सुविचार – समस्या – समस्याएं – समस्याएँ – मुश्किल – मुश्किलें- विषमताएँ – विषमताएं – वादविवाद – 095

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आप जितना अपने भीतर की ऊर्जाओं को, शक्तियों को जानते जायेंगे, उतना ही उन्हें सकारात्मक और सृजनात्मक मार्ग की ओर मोड़ना आपके लिए सरल हो जाएगा.
अपनी ऊर्जा को चिंता करने में ख़त्म करने से बेहतर है,

_इसका उपयोग समाधान ढूंढ़ने में किया जाये.

_ हर समस्या का हल है, बस हल करना आना चाहिए..!!

जीवन में जब- जब समस्या सामने आए, तब- तब स्वयं को समझाएँ !

_ तू धैर्य रख, तू हिम्मत रख, तू निर्बल नहीं है, साहस से काम ले, आगे बढ़ !

_ समस्या है तो समाधान भी जरुर होगा.!!

जहाँ समस्या है वहीं समाधान चाहिए,

_ समस्या एक जगह समाधान दूसरी जगह असम्भव— दोनो का मिलन ही न होगा–!

किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, कई समस्याएं कुछ समय लेकर स्वयं सुलझ जाती हैं.
आप किसी समस्या का समाधान तब तक नहीं कर सकते _जब तक आप स्वीकार नहीं करते कि समस्या आपके पास है और उसे हल करने की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते..!!
परिस्थितियां हमारे लिए समस्या नहीं बनती हैं ; समस्या तो तब बनती है, जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता.
समस्याएं पैदा करना आसान है, लेकिन उन्हें सुलझाना आपकी असली ताकत है.
परिस्थिती बदलने का दम रखो, समस्या कभी ख़त्म नही होने वाली..!!
“जीवन कोई समस्या नहीं है जिसे सुलझाया जाए बल्कि यह एक वास्तविकता है जिसे जीया और अनुभव किया जाना चाहिए.”

“Life is not a problem to be solved but a reality to be lived & experience. “
हमारी मुश्किलें-समस्याओं को हमसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता, इसलिए अपनी मुश्किलें-समस्याओं को हल करते समय, सभी को खुश रखने की शर्त से खुद को मुक्त रखिए.!!
यदि आप समस्या को देख नहीं पाते हैं तो _आप समस्या का समाधान नहीं कर सकते;

_यहीं पर हममें से कई लोग फंस जाते हैं.
_हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि _कोई समस्या है,
_इसलिए हम इसमें गहरे फंसे रहते हैं..!!
_परिवर्तन का द्वार उस क्षण खुल जाता है _जब हम स्वीकार करते हैं कि _किसी चीज़ को हल करने की आवश्यकता है..!!
_समस्या को समझते ही स्थिति बदल जाती है..!!
_और ये मस्तिष्क के बंद पड़ चुके जर्जर द्वार को _आहिस्ते से खोलने का कार्य करेगी और _हमें नव ऊर्जा से भर देगी..!!
अपनी समस्या का समाधान प्राप्त करने से पहले, आपको खुद से यह सवाल करना चाहिए कि..

_ क्या आप उन चीजों को छोड़ने या बदलने के लिए तैयार हैं,
_ जिन्होंने आपके जीवन को बीमार बना दिया है.
_ आत्म-ज्ञान और परिवर्तन, व्यक्तिगत संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण तत्व होते हैं.
_ यह उन आदतों, मानसिकताओं या लगावों की पहचान करने के बारे में है, जो स्थिति में योगदान कर सकते हैं, और उन्हें छोड़ने या बदलने का साहस रखने के बारे में है.
_ परिवर्तन तभी शुरू होता है, जब आप असहजता [Discomfort] का सामना करने और विकास को अपनाने के लिए तैयार होते हैं.!!
हर दिन हम नई समस्याओं से घिर जाते हैं और फ़िर उसे हम हल भी करते हैं.

_ हर किसी के लिए घिरने और सुरक्षित बाहर निकलने में लगने वाला समय अलग-अलग होता है..
_ और यह हमारी इच्छाशक्ति, साहस और इस विश्वास पर निर्भर करता है कि यह भी गुजर जाएगा.!!
जब तक आपसी विचार-विमर्श और अभिव्यक्ति का खुला माहौल नहीं होगा,

_तब तक समस्याओं के किसी समाधान पर पहुंचना संभव नहीं है.!!

ऐसा नहीं है कि समस्याएँ या अमानवीय स्थितियाँ नहीं हैं, लेकिन समस्याओं पर शोर मचाने से बेहतर है कि समाधान की दिशा में एक छोटा सा कदम उठाया जाए.
समस्या का मातम मनाना छोड़कर और खुद को बेबस, लाचार शोषित, पीड़ित, वंचित और अभावग्रस्त मानना छोड़कर.. समस्या का समाधान करना सीखिए.!!
समस्या यह है कि समस्या कि जड़ में न जाकर इसकी पत्तियों को छांटा जाता है कि इसमें कीड़े क्यों लग रहे हैं.
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.
समस्याएँ और विषमताएँ अब हमारे जीवन का अंग बन चुकी हैं,

_इनके साथ जीना सीख लें, इससे अवसाद नहीं रहेगा..!!
सारे समस्या सोच की है, सोच और माहौल से ही समस्या छोटी बड़ी दिखाई देती है.!!
हम जितना ज्यादा गहराई से सोचते हैँ, समस्या उतनी ही ज्यादा नज़र आती है ;
_ वहीं अगर सामान्य रहकर हर समस्या को स्वतंत्र छोड़ दिया जाय तो..
_ हर समस्या का समाधान स्वयं ही निकल आता हैं, और मुश्किलें आसान होने लगती हैं..!!
वादविवाद करना और विचारविमर्श करना, इन दोनों में अंतर है.

_ वादविवाद का मंतव्य होता है इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि सही मैं हूँ,
_ जबकि विचारविमर्श हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि सही क्या है.!!
समस्या से भागने पर वह और उलझी हुई लगने लगती है,

_ लेकिन जैसे ही हम उसका सामना करते हैं, वही