में ही अधिक हैं,

_ वो पराये को लाभ दे देंगें.. पर अपनों के लिये चाहेंगे कि ये दुखी हीं रहे.!!
परिवार बर्बाद होने लगते हैं, जब समझदार मौन रहते हैं और नासमझ बोलने लगते हैं.

_ कुछ मूर्खों का पागलपन कब तक परिवारों को निगलता रहेगा ? 

परिवार में मौजूद नाखुश लोग बेमतलब की बात का बतंगड़ बनाने में माहिर होते हैं.!!
परिवार को जोड़ने वाला बंधन खून का नहीं,

_बल्कि एक-दूसरे के जीवन में सम्मान और खुशी का है.!!

अपने परिवार से मिल के रहो, _ दुनिया की हर खुशी तुम्हारा दरवाजा खटखटाएगी।।
“अगर मैं अपने परिवार के साथ सामंजस्य बिठाता हूं, तो यह सफलता है “
परिवार, परिवेश और परवरिश का बहुत असर पड़ता है व्यक्तित्व पर..!!
जड़ों से जुड़े रहिए, क्योंकि परिवार से अलग होकर इंसान अक्सर मुरझा जाता है.!!
मनुष्य की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसका परिवार है और सबसे बड़ी ताकत भी.!!
परिवार में मौजूद आपसे जलने वाला शख्स..

_ आपसे नफ़रत करने वाले आपके किसी दुश्मन से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है.!!
परिवार एक ऐसा अनमोल उपहार है,

_ ज़्यादातर कार्य हम अपनी ज़िन्दगी में अपने परिवार की ख़ुशी और भलाई के लिए करते हैं,
_ इसलिए आपसी तालमेल और रिश्तों में मिठास लाना एवं रखना बहुत ही अनिवार्य है.
दुनिया मे लोग कचरे की तरह बिखरे पड़े हैं, सबकी ज़िंदगी मुट्ठी में रेत के तरह फिसल रही है,

_ जब स्वयं दुःख में हो तो किसी और को कोई कितना रोये और कितना किसी को चुप कराए,
_ हम अपना दुःख किसी को कह नही पा रहे, क्यूंकि सामने वाला हमसे ज्यादा दुःख में है…!
_ किसी अपने के जाने के बाद दो ही चीजें होती हैं,
_ या तो हर बात से फर्क पड़ना बंद हो जाता है या बाकी बचे लोगों के लिए और ज्यादा प्रेम और उन्हें खोने का और भी ज्यादा डर मन में भर जाता है, खैर !…
_ सब पहले जैसा तो कभी नही होगा.. पर कम से कम अपने परिवार और अपने लोगो की कदर कीजिये, क्योंकि यहाँ अमर कोई नही रहता…!!
— इसलिए जिसको भी जो मन का करना है या कहना है सब कर लो, कितने पल बाकी हैं, इस जीवन के,
_ न आपको पता है न किसी और को, बस ज़िन्दगी वो है.. जो अभी हम जी रहे हैं,
_ कल सब सही होगा के इंतज़ार में कितना इंतज़ार करोगे,
_ मरने वालो के लिए लोग उतने दिन ही रोते हैं.. जितने दिन का लगाव था..
_ उसके बाद सब भूल जाते हैं…!
अब लोगों का जीवन जीना बहुत कठिन हो गया है,

_ किसी को किसी से किसी भी प्रकार का कोई भी मतलब नहीं है,
_ जबान तो लोगों की इतनी खराब हो चुकी है कि ये भी पता नहीं.. ये बात बोलनी चाहिए की नहीं..
_ हालात दिनों दिन खराब हो रहे परिवारों में, ज्यादातर किसी की किसी के साथ नहीं बन रही है.!!
किसी घर में एक साथ रहना परिवार नहीं कहलाता… बल्कि एक साथ जीना,

_ एक दूसरे को समझना और एक दूसरे की परवाह करना परिवार कहलाता है..

बिना समझ के परिवार दिशाहीन होकर, सदस्यों के पतन का कारण बनता है,

_ इसलिए परिवार में हमेशा एक- दूसरे को समझने को प्रधानता दें.

दूसरों की बातों व रिश्तेदारों को महत्ता देने वाला परिवार धीरे धीरे अपने निजी सदस्यों के बीच संबंध को खराब कर लेता है, _

_ जिससे परिवार की वृद्धि असंभव हो जाती है.

जड़ों से जुड़े रहना जरुरी है….

_ परिवार के साथ हैं तो तनाव से दूर और खुश रहेंगे.

इक ज़माना था कि परिवार में सब एक जगह रहते थे,

_ और अब ‘कोई कहीं’ ‘कोई कहीं’ रहता है..!!

अपने काम और परिवार के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखें.

_ कार्य और परिवार दोनों बहुत जरुरी है लेकिन हम जो भी करते हैं, वह परिवार के लिए ही करते हैं.

_ सो, कार्य महत्त्वपूर्ण है, लेकिन परिवार उस से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.

खुशहाल परिवार की पहचान :-

_ जिस परिवार के सदस्यों में एक-दूसरे पर भरोसा, आपसी प्रेम और आदर का भाव हो,

_ वह परिवार सबसे खुशहाल परिवार कहलाया जाएगा.

आपका परिवार कितना अमीर है, ये मायने नहीं रखता ;

_ आपका परिवार कितना खुश है, ये बहुत मायने रखता है..

परिवार ही एक पवित्र बंधन हुआ करता था,_

_ ख़ैर ! दुःख होता है की आज प्रगतिशील समाज में रिश्तों का कोई मूल्य नहीं है…!!!

अब तो हम सिर्फ अपना घर-परिवार को संभालकर रख ले ..ये ही बड़ी बात है;

_किसी दूसरे को सही बात बोलने से ..वो आप को ही गलत साबित कर देगा.

जीवन मे सब ठीक ही था बस पारिवारिक वातावरण के अलावा,

_ किसी और के जीवन का निर्णय कोई और ले रहा था !!

घर परिवार के नाटक चलते रहेंगे,  आप अपने काम पर ध्यान दो,

_ परिवार के सदस्यों को अपने नाकामी का कारण मत बनने दो..!!

जब आपके पास एक परिवार होता है, तो ज़िंदगी सिर्फ आपकी नहीं रह जाती.

_ आपके फ़ैसलों की गूंज उन ज़िंदगियों तक पहुँचती है, जो आप पर सबसे ज़्यादा भरोसा करती है.
_ आप अपने समय को लापरवाही से नहीं बिता सकते,
_ अपनी बातों को हल्के में नहीं ले सकते या अपने फ़ैसलों में खुदगर्ज़ नहीं हो सकते,
_ क्योंकि आपकी हर एक हरकत उन दिलों को प्रभावित करती है — जो आपको “अपना घर” मानते हैं.
_ माता-पिता या जीवनसाथी होना सिर्फ एक भूमिका नहीं है… ये एक ज़िम्मेदारी है.
_ आप एक सुरक्षित जगह हैं, एक सहारा हैं, एक मिसाल हैं.
_ जब ज़िंदगी मुश्किल हो जाए, तो आपके पास हार मानने की लग्ज़री नहीं होती.
_ आप अकेले नहीं जी सकते.. जब मासूम आँखें आपको देख रही हों — सीखने के लिए, समझने के लिए.
_ आप आधे मन से और पूरे बहानों के साथ परिवार नहीं पाल सकते.
_ इसलिए पूरा साथ दो, ज़मीन से जुड़े रहो..
_ अपनी शांति की रक्षा करो — पर कभी उन लोगों की कीमत पर नहीं,
जो सब कुछ छोड़कर सिर्फ आपके पास रहना चाहते हैं.
_ क्योंकि जब आपके पास एक परिवार होता है, तो आपकी विरासत आपकी कामयाबी से नहीं बनती…
_ बल्कि इस बात से बनती है कि आपने उन लोगों से कितना सच्चा और गहराई से प्यार किया, जिनसे आपने कभी न छोड़ने का वादा किया था.!!
यदि हम संयमित और संतुलित जीवन जीते हैं तो हमसे जुड़े लोगों पर, हमारे परिवार पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

_ इसके अवसर बहुत कम होते हैं कि हमसे किसी को दुख मिले..
_ जीवन सामान्य गति से शांतिपूर्वक चलता है.. लेकिन प्रायः ऐसा नहीं हो पाता.
_ परिवार में किसी एक की भी मनमर्ज़ी और मनमौजीपन सबके सुखों में आग लगा देता है.!!
– Manika Mohini
संयुक्त परिवार में रहकर खुश रहना अब गुजरे जमाने की बात हो गई है,

_ संयुक्त परिवार में रहना मतलब जो इंसान कमाता है उसे पूरा निचोड़ लेना, फिर जैसे ही वो कमाना बंद कर दे उसे अलग कर देना,
_ एक मेहनती इंसान अपनी जिंदगी का prime time संयुक्त परिवार को देकर आखिर में कुछ नहीं पाता है,
_ इसलिए बेहतर है अलग रहे और खुश रहे.
_ रिश्ते भी बचे रहेंगे और खुदकी मानसिक शांति.
नोट: joint family में दिक्कत इसलिए होती है, क्योंकि इसमें कमाने वाला एक होता है बाकी सब बैठ कर खाने वाले होते है,
_ सब कमाए तो कोई दिक्कत ना हो.. पर जब एक ही कमाए तो फिर उसे एक ना एक दिन दिक्कत होगी.
_ और देखा जाए तो अधिकतर परिवार में कमाने वाला इंसान अपने माता पिता का लाडला ना होकर नालायक इंसान अपने माता पिता का लाडला होता है..
अब इसकी वजह तो माता पिता ही जाने.!!
– कमांडो ध्रुव

सुविचार – परिश्रम – मेहनत – 046

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आखिर मेहनत कितनी करे इंसान ?

_ समस्याओं का स्वरूप बढ़ता जा रहा है,_ और सबके ख़्वाब ऊँचे होते जा रहे हैं..!!

“क्यों होता है ऐसे ?” एक इंसान मेहनत करके, काम करके इज्जत से रोटी खाना चाहता है, लेकिन उसे काम नहीं मिलता और कितने कामचोर हर तरफ़ नौकरियाँ पकड़ कर बैठे हैं ;

_ अब ऐसे हालत में इंसान फिर भीख मांगने को मजबूर हो जाता है या फिर ग़लत कदम उठाने को !!
स्वयं को कार्य में लगाएं रखें जीवन में, बिना परिश्रम के कोई भी सामर्थ्यवान नहीं होता है.

_ भूमि अगर उर्वरा भी है फिर भी उसमे बिना खेती के अच्छी फसल पैदा नहीं हो सकती है.

जो केवल मांगता है, उसे नहीं मिलता; लेकिन जो सच्ची मेहनत करता है,

उसे एक दिन इतना मिलता है कि वो संभाल भी नहीं पाता.

हम लोग ज़्यादातर मजबूरी की आड़ मे बहानेबाज हैं _ और जो मेहनती हैं ;

_वो वाकई मे बिना किसी की मदद लिए _खुद ही अच्छे से सेटेल हैं..

अपनी मेहनत की एक सूखी रोटी का स्वाद औरो के छप्पन भोगों से कहीं ज़्यादा मीठा होता है ;

_ वैसे ही अपने घर का सुख किसी भी महल में रहने से ज्यादा सुखकर होता है.!!
मेहनत करने वाला इंसान ढिंढोरा नहीं पिटता, _

_ परन्तु वह मौन होकर एकांत में पुस्तकों के साथ अपना समय व्यतीत करता है….!!!!!

जीवन में कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता ; दूसरों का एहसान लेने से बेहतर है कि _

_ अपनी काबिलियत से मुकाम हासिल करें ,, _ ” विश्वास करें आप काबिल हैं “

सजती नहीं कामयाबी कभी ज़माने के बाज़ारो मे _

_ मोके हथियाना पड़ते हैं लगा कर दाव मेहनत का…!

“जो लगन से परिश्रम करता है, उसे कभी निराशा नहीं होती;

_क्योंकि सब कुछ परिश्रम से पूरा होता है.”

#अपनी_मेहनत # के_पसीने_में # इस_तरह_भीग_जाओ_

_ कि #गर्म_हवा_भी # ठंडी_लगने_लगे..

जिन्हें पुरखों से दौलत मिली हो, वो क्या जाने मेहनत का नशा,

_ ज़िन्दगी वो नहीं.. जो अपने पुरखों पर जी जाए.!!

सच्चा धन वो है जो मेहनत से कमाया जाए..
_ क्योंकि विरासत और पुरखों से आया धन सिर्फ़ घमंड बढ़ाता है, सम्मान नहीं.!!
कल को आसान बनाने के लिए..आज आप को कड़ी …मेहनत करनी पड़ेगी.!!

_ वक्त पर की गई मेहनत आज़ादी देती है, और आलस ज़िंदगी भर दूसरों का बोझ उठवाता है.!!

मेहनती आदमी भी विनाश ला सकता है, _ ऐसा कहा जाता है, कि जितना ज्यादा काम करोगे, उतना ज्यादा फ़ायदा होगा ;

_ पर जीवन ये बताता है कि मनुष्य की बहुत काम करने की आदत ने, मनुष्य जाति को बरबाद करके रखा हुआ है ;

_ बिना सोचे समझे काम करते रहना भी विनाश ही लाता है.

यदि आप स्वयं अपने सपनों के लिए कड़ी मेहनत नहीं करते हैं,

_ तो आप दूसरों से इसकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं.!!

ये संसार का नियम है कि _ किसी काम के लिये सबसे अधिक मेहनत करने वाला व्यक्ति _ आखिर हाशिये पर धकेल दिया जाता है..!!
मेहनत करने के बाद चेहरे पर जो संतुष्टि एवमं थकान एक साथ आती है न…

_ बस यही चहिए जीवन में… जो करूँ, उसमें जान लगा दूँ…!!!

जिस चीज को खुद की मेहनत से पा सकते हो,

_उसके लिए दूसरों के आगे हाथ क्यों फैलाना ?

मेहनत की कमाई खाने वालों का दिवाला नहीं निकलता, _

_ दिवाला उन्हीं का निकलता है जो दूसरों की कमाई खा जाते हैं ..

जीवन में केवल वे ही लोग कड़ी मेहनत करते हैं.. जो अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं,

_ अन्यथा हर किसी के पास बहाने होते हैं और अच्छे की उम्मीद लगाकर भी हर कोई बैठा है.!!

किसी की सलाह से रास्ते जरूर मिलते हैं…*

*लेकिन मंजिल तो अपनी मेहनत से ही मिलती है…!!!*

खुद की मेहनत से बनिए, ताकि स्वतंत्रता बनी रहे,

_ वरना दूसरों की मदद से हम बस एक तमाशा बनकर रह जाते हैं.!!

मेहनत करने वाले प्रतिभाशाली लोग चालबाजी और धोख़ा नही करते.

_ धोखेबाजी और मक्कारी की जरूरत उन्हे होती है जिनमे कोई काबलियत नही होती.
_ दूसरे की मेहनत पर हाथ साफ करके वो लोग अपनी प्रतिभा की कमी पूरी करने की कोशिश करते हैं.!!
थोड़ी सी ज़रूरत, थोड़ी सी कोशिश, थोड़ी सी मेहनत और थोड़ा सा जोखिम..

_ बस इतना सा साहस ही काफी होता है, अपने अंदर छुपी हुई काबिलियत को सामने लाने के लिए..
_ क्योंकि अक्सर हम कमी टैलेंट की नहीं, बल्कि एक कदम आगे बढ़ने की हिम्मत की वजह से पीछे रह जाते हैं.!!
मेहनत ज़रूरी है, पर उससे भी ज़रूरी है साफ़ इरादा..
_ गलत मकसद के साथ की गई मेहनत कभी सफलता नहीं देती.!!
यदि कड़ी मेहनत आपका हथियार है, तो सफलता आपकी गुलाम हो जाएगी.
सफलता उन्हीं को मिलती है जो ज्ञान और कड़ी मेहनत पर भरोसा रखते हैं.
की गई मेहनत बेकार नहीं जाती, ठीक वैसे ही जैसे बूंद – बूंद का महत्व होता है.
अगर कुछ पाना है तो पहले मेहनत करनी होगी, पैसा बैठकर सोचने से नहीं आता.!!
दुनिया को जवाब अपनी बातों से नहीं, अपने काम से दो..

_ याद रखना… खामोश मेहनत का शोर सबसे गहरा होता है.!!

दूसरों को नीचा दिखाने में वक्त बर्बाद मत करो ;

_ असली खुशी तब मिलती है जब आप अपनी मेहनत से खुद को बेहतर इंसान बनाते हैं.!!

यदि हम चाहते हैं कि दूसरे हमें कंधे पर लेकर नाचें, तो हमें बहुत अधिक मेहनत करनी होगी.
हमारे सपने, विचार या प्लान जो भी हों, हम एक बीज बोते हैं, उसका पोषण करते हैं.

– और फिर अपने परिश्रम का फल पाते हैं.

उजलापन यूं ही नहीं आता चेहरे पर..
_ सपने बुनने में भी मेहनत करनी होती है खोपड़ी को.!!
जरा गौर कीजिए..

_ ये जो आज है, इसमें कुछ न कुछ ऐसा जरूर मिलेगा, जो कभी आपने चाहा था..

_ मेहनत कीजिए, भरोसा रखिए, वो सुनता है..!!

जो सच में अपना काम करता है, वो जानता है कि मेहनत शोर नहीं करती.
_शोर सिर्फ वो करता है, जो उस मेहनत के पास से गुज़रा भी नहीं होता.!!
अपनी तरक्की का शोर नहीं, सिर्फ मेहनत का असर दिखना चाहिए.

_ खामोश नींव ही मज़बूत और स्थाई इमारतों का राज़ होती है ; शोर तो सिर्फ ऊपर का तमाशा है.!!
सफलता की एक सबसे अच्छी बात ये है कि यह मेहनत करने वालों पे फिदा हो जाती है..!!!”
मेहनत करने और कठिनाइयों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहें.
काम की समाप्ति यदि संतोषजनक हो, तो परिश्रम की थकान याद नहीं रहती.!!
जिन लोगों को संपत्ति विरासत में मिली है, उन्हें मेहनत का तजुर्बा नहीं होता !!
बड़ी आसानी से जिन्हें सब मिल जाता है.. फिर उसे संभालने की मेहनत कौन करे.!!
अगर ज़िन्दगी बेरंग है तो मेहनत करो, _ मेहनत हमेशा रंग लाती है !!
एकांत में कठिन परिश्रम करो, _ तुम्हारी सफलता शोर मचा देगी.
मुश्किलों पर गौर करो, _ ज़िन्दगी कुछ सिखाना चाहती है !!
मेहनत करके जो खाता है, _ वही असल इंसान कहलाता है..
मेहनत के बगैर कामयाबी और खुशी की उम्मीद मत रखो.
कभी-कभी हम अपने काम में मेहनत, समय और पूरी जिम्मेदारी दे देते हैं.

_ हर चीज़ पूरी ईमानदारी से निभाते हैं, बिना कोई कमी छोड़े..
_ फिर भी जब बदले में उतना नहीं मिलता, जितना मिलना चाहिए,
_ तो दिल के अंदर एक खामोश सा सवाल उठता है, आख़िर कमी कहाँ रह गई.!!
जिंदगी में जिसने खुद कभी मेहनत नहीं की, जिसने अपने हिस्से का पसीना नहीं बहाया, वही लोग सबसे ज़्यादा शिकायतों का पुलिंदा लेकर घूमते हैं.

_ इनके पास न कोई काम होता है, न कोई पहचान..- बस दूसरों की तरक्की पर उंगलियाँ उठाने का हुनर होता है.
_ झूठ इनके लिए सहारा नहीं, रोज़मर्रा की आदत है..
_ सच बोलना इन्हें उतना ही भारी लगता है.. जितना आईने में अपनी शक्ल देखना.
_ हर नाकामी का ठीकरा ये हालात पर फोड़ते हैं, हर सफलता में इन्हें साज़िश दिखती है.
_ खुद ने कभी जोखिम नहीं लिया, मगर दूसरों के फैसलों पर ज्ञान बाँटेंगे.. जैसे ज़िंदगी का ठेका इन्हीं के पास हो.
_ ये लोग शिकायत को अपनी पहचान बना लेते हैं, इनके शब्दों में मेहनत नहीं, जलन टपकती है, इनके तर्कों में सच्चाई नहीं, बहाने भरे होते हैं.
_ जो आगे बढ़ा, वो इनके लिए “गलत तरीके से” बढ़ा.. जो गिरा, वो “किस्मत का मारा” और खुद ? खुद हमेशा निर्दोष !!
_ सच तो ये है कि आलस की चादर ओढ़कर बैठे लोग जब समय की दौड़ में पीछे छूटते हैं, तो झूठ और शिकायत ही उनकी लाठी बन जाती है.
_ मेरा कहना सीधा है काम करो, परिणाम बोलेंगे.. वरना शिकायतें लिखने से इतिहास नहीं बनता, सिर्फ़ खुद की बेइज़्ज़ती दर्ज होती है.!!
– लेखक की दुनिया

सुविचार – Simple – सादगी – सहज – सहजता – सरल – सरलता – सामान्य – शालीन – शालीनता – मौलिक – मौलिकता – साधारण – साधारण जीवन – 045 *

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“सरल जीवन एक प्रामाणिक जीवन है.”

“The simple life is an authentic life.” – Kilroy J. Oldster

विचार जितना उच्च हो, उसको जीने के लिए उतने ही साधारण जीवन की जरुरत होती है.

_ इसीलिए ही तो कहा जाता है, ” सादा जीवन….उच्च विचार “

जीवन क्या है ?

जीवन को बेहतर समझने के लिए तीन स्थान हैं :
– अस्पताल
– जेल
– श्मशान
_ अस्पताल में आप समझेंगे कि स्वास्थ्य से अच्छा कुछ नहीं है.
_ जेल में आप देखेंगे कि आज़ादी कितनी अमूल्य है.
_ और श्मशान में आपको एहसास होगा कि जीवन कुछ भी नहीं है.
— आज हम जिस ज़मीन पर चल रहे हैं, वह कल हमारी नहीं होगी.!!
“जहाँ सादगी बसती है, वहीं मन को सच्चा सुकून मिलता है”

_ एक शांत, सरल, सहज जीवन से बड़ी लक्जरी और कुछ नहीं है..!!

जीवन सरल है..- इसे अधिक जटिल बनाना केवल अतिचिंतन कहलाता है.!!
वास्तविक जीवन सरल है, अनुभवों से भरपूर है, पृष्ठभूमि [background] में मुझे संगीत के रूप में केवल प्रकृति की ध्वनि ही सुनाई देती है.
जागो और जीवन को देखो, सरलता अपने आप आ जायेगी.. _ इसे आयोजित न करें.

_ आयोजित सरलता…सरलता नहीं रह जाती.!!

सदा मौलिकता के साथ जीवन जीएँ,

_ क्योंकि उसके साथ आप बहुत सहजता से जी पाते हैं,
__ सहजता, मौलिकता की दोस्त है.
_ अगर कोई ईमानदारी से जीना शुरू करे और उस जीवन को जीने की कोशिश करता रहे.. जिसे वह जीना चाहता है ;
_ एक दिन, हम खुद को उस जीवन के सामने खड़ा पाएंगे, जिसे हम जीना चाहते हैं.
_ हमारा जीवन जितना सरल होगा, हमारे आसपास की दुनिया उतनी ही सरल हो जाएगी ;
_ सादगी से प्रकृति और अपने आसपास के लोगों को समझना आसान हो जाता है.
_ “दुनिया तभी जटिल है जब हम जटिल हैं”
_ “सादगी का असली उपहार यह है कि _यह हमें मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए जगह देती है.”
_ “एक सरल जीवन शरीर और दिमाग के लिए अच्छा है.”
अगर कुछ जानना है तो मौन को पढ़ो.. और अगर खूबसूरती देखनी है तो सादगी में ढूंढो..

_ ये कभी निराश नहीं करते..!!
जो लोग सच्चे और सरल जीवन की तलाश में होते हैं,

_ वो जीवन से सच्चे होकर ही उसे पा सकते हैं..!!

आदमी को कितने दिन इस धरती पर रहना होता है.

_ वो सरल, सहज क्यों नहीं जी सकता.!!

सादगी के गुणों को अपना कर आप यह मान सकते हैं कि..

_ आपके पास वह सब कुछ है ‘जो आप चाहते हैँ’

सामान्य जीवन जीना कोई अपराध नही है.

_ इस दुनिया में अधिकतर लोग सामान्य जीवन ही जी रहे हैं ..जिसमें कुछ भी बुराई नहीं है..!!

सबसे सुंदर चीजें हमेशा साधारण होती हैं,

_ आप साधारण चीजों से किसी को विशेष महसूस करवा सकते हैं..!!

हमें अपनी मौलिकता को सर्वोपरि स्थान देना चाहिए,

_ नहीं तो दुनिया हमें अपने इशारों पर ही नचाती रहेगी.!!

हमारी जरूरतें बहुत ज़रा सी हैं, जीवन बहुत सहज और सरल है,

_एक बार इस सहजता और सरलता को महसूस कीजिए,
_ हवा के साथ बहना सीखिए, पंछियों के साथ गीत गाना सीखिए,
_ ज़मीन पर नंगे पाँव चलते हुए महसूस कीजिए कि आप संपूर्ण धरा हैं,
_ आप जितना हैं, उतने में स्वयं को पूरा मानना आज़ादी है,
_ आज़ादी रूह की, ” सोने के पिंजड़े से..”
कई बार हमारी होशियारी ही हम पर भारी पड़ जाती है, क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा होशियार होना.. हमें सरल रास्तों पर चलने नहीं देता.

_ हम हर निर्णय में सौ तर्क ढूंढते हैं, हर कदम से पहले दस बार रुकते हैं,
_ और इसी चक्कर में वो मौके खो देते हैं.. जो शायद सिर्फ एक सहज कदम उठाने से मिल सकते थे.!!
जीवन जितनी सरलता से जिया जाय और जितना खामोश जीवन हो,
_ उतना ही वह आंतरिक रूप से समृद्ध होता है.!
एक वक्त बाद मन नही चाहता कि सबकुछ ठीक हो,

_ जो जैसा हो गया वैसा बरकरार रहे, इसमे भी मन अपनी सहजता खोज लेता है.!!

अनाज, साफ़ हवा, साफ पानी यह मनुष्य कि मूल जरुरत हैं,

_हम इनसे दूर रह कर तरक्की तो कर रहे हैं, पर अपनी जान की क़ीमत पर..

आप वास्तविक और सरल रहो,

_ वरना भीतर से बिलकुल खाली और खोखले हो जाओगे.!!

सादगी से महंगा कोई गहना नहीं शायद,

इसलिए हर किसी ने इसे पहना नहीं…

जीवन के अनगिनत रंग केवल सादगी में ही हैं,

_किसी प्रकार की चमक-दमक में नहीं.!!
हम जीवन की सहजता की ओर नहीं,

_खोखलेपन की ओर बढ़ रहे हैं..!!

पवित्रता वा सादगी, ऐसे पंख जहान,

_ जो भरवा सकते तुम्हें, ऊंची बहुत उड़ान..

क्यों जिंदगी को इतना उलझा कर रखते हो,

सादगी में रहा करो और सादगी से जीते रहो.

सादगी में जीना और जीने में सादगी, _

_ बस यही अदा तो मुझे आपसे जोड़ती है..

कोई भी व्यक्ति बड़ा सरल, सादा जीवन जी सकता है

और उस से आनन्दित हो सकता है.

जीवन सरल भी हो सकता है और कठिन भी,

_ और यह सब खुद पर निर्भर है..!!

सीधी- सरल जिंदगी के दुख मिटाने की बात नहीं,

_ सब इधर-उधर दुनिया भर की फिजूल बातें करते हैं.!!

मकसद जीवन का स्पष्ट हो, सरल हो…

_ये ढोंग, ये आडंबर, ये कुटिलताएं, घमंड…सब धरा रह जाएगा.

जो लोग सहज होते हैं और सादगी से जीवन यापन करते हैं,

_ बड़े बोल नहीं बोलते, वही असली ज्ञानी हैं..!!

जिस तरह सादगी की सुंदरता हर कोई नही समझता,

वैसे ही जिंदगी को जीने का सही तरीका हर कोई नहीं जानता.

महानता सादगी में है, जो सत्य है उसके साथ जीवन को जीना एक कला है.

_”आदमी अचंभित होता है सादगी से, प्रदर्शन से नहीं”

एक सरल आदमी व्यवस्था के अनुसार चलना पसंद करता है ;

_ और एक चतुर आदमी अपनी इच्छानुसार चलना पसंद करता है !!

दिखावा करने से भले ही शरीर की खूबसूरती बढ़ जाए,

पर सादगी में रहने से व्यक्तित्व की खूबसूरती बढ़ती है.

सरलता से ही किसी को पढ़ा और समझा जाता है,

__ जटिलता समझाती कम और उलझाती ज्यादा है..!!

सजना, संवरना तो बनावट की सुंदरताएँ हैं.!

_ मौलिकता के अपने कई खूबसूरत गुण हैं..!!

“सादगी भी अजीब पर्दा है, मैं किसी को नज़र नहीं आता..!!”

_ किसी को तो रास आऊंगा मैं भी, कोई तो ” सादगी ” पसंद होगा..!!!

सोच ही इंसान की होती है सबसे कीमती,

इसलिए आपकी उस सोच में नजरिया सादगी का कुछ खास होना चाहिए.

हमने सरलता से कुटिल होना चुन लिया है,
_ यूँ कि अब सरलता उपहास की विषयवस्तु है और कुटिलता गर्व की.!!
अगर साधारण जीवन जीते हैं तो अपने ही त्रुटियाँ निकालते हैँ,

__ अगर असाधारण जीवन जीते हैँ तो अपने ही ईर्ष्या करतें हैँ..
_”जिन्हें सादगी पसंद रही, मिले उन्हें सबसे ज्यादा दिखावटी और बनावटी लोग..!!”
यह भी एक विडंबना है कि जब आप लोगों के साथ सरल और स्वाभाविक व्यवहार करते हैं, तो वे आपका महत्व नहीं समझते.

_ वो अहमियत तब समझते हैं जब आप जटिल हो जाते हो.. यहां कद्र उसी चीज़ की होती है जो उनकी पहुंच से दूर हो..!!

“आप जितने सहज रहेंगे, उतने ही खुश रहेंगे”

_ आप जितना खुश रहेंगे, उतने ही स्वस्थ और सुंदर दिखेंगे.
_ अगर आप अपने दिल की सुनेंगे तो हमेशा खुश रहेंगे.
_ अगर आप अपने दिल की सुनेंगे तो रब का संदेश आप तक पहुंचता रहेगा.
_ आप प्रकृति को आत्मसात करने में सक्षम होंगे.
जीवन अपनी सादगी के कारण ही कठिन है ;

_ इसमें भव्यता की कुछ ही चीजें हैं जो हमारे लिए उपयुक्त नहीं हैं.

जीवन की वास्तविकता अक्सर लोगों को चुभती है, पर हर किसी में वो ताकत नहीं होती.. जो सच्चाई- सरलता को पचा पाए..!

_ इसलिए झूठे मीठे लाल लपेट बातों को पसंद करने वाले हकीकत झेल नहीं पाते.!!
आधुनिकता ने जीवन को आसान बनाया, पर सोच को उधार का बना दिया.

_ अब बातचीत अनुभव से नहीं, पोस्ट और वीडियो की प्रतिध्वनि से होती है.
_ मौलिकता चुपचाप पीछे छूट रही है, और सुविधा के बदले इंसान भीतर से
थोड़ा और नीरस, थोड़ा और खाली होता जा रहा है.!!
हमारी ज़िंदगी में ऐसा होता है – जो इंसान या जो आदत हमें सबसे मामूली लगती है, असल में वही हमारी लाइफ का सबसे बड़ा संतुलन संभाल रही होती है.

_ सच बात तो यह है कि छोटी-छोटी चीज़ों में ही सबसे बड़े राज छुपे होते हैं.
_ हमें बस उन्हें सही नज़रिए से देखने की ज़रूरत है.!!
परिपक्वता सरल होने में है, _ लेकिन दुर्भाग्य से इस दुनिया का सबसे जटिल काम सरल होना ही है..
शालीनता के साथ जीवन जीने से जीवन को सार्थक दिशा मिलती है, जीवन के मायने और शिक्षा समझ आती है.!!
आपके व्यवहार में जितनी सादगी और स्वालंबन होगा, लोग आप के उतने ही करीब आयेंगे.
हर समझदार, कलात्मक और बुद्धिमान व्यक्ति सादगी से ही रहना पसन्द करते हैं.
ज़िंदगी को बहुत सहज और सरल होना था, _पर रूढ़ियों ने इसे जटिल बनाकर रख दिया है..
सहज होना कठिन नहीं होता, “आसान है” _लेकिन यह बात कई लोगों को समझ में नहीं आती.
सादगी-सरलता को छोड़ कर अप्राकृतिक जीवन और पाखंड ही सारी समस्याओं की जड़ है..!!
सादगी की भी अपनी जगह होती है, _ खोखले नक़ाब इसपे चढ़ते ही नहीं हैँ.
सादगी और सत्य में एक ही समानता है , दोनों को सजाने की जरूरत नहीं होती ..!!
सादगी में बहुत सुंदरता है, _ जो चीज सादी है, _ वही सत्य के नजदीक है..
सब कुछ जानते हुए बहुत मुश्किल है साधारण व्यक्ति की तरह रहना.!!
“सच्ची खुशियाँ रफ्तार में नहीं, सादगी और शांति में छुपी होती हैं”
‘सच्चा- सरल आदमी’ गलत जगह एडजस्ट नहीं हो सकता.!!
सादगी और सरलता हमारी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है.!!
भीतर ठहराव आ जाता है तो, बाहर गति में भी सहजता आ जाती है.
अगर ख़यालात में गहराई हो तो, क़िरदार में सादगी आ ही जाती है.
जीवन में सबसे कठिन काम है, सादगी और आसानी से जीना..!!
हमें यह नहीं मालूम कि हमारा साधारण होना, सहज होना, सरल होना, शांत होना ही अपने आप मे बहुत असाधारण है.

_ अनमोल थे वो सभी में जो सहज जीवन जीते हुए अपने निश्छल प्रेम में तिरस्कार-अपमान पाकर भी, बिना कोई दुर्व्यवहार किये अपने सर्वप्रिय के जीवन से अदृश्य हो गए..!!

सहजता, सरलता और सादगी से भरा सफर तय करना है तो, कभी-कभार ठोकरों से, मुलाक़ात भी जरूरी होती है.
जो लोग सादगी में रहते है वो लोगो की बुरी बातों का भी नकारात्मक अर्थ नही निकालते,

_ बल्कि सकारात्मकता से अपने जीवन में लागू करते है और यही बात उनको सबसे बेहतर बनाती है.

हैसियत का परिचय तब देना चाहिए, जब बात आत्मसम्मान की हो..

_ वरना सादगी ही सबसे बड़ा परिचय होता है.!

यह ज़िंदगी की भागमभाग, यह उठापटक, यह महान और अमर होने की कोशिशें छोड़कर _ यदि हम बस जीवन को सहज रूप में जिएं, बाहर की ओर निहारने के बजाय भीतर में झांकें, भूत भविष्य की चिंता, दुश्चिंता के बजाय _ वर्तमान को सुंदर, क्रियाशील और सार्थक बनाएं _तो शायद जीवन ज़्यादा उपयोगी होगा…

मामूली-सरल-सहज इंसान होना, मामूली ज़िंदगी जीना और चुपचाप इस दुनिया से चले जाना _इतना भी मामूली नहीं होता जानां…

कुछ लोगों के लिए किसी का सरल और सच्चा मन कोई मायने नहीं रखता,

_ वे अक्सर उसी इंसान को सबसे ज़्यादा ठेस पहुँचाते हैं.. जो बिना किसी छल के उनके साथ खड़ा रहता है.
_ शायद इसलिए इस दुनिया में मासूमियत सबसे खूबसूरत होकर भी सबसे ज़्यादा अनदेखी रह जाती है.!!
सरल जीवन जीने वाले लोगों की आवश्यकताएं सीमित होती हैं,

_ वे प्रकृति के सहयोग से अपना जीवनयापन करते हैं, मस्त रहते हैं..

.. जबकि आधुनिक दुनिया जीवन की विभिन्न समस्याओं से घिरी हुई है, त्रस्त है.!!

सादगी से जिएं ताकि अन्य लोग भी आसानी से जी सकें _और केवल वही लें _जो आपको चाहिए _और बाकी छोड़ दें.
कभी किसी की सादगी का मज़ाक ना उड़ाना,

सादगी में रहने वाले ज्यादातर लोग दिल के सच्चे होते हैं.

जीवन उलझा हुआ नहीं है, हम उलझे हुए हैं ;

सादगी से जीना ही असली जीवन है.

कोशिश किया करो खुद को दूसरों से अलग बनाने की,

तभी तो आप सादगी को अपनाने का प्रयास करोगे.

जिस दिन सादगी श्रृंगार हो जाएगी,

उस दिन आइनों की हार हो जाएगी.

सादगी जब ” सरलता ” का श्रृंगार कर लेती है,

” सहजता ” उपलब्ध हो जाती है.

सहजता सुंदर से सुंदरतम सौन्दर्य है,

सहजता में अनमोल गुणों का सामंजस्य समाहित होता है.

सरल अगर हम हैं तो कोई मुश्किल नहीं,

लेकिन अगर सरल रहने की एक्टिंग करते हैं, तो फिर बड़ी मुसीबत हो जाती है.

जिंदगी की कुछ खास बातों को आप सादगी में रह कर ही जान सकते हैं,

और उन्हीं बातों से आप अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं.

एक उम्र गुजारनी पड़ती है, तब समझ आता है कि जीवन में थोड़ा कड़वा और सख्त लहजा रखना क्यों बहुत जरूरी है..

_ वरना दुनिया हमारी सादगी का फायदा उठाने के लिए, हमारी कोमलता को कमजोरी समझने के लिए पहले से ही तैयार बैठी है.!!
सादगी वो नही जो सिर्फ गरीबी में दिखाई जाए, बल्कि सादगी तो उन लोगो की होती है,

_ जो अमीर भले कितने हो जाए पर उनकी सादगी हमेशा बरकरार रहती है.

सादगी को ध्यान में रख कर अपनी दिनचर्या में शामिल करें,

यह एक सहज कदम होगा.

जिंदगी को खास बनाने की प्रेरणा अगर चाहिए तो उन लोगों से लीजिए,

जो अमीर होने के बाद भी सादगी में रहना पसंद करते हैं.

साधारण जीवन जीना असाधारण कला है, _ जो सबके बस की बात नहीं है..
एक सादगी भरा व्‍यक्‍ति जान लेता है कि ” प्रसन्‍नता ” जीवन का स्‍वभाव है.
सादगी में बहुत सुंदरता है, _ जो चीज सादी है_ वह सत्य के नजदीक है.
मशहूर मत हो गलत बोल कर _ लोग तेरी सादगी को भी पसंद करते हैं..
माना सादगी का दौर नहीं, _ मगर सादगी से अच्छा कुछ और नहीं ..!!!
सादा व सरल जीवन जीएं, जीवन में गुणवत्ता पर विश्वास रखें, दिखावे से बचें.
सादगी से जीना और कर्ज से दूर रहना, _बड़ी जिंदगी जीने और पैसा उधार लेने से बेहतर है..
तर्क आपको जटिल बनाता है, सरलता आपको भ्रम में नहीं डालती, यह आपको स्पष्ट रखती है.
इस जटिल दुनिया में सरल, सहज और ज़िम्मेदार होना इतना भी मुश्किल काम नहीं है..
सरल और सहज रहने से हमें हर वो चीज मिल जाती है, जो हमें चाहिए !!
कारण ढूंढने निकलोगे तो उलझोगे, जो हो रहा है सहज भाव से होने दो..!!
कठोरता मनुष्य की शक्ति नहीं _ शक्ति तो सदा सरलता है !!
जीवन” जितना सादा रहेगा…, “तनाव” उतना ही आधा रहेगा.
सहज जीवन ही संतुलित और व्यवस्थित होता है.
महान व्यक्तित्व सादगी से भरपूर होता है.
सरल होना ” साधारण ” होना नहीं है…
सरलता प्रकृति का सार है.
सीधासादा जीवन, संतोष की प्रवृत्ति और बुद्धि के बल पर धनसंपदा की महत्वकांछा रखते हुए आगे बढ़ें, _ अवश्य सुख व समृद्धि दोनों ही मिलेंगे.
* जीवन की सारी दौड़ * * केवल अतिरिक्त के लिए है !*

* अतिरिक्त पैसा, अतिरिक्त पहचान,* *अतिरिक्त शोहरत….अतिरिक्त प्रतिष्ठा !*

*यदि यह अतिरिक्त पाने की * * लालसा ना हो तो ….जीवन * * एकदम सरल है..*

सादा जीवन, उच्च विचार और उच्च कर्म, यही जीवन मंत्र है.

आपके विचार और आपका दूसरों के प्रति बर्ताव ही _ आपको एक सही इंसान का दर्जा देता है.

मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं, _ पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते.

लोग दीवाने हैं बनावट के, हम कहां जाए सादगी लेकर.

_ बनावट के दौर में अक्सर सादगी बदनाम होती है..!!

“मुझे ऐसे लोग बहुत पसंद हैं जो अपने असली रूप-रंग में दिखाई देते हैं”

यदि आप सत्य को खोजना चाहते हैं, तो सरलता को खोजिए.!!
जीवन बेहतर, सुन्दर और सरल होना चाहिए..

_ सादगी और सरलता कमजोरी नहीं, ये ताकत हैं..

“जीवन कठिन है”, ये बोलना तो आसान है, पर जीवन को “सार्थक अर्थ” देकर उसे सहज और “जीने योग्य” बनाना कठिन..!!
हमारी सादगी पर क्या गौर करते हो, हमने सोचा जिंदगी का मज़ा कुछ साधारण लोगो के बीच चलकर लेते हैं,

इसलिए सादगी में हम मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी पसंद से रहते हैं.

यदि आपमें घमंड है, तो बहुत जल्दी आपकी किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाक़ात होने वाली है, जो आपके घमंड को चकनाचूर कर देगा.

_ इसलिए बेहतर यह है कि अपने जीवन को स्वेच्छा से सरल बनाने के लिए हम प्रारंभ से ही सहज रहें. उसके बाद तो जीवन का उत्सव बनना तय है.

अगर रहना है ऐश ओ आराम में तो रहो इस तरह कि लोगो को महसूस ना होने पाए,

और सादगी में इस तरह रहो कि हर कोई तुम्हारे जैसा बनना चाहे.

इंसान बुरा पैसो के आने से नहीं बल्कि घमंडी होने से बनता है,

इसलिए घमंड की बदबू में रहने से बेहतर है कि आप सादगी की महक में रहें.

इतनी भी सादगी से ना मिला करो सबसे, _

_ ये दौर अलग है, अब यहाँ लोग अलग हैं..!

चालाकियां नहीं आतीं मुझे, आपको रिझाने की,

_ मेरी सादगी पसंद आए, तो ही बात आगे बढ़ाना ….!!

मुझे.. सुंदरता नही, सहजता आकर्षित करती है.!!

_ वैसे भी सहजता ही सुंदरता है !!

यह सही है कि आदमी के जीवन में बुनियादी ज़रूरतें होती हैं,

_ पर ध्यान रहे, वे ज़रूरतें बुनियादी ही होती हैं, उससे अधिक नहीं.
_ यह मन की सीमा जितनी जल्दी समझ में आ जाए, जीवन आसान हो जाता है.
_ हमें अधिक नहीं सोचना है, सिर्फ इतना सोचना है कि “बहुत हो जाएगा” तो क्या हो जाएगा ?
ऐच्छिक सादगी से तात्पर्य कंजूसी से जीना नहीं है और न सब कुछ छोड़ कर ही जीना है, बल्कि बेकार के खर्चों पर नियंत्रण करना है. सामान कम करना है और कम करते समय स्वयं को पूछना है कि क्या इस सामान की जरुरत है ?

_ तो ज्यादातर जवाब मिलेगा, नहीं…
_ फिर आप बाकी बचे सामान के लिए भी सोचें कि.. क्या उस के बिना आप रह सकते हैं.
_ तब आप और भी सामान कम कर पाएंगे यानी सीधा सा अर्थ है कि ऐच्छिक सादगी अनचाहे खर्चों को कम करना है.
_ ऐच्छिक सादगी अपनाने का अर्थ जीवन को कम से कम वस्तुओं, आवश्यकताओं के साथ व्यवस्थित करने से है.
_ केवल पदार्थवादी व अनआत्मवाद संबंधी जीवन जी कर हम अपने जीवन में अनावश्यक क्लेश घोलते हैं.!!
दुनिया में हर तरह के लोग होते है जिनके जीने का तरीका भी अलग होता है. कुछ लोग सादगी में रहना पसंद करते है कुछ दिखावा करते रहते है और कुछ ऐश ओ आराम में जीना पसंद करते है. माना की जिंदगी ऐश में अमीर लोग ही जी सकते है पर बहुत से अमीर लोग भी अपने जीवन को सादगी में जीना पसंद करते है, इसलिए आपको भी सादगी के महत्व और सुंदरता को समझना चाहिए और कैसे सादगी हमारे जीवन को और बेहतर बना सकती है ये जानना चाहिए,

यहाँ सादगी से हमारा मतलब ये नहीं कि आपको हमेशा ही, जब आप अमीर हो जाए तब भी आपको सादे कपड़े और चीज़े इस्तेमाल करनी चाहिए, बल्कि सादगी से हमारा तात्पर्य आपके स्वभाव और दयालुता से है, मतलब जिस तरह गरीबी में आप लोगो से कोमल स्वाभाव से पेश आते थे, अमीरी में भी आपको वैसे ही आना चाहिए, और अमीरी आने पर अपने अन्दर घमंड की भावना बिलकुल ना आने देना.

अगर आपको लगता है कि सादगी में रहने से दुनिया आपका मज़ाक उड़ाएगी, तो किसने कहा है कि आप उनकी बातों पर ध्यान दो,

_ लोग तो आलोचना उनकी भी करते हैं जो दुनिया में बड़े शान से रहते हैं.

अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है, ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फ़ालतू सपने नहीं देखता और निराश नहीं होता, टूटता नहीं.
अगर कर ही लिया है फैसला जीवन को सादगी से जीने का तो अब बदल न जाना,

क्योंकि दुनिया में लोगो को वक़्त से तेज़ बदलते देखा है हमने..

रंग रूप देख कर इंसान की फितरत का अंदाजा मत लगाना, _

_ अच्छे लोग अक्सर सादगी में ही मिलते हैं ..

” जीने दो जो जैसे जी रहा है इस दुनिया में ” पर याद रहे कि

आपका एक अलग अंदाज़ हो, जिसमें सादगी के साथ खूबसूरती बहुत हो.

सादगी पसंद लोगों को क़ीमती होना चाहिए क्योंकि वे गहराई से प्यार करते हैं और जीवन के बारे में गहराई से सोचते हैँ, _

वे वफादार, ईमानदार और सच्चे होते हैं, साधारण चीजें अक्सर उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है, _

_ उनकी पवित्रता उन्हें बनाती है ” जो वे हैँ “

सरल मन लिए चलते रहिए.. कुछ लोगों के मैला कर देने से आपके विचार आपका स्वभाव मैला नहीं होता..

..आप अपनी जगह सरल व सही रहें, _वह लोग भी मिलेंगे _ जिन पर आप यकीन करोगे..!!

वो एक दिन भी जल्द आएगा,_ जब लोगों का झूठी चकाचौंध से मन भर जायेगा,

तब खोजने निकलेंगे ” सच्ची सादगी,!! “

सादगी और सहजता मेरे स्वयं के चुने हुए साथी हैं, और मुझे गर्व है कि _

_ मैं इस आधुनिकता के नाम पर फूहड़पन की झूठी दौड़ में शामिल नहीं हूं..

“जब मैं खुद से कोई उम्मीद नहीं रखता, तभी मैं अपने असली स्वरूप को सबसे पास से महसूस करता हूँ.”

— लग रहा है, ‘बड़ा होने का सोचना’, यह दिशा ही कितनी गलत है..
_ असल में सादा हो जाने का सोचना चाहिए..
_ बड़ा बनने की चाह अक्सर हमें बोझिल और जटिल बना देती है.
_ जीवन का असली सौंदर्य सादगी में है—जहाँ न कोई दिखावा है, न कोई दौड़.
_ सादा हो जाना ही वह गहराई है, जहाँ मन शांति और अपनापन पा लेता है.
“मैं अपने भीतर सादगी के बीज बो रहा हूँ—बड़ा बनने की नहीं, हल्का और सरल होने की दिशा में..”
** “सच कहूँ तो अपनी ही सादगी में जीवन का असली स्वाद मिल गया.

– जो मिला.. उसे बाँधकर चलता रहा.
_ अब अकेले चलने और अपने एकांत में जीने का साहस ही सबसे बड़ा सहारा है.”
सबसे खूबसूरत लोग जिन्हें हम जानते हैं वे, वे हैं, _ जिन्होंने हार को जाना है, पीड़ा को जाना है, संघर्ष को जाना है, हानि को जाना है

_ और गहराई से बाहर निकलने का रास्ता खोज लिया है.
_ इन व्यक्तियों में जीवन के प्रति सराहना, संवेदनशीलता और समझ होती है _ जो उन्हें करुणा, सौम्यता और गहरी प्रेमपूर्ण चिंता से भर देती है ;
_ खूबसूरत लोग यूं ही नहीं बन जाते.
— लोग जो अच्छे जीवन के माप के रूप में व्यस्तता, अधिकता और बहिर्मुखता का जश्न मनाते हैं,
_ पर आप अपने घर और जीवन में शांति, सुकून और सरलता के लिए जगह बनाएं. चीज़ें वैसी ही रहें जैसी उन्हें होनी चाहिए..!!
हम अपने आप में जितना Simple जियेंगे, हम अपने आप को उतना ही Special भी महसूस करते रहेंगे ;

अगर हम अपने खर्चों पर नियंत्रण करेंगे तो हम खुश भी रहेंगे, और खुशहाल भी रहेंगे ;

वहीँ जब हम अपनी इच्छाओं को कण्ट्रोल करना सीख जाते हैं तो हमारी सेहत भी अच्छी रहती है, _

_ क्यूंकि हर सेहत के पीछे चिंता होती है और हर चिंता के पीछे इच्छाएं होती हैं.

हर किसी को अपने जीवन में सहज और सरल होना चाहिए. हाँ ये सच है कि इस रास्ते पर बहुत सी हार का सामना करना पड़ता है लेकिन यकीन मानिए कि वो सारी हार मिलकर भी, उस एक जीत के सामने छोटी साबित होती हैं, जिस जीत में ऐसे कुछ लोग हमसे आ जुड़ते हैं जो हम जैसे ही किसी सहज और सरल इंसान की तलाश में थे.

मन के सुकून के लिए हमें हजारों की जरुरत नहीं होती, मिल जाएँ तो मुठ्ठी भर लोग ही काफी हैं ; हमारे जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष यही है कि जब तक ये सहज और सरल लोग हमें नहीं ढूंढ लेते, क्या तब तक हम सहज और सरल बने रह सकते हैं ? अपनी उस सहजता और सरलता को खो देना ही, जिसकी वजह से बाकी के सहज और सरल लोग हमसे जुड़ते, अपने दिल के सुकून को खो देना है…

प्रकृति की सादगी ही उसका आवरण बन गई है, यदि हमारी सादगी हमारा आवरण बन जाए तो हो सकता है कि हमारी दशा भी वैसी ही हो जाए और तब हम प्रकृति के साथ सामंजस्य में हो जाते हैं.

सरलता प्रकृति का सार है.

#लोग कहते हैं, हम सीधे है, इसलिए लोग हमारा फायदा उठा जाते हैं, पर सीधे सरल व्यक्ति का कोई फायदा उठा ही नहीं सकता,

फायदा सदा जटिल और चालाक लोगों का उठाया जाता है, क्योंकि वह जो कुछ करते हैं, उसकी कीमत चाहते हैं, अपेक्षा रखते हैं दूसरों से_ अपेक्षा पुरा न होने पर उन्हें लगता है, वह ठगे गए,

सीधा सरल होने का कतई मतलब बुद्धू होना नहीं होता, सीधा सरल व्यक्ति का मतलब, जो आंतरिक विवेक और बोध से भरा हुआ हो..

सीधा सरल जो भी व्यक्ति होगा, दुनिया के चालाक लोगों को वह हमेशा बुद्धू और मूर्ख ही नजर आएगा !!

साधारण जीवन जीने वाले लोगों की सबसे अच्छी बात ये होती है कि.. वे खूबसूरती की प्रतिस्पर्धा की होड़ का हिस्सा नहीं बनते,

_ आईना निहारना जैसे वक्त जाया करना लगता है, वे अपने अंदर की खूबसूरती को पहचान लेते हैँ,
_ इसलिए यकीन कीजिए शक्लों की कम खूबसूरती भी एक नेमत है…!!
यदि मैं एक साधारण जीवन जीना चाहता हूँ तो क्या होगा ?

What if I Just Want to Live a Simple Life ?
— मैं जिस किसी से भी मिलता हूं वह मॉडर्नता [ Modernata ] की ओर भाग रहा है, मैं अक्सर खुद को सोचता हुआ पाता हूं,
_”क्या होगा अगर मैं सिर्फ एक साधारण जीवन जीना चाहता हूं ?”
_मैं मॉडर्नता की चकाचौंध में डूबने वाला व्यक्ति नहीं हो सकता, जो किसी चीज़ के लिए तरस रहा हो…
_ जब भी मैं सोशल मीडिया [ Whatsapp, Face book, Twitter ] पर देखता हूँ, तो मेरे सामने उन लोगों की तस्वीरें आती हैं _जो अपनी नवीनतम लक्जरी खरीदारी या किसी अन्य प्रमोशन का जश्न मना रहे होते हैं.
_ बात स्पष्ट है: वो बता रहे हैं कि _यदि आप लगातार अधिक के लिए प्रयास नहीं कर रहे हैं तो आप पिछड़ रहे हैं..!!
_ लेकिन अगर मुझे ‘और’ नहीं चाहिए तो क्या होगा ?
_अगर मुझे ‘कम’ में संतुष्टि मिल जाए तो क्या होगा ?
_लेकिन यहाँ मैं _जिसके लिए हाँ कहूंगा वो ये है: _मैं किसी और के द्वारा बताए ढंग के लिए _अपनी शांति का बलिदान नहीं देना चाहता.!!
_साधारण चीज़ों में एक आकर्षण है – वे चीज़ें जिन्हें आधुनिक [ मॉडर्न ] लोग अक्सर नज़रअंदाज कर देता है..!
_ अलार्म की बजाय पक्षियों की धीमी चहचहाहट से जागना..
_खिड़की के पास किताब पढ़ते हुए बारिश धीरे-धीरे शीशे पर थपकी दे रही है..
_लंबी सैर, दिल से दिल की बातचीत, घर का बना खाना, परिवार की हंसी – क्या इनमें जादू नहीं है ?
_ फिर हम इन क्षणों [ Time ] को क्षणभंगुर कार्यों के लिए बदलने के लिए इतने उत्सुक क्यों हैं ?
_ शायद अच्छी तरह से जीवन जीने का मेरा सपना ब्रांडेड सामानों से भरा नहीं है, इसके बजाय, यह उन क्षणों से समृद्ध हैं [ जैसे – मैडिटेशन, संगीत सुनना ] जुड़ाव के, शांति के, वास्तविक आनंद के क्षण ; _जो मुझे मेरी मस्ती में डूबने को मजबूर कर देते हैं. _ मैं उस को संजोता हूँ ;
__ सूर्यास्त देखने का आनंद, एक खामोश रात की शांति, वाकिंग, घूमना, किताब पढ़ना, संगीत सुनना, _ ये वे खजाने हैं _जिनकी मुझे तलाश है.!!
– उनमें, मुझे वह समृद्धि दिखती है _जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.!!!
_मैंने उन चीज़ों के लिए जगह बनाई है _जो वास्तव में मायने रखती हैं..!!
_ मैं ऐसे दिनों की चाहत रखता हूँ _जब समय मेरी उंगलियों से फिसलता नहीं है _बल्कि एक-एक क्षण में इसका आनंद लेता है..!!
_मैं अपनी शर्तों पर जीए गए जीवन की शांत संतुष्टि का आनंद लेता हूं, _जो औरों की लोकप्रिय राय से तय नहीं होता..!!!
_ ऐसा नहीं है कि मॉडर्नता की चाहत एक बुराई है, लेकिन ‘और अधिक’ की पागल दौड़ में, आइए ‘पर्याप्त’ की सुंदरता को न भूलें..
– ” सादगी में जीने के लिए काफी है ” को पहचानने और उसकी सराहना करने में एक बेजोड़ खुशी है.!!
__इसलिए, जैसे-जैसे दुनिया आगे दौड़ती जा रही है, मैं पीछे हटने का विकल्प चुनता हूँ ; वर्तमान का आनंद लेना. सादगी को संजोना.
_ सफलता को मेरी शर्तों पर परिभाषित करने के लिए ; _मैं एक ऐसे जीवन के लिए तरस रहा हूँ, _जहाँ मेरा मूल्य मेरी संपत्ति या मैं कितना कमाता हूँ से जुड़ा नहीं है, _बल्कि मेरे अनुभवों की गहराई और मेरी गुणवत्ता में निहित है.!!
– अंत में, मैं बस एक सरल, सार्थक जीवन चाहता हूँ और मैं चाहता हूं, मैं कैसे भी करूं,
_ कि दुनिया यह समझे कि यह एक विकल्प [ Option ] है, कोई समझौता नहीं !!

लोग मेरी जीवनशैली [Lifestyle] को नहीं समझ पाते..

_ उन्हें लगता है मैं अलग हूँ, शायद अजीब भी..
_ पर मैंने जाना है कि..
मेरी ऊँचाई उनके अनुमोदन [Approval] में नहीं, मेरे चिंतन में है.
_ मैं वही चुनूँगा जो मेरी आत्मा को संतोष दे — गुणवत्ता, सादगी और सजगता
_ मैं उन्हें दोष नहीं देता..
_ वे अपनी आदतों और दृष्टि से देखते हैं,
लेकिन मैं अपनी राह से नहीं हटूँगा.
_ जो मुझे समझेंगे,
_ उनके लिए मेरा यह जीना प्रेरणा होगा.
_ और जो नहीं समझेंगे — उनके लिए मेरी खामोशी ही उत्तर होगी.!!
सरल व्यक्तित्व वाले लोगों का लोग जीना मुश्किल कर देते हैं, इसलिए जटिल बनना पड़ता है,

_ कुछ परिस्थितियां ऐसी बन जाती है कि _ हमें न चाह कर भी जटिल बनना पड़ता है,
_ लोगों के अनुभव ही हमें जटिल बनाते हैं,
_ सरल लोग ही.. सबसे ज्यादा धोखा खाते हैं..!!, जो सरल होता है _ उसका फायदा लेकर उसे अकेला तब छोड़ दिया जाता है,
_ सरल लोग धोखा खा खा कर जटिल‌ होते जाते हैं _ नहीं तो सरल एवं सहज रहते,
_ सरल एवं सहज को ही दुनिया ज्यादा धोखा देती है _फिर कोई सरल एवं सहज कैसे रह सकता है..
_ सरल हृदय के लोग ही.. सबसे ज्यादा धोखा खाते हैं..!!
_ सीधे और सरल लोगों को भले चालाकी करनी न आती हो लेकिन सामने वाले की चालाकी अच्छे से समझ आती है !!
पता नहीं हमारे समाज में दुख, दरिद्रता और संघर्ष को इतना ग्लोरीफाई [ गौरवान्वित ] क्यों किया जाता है..

_कि यदि इन सबके विपरीत कोई शांत, सुंदर, सरल, सहज जीवन जी रहा हो तो
_उसे लोग एक अपराध की तरह देखने लगते हैं..
— सही कहा जाता है कि हर चीज़ की कीमत होती है _सो शांति, सुंदरता, सहजता और सरल जीवन शैली की भी एक कीमत होती है _ जिसे लोग चुकाना नहीं चाहते..
_ नकारात्मक सोच, लोगों की दिखावा करने की आदत,
_जो आप नहीं हैं, उसे साबित करने की जद्दोजहद _अंततः आपको सहज, सरल नहीं रहने देते हैं..
— संघर्ष सबके जीवन में होता है, पर उस संघर्ष को आप कैसे जीते हैं, _कैसे उससे पार पाते हैं और कैसे _उसे व्याख्यायित करते हैं _यह आप पर निर्भर करता है..
_कोई वर्तमान में किसी दुख के न होने पर भी _अतीत के दुख, अभाव को कलेजे से लगाए रखता है..!!
_तो कोई वर्तमान में भी दुख, पीड़ा होने पर उसे मुस्कुराकर गले लगाता है.
_आर्थिक समृद्धि ज्यों ज्यों बढ़ रही _वैसे वैसे मानसिक दरिद्रता भी बढ़ रही.._एक असुरक्षा बोध लोगों को लगातार त्रस्त किए रहता है…
— पर मैं आज पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि _स्लो लाइफ़, बिना हायतौबा वाली शांत जिन्दगी और अपना घर, किताबें, मुझे जो, _जो भी चाहिए था..
_उसे चुना और आज खुश, संतुष्ट हूं…
कम कमाने वाले, सादे-सरल तबियत लोगों की इज़्ज़त कीजिये.

_ वरना लालच एक काला घोड़ा है, कब किसके दरवाज़े बैठ जाए, पता नही..
_ सरलता को सम्मान दीजिये और जिनके आर्थिक स्त्रोत पता न हों, उनके पीछे दीवानगी मत रखिये.
_ कम कमाओ मगर सही कमाओ, सादगी बुरी चीज़ नही है और न ही कम कमाना बुरा है.
_ आप अपने चारों ओर नज़र रखिये.
_ कोई कैसे अमीर हो रहा है, कोई कैसे बेतहाशा पैसे खर्च कर रहा है, कोई कैसे अंधाधुन खरीदारी कर रहा है.. जबकि उसका कोई काम आपको दिखाई नही देता.
_ जो बेधड़क, बिना दर्द के, बिना रुके अंधाधुन खर्च कर रहा, जबकि वह कोई काम भी नही करता, तो उसपर भी यक़ीन मत कर लीजिए.
_ यह जो बिना दिखने वाला काम है, इसकी गहराई में बहुत कुछ है.
_ जिस भी काम का, व्यक्ति का, संगठन का आर्थिक स्त्रोत न मालूम हो, वह भरोसे योग्य नही है.!!
जीवन की “वास्तविक सहजता” यही है, लोड न लेना, किसी के दबाव व प्रभाव में न रहना,

_ अपने “मूल स्वभाव” में रहकर जीवन को “साक्षी भाव” से जीना, जीवन का “असली आनंद” भी इसी में है,
_ पर ये बोध भी आसानी से नहीं आ सकता, जीवन जब हमें गहरे कड़वे अनुभव देता है, तभी ये बोध किसी मानव चेतना में आता है.
_ जीवन में जैसे जैसे उम्र ढलती है.. ज़िंदगी समझ आने लगती है.
_ हमारी अच्छाइयां और बुराइयां हमें शून्यता की तरफ रास्ता दिखाती हैं.
_ जितनी चीज़ों से शुरू में लगाव होता है, मन में भटकाव होता है..
_ वो खत्म होती सी जाती हैं.
_ और हम हँसते हँसते सब स्वीकार करने लगते हैं..
_ जहां हमें जीवन से कुछ नहीं चाहिए होता है.
_ हम जीवन को खुद को सौंपना सीख जाते हैं और जीने लगते हैं समय के हर पल को..
_ शांत स्वभाव यूं ही नहीं उगता.. परिस्थितियां और जीवन की समझ से आता है, जो आपको परिवर्तित कर ठंडा रखती है.
_ मौसम का कोई बदलाव भी.. फिर आप पर असर नहीं करता.
_ आप हर समय में चुपचाप चलना सीखते जाते हैं.!!
आखिर इतना मुश्किल क्यों है, एक सरल सा जीवन जीना ;

_ हँसी- ख़ुशी की रोटी खाना, संतुष्टि का मीठा शरबत पीना ;
_ आखिर इतने उलझे हुए क्यों हैं, इतने सारे ये जीवन के धागे ;
_ आखिर जो है छोड़ कर उस को, क्यों औरों के पीछे भागे ;
_ आँखों से जो दिखता है, वह सच से आख़िर परे क्यों है ;
_ जीवन के सब इतने साधन, आख़िर ये धरे-के-धरे क्यों हैं ;
_ क्यों घबरा कर मुश्किल से, आसान ढूंढ़ना छोड़ दिया ;
_ पतझड़ के डर से तुमने, अपने अरमान सींचना छोड़ दिया ;
_ आखिर इतना मुश्किल क्यों है, एक सरल सा जीवन जीना..!!
हम इंसानों की आदत होती है हर चीज़ में फायदा ढूँढने की,

_ लेकिन कभी कभी बिना फायदा ढूँढे कुछ काम करने चाहिए, बदले में कोई उम्मीद नहीं होनी चाहिए,
_ ऐसे ही एक आदत बनाइये सरल रहने की..
_ सरलता मनुष्य का वो गुण है जो लोगों का एक दूसरे से जुड़ाव करती है,
_ यह सरलता ही इस जीवन को सरल बनाती है…!
_ “जो कम में जीता है, वही सच में जीता है.!!”
_ ” “जो कम में जीता है, वही सच्चे अर्थों में समृद्ध है”
_ ” स्वाभिमान के साथ जीया गया जीवन, सबसे बड़े आर्थिक और आध्यात्मिक आज़ादी का रूप है “
_ ” मैं जीवन के प्रत्येक छेत्र में स्वाबलंबन और सादगी को स्थापित करूँगा”
एक सादा और सहज जीवन जीने के लिए हमें महीने के कितने रुपए चाहिए होंगे..??

_ यदि वास्तविक में देखा जाएं तो जिंदगी को जीना ज्यादा कठिन नहीं है, महंगाई और खर्चे को अगर ध्यान दो भी तो..
_ हम एक सहज और सामान्य जिंदगी को आनंद के साथ आराम से जी सकते हैं.
_ यदि कमाई बहुत कम भी है तो.. एक अच्छी खासी सही जिंदगी जी जा सकती है,
_ आधे से ज्यादा लोग इस दुनिया में केवल इसलिए दुःखी है, क्योंकि वो दूसरो की चमचमाती जिंदगी देखते हैं,
_ जबकि एक हंसता खेलता परिवार की जरूरत हमेशा से ही कम ही होती है,
_ यदि हम दुनिया को दिखाने के लिए जिंदगी नहीं जी रहे हों.!!
जैसे एक पौधे को खिलने के लिए एक महंगे गमले की नहीं, एक अच्छी मिट्टी की आवश्यकता होती है,

वैसे ही _ अच्छा जीवन जीने के लिए हमें महंगे साधनों की नहीं _
_सरलता की, सहजता की और अच्छी समझ की जरुरत पड़ती है..!
_ सबसे अच्छी चीजें आपके निकट हैं: आपके नथुने में सांस, आपकी आंखों में रोशनी, आपके हाथ में कर्तव्य, आपके सामने भगवान का मार्ग ; _फिर चाँद -सितारों को न पकड़ें,
_बल्कि जीवन के सामान्य सामान्य कार्य करें _ क्योंकि यह निश्चित है कि दैनिक कर्तव्य और दैनिक रोटी जीवन की सबसे प्यारी चीजें हैं.

सुविचार – डर – भय – खौफ – दहशत – घबराहट – थरथराहट – 044

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हमेशा..! डटकर डर का, सामना कीजिये..! ज़नाब..!

यकीन मानिए..! डर बहुत कमजोर होता है..!!

“जब चीज साफ़ दिखती है, तो डर अपनी जगह छोड़ देता है.”

जिस डर का हम सामना नही करते, भविष्य में वो ही डर _हमारी सीमाएं निर्धारित करना आरंभ कर देता है..
कोई इतना मजबूर कमजोर नहीं, जितना उसने खुद को मान रखा है,

व्यक्ति के जीवन 99% भय झूठे और मिथ्या है, असलियत में वो होते ही नहीं, सिवाय आपके खोपड़ी के..

किसी चीज़ का डर बने रहना कभी-कभी अच्छा भी होता है..

_ डर हमें सतर्क रखता है, सीमाओं का एहसास कराता है, और हमें लापरवाही से बचाता है..
_ पर जैसे ही डर पूरी तरह खत्म हो जाता है, इंसान अक्सर या तो बेपरवाह हो जाता है या फिर ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास में बहक जाता है.!!
डर अनिश्चितता से आता है; जब हम खुद को बेहतर तरीके से जान लेंगे तो हम अपने अंदर के डर को खत्म कर सकते हैं.

Fear comes from uncertainty; we can eliminate the fear within us when we know ourselves better.

दुनिया से पीछे छूट जाने का डर किसी भी चीज़ से बड़ा है,

_हम सभी डर रहे हैं, तो हम सभी एक ही गति पर हैं.

_कोई न कोई दूर जरूर जाएगा, लेकिन ठीक है.

_ किसी को अपने से दूर जाते हुए देखना ठीक है, क्योंकि इससे आपको पता चल जाएगा कि यह संभव है.

_आप सीखने और इसे अपने लिए संभव बनाने का प्रयास करेंगे.!!

भय से खुद को दूर रखिए, भय हमें जीने नहीं देता,

_ डरा हुआ आदमी सिर्फ जीने का उपक्रम करता रह जाता है.
_ जीवन को जीने प्रयास कीजिए,
_ जो सामने है दिल से उसका उपभोग कीजिए..
_ जीना ज़रूरी है..
_ एक दिन सभी मर जाएंगे, इस सच को जानते हुए भी जीना ज़रूरी है.
_ जीने की सबसे बड़ी शर्त है भय रहित जीना.
_ भयभीत आदमी के शरीर में खाना नहीं लगता – प्रोटीन, विटामिन काम नहीं करते.

सुविचार – अनुशासन, नियमबद्ध आचरण – 043

अनुशासन में आदमी जब ऊबने लगता है, तब वह स्वतंत्रता की खोज में भागता है. कभी- कभी अपने तरीके से जीवन जीने का मन करता है, जिसमें थोड़ी स्वतंत्रता हो और ढेर सारी मनमानी हो. बीमारियों से ग्रस्त आदमी भी कभी- कभी खाने- पीने में थोड़ी छूट चाहता है. सच तो यह है कि हर जीवित प्राणी आजादी चाहता है.

जीवन बेफिक्री से जीने के दिन भले ही कम हो गये हों, पर जब मौका मिले, अपने अंदर के बच्चे को जीवित कर लीजिए. परेशान तो हर कोई है. कोई बीमारी की वजह से, कोई पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर, तो कोई दफ्तर के तनाव को झेलते हुए. इन सब के बीच भी मजा- मस्ती के छण को कभी नहीं गंवाएं.

हमारी संवेदनाएं जीवित रहें, इसलिए आवश्यक है व्यवस्तताओं के बीच भी कुछ पल केवल अपने लिए अपने साथ जीएं. सबके शौक अलग- अलग होते हैं, अपने साथ जीने का मतलब अपने शौक के साथ समय बिताना होता है. ऐसे समय में आप पेंटिंग करें, गाना गायें या कविता लिखें, सुडोकु हल करें या फिर जो आपकी हॉबी रही हो, उसमें ध्यान लगाएं.

कहते हैं न, वीणा के तार को न कसकर बांधना चाहिए और न ही ढीला ही, दोनों अवस्था में सुर नहीं सधेंगे. जिंदगी भी वीणा के तार की ही तरह है. समयबद्धता के साथ अनुशासन और आजादी दोनों के तालमेल से ही जिंदगी में सुखद परिणाम आयेंगे.

अनुशासन एक ऎसा गुण है, जो हमें अपने उद्देश्यों से भटकने नहीं देता.

अनुशासन में रह कर हम खुद को कई तरह की आजादी से वंचित करते हैं, जो शायद हमें अच्छा न लगे,

पर इससे हम अपना ही भला करते हैं.

किसी भी अनुशासन का उद्देश्य जीवन को आसान बनाना नहीं होता, बल्कि वह इंसान बनना होता है जो आप अपने भीतर गहराई से महसूस करते हैं.
अनुशासन कठिन जरूर लगता है..,

_ लेकिन…….आदत बन जाए तो अच्छे परिणाम की..गारंटी देता है..!!
अनुशासन ऐसी चीज है जिसे भीतर से आना चाहिए, इसे बाहर से नहीं थोपा जाना चाहिए.
अनुशासन से ही मनुष्य को स्वतंत्रता प्राप्त होती है. बाहरी अनुशासन की अपेछा व्यक्ति की आंतरिक प्रेरणा से प्राप्त स्वतंत्रता अधिक स्थायी होती है.
अनुशासन का मतलब नियंत्रण नहीं है, अनुशासन का मतलब है कि

आपके पास वह करने की समझ है, जिसे किए जाने की जरुरत है.

बाहर से लगाया गया अनुशासन अंततः पराजित हो जाता है,

_ जब वह भीतर की इच्छा से मेल नहीं खाता.!!

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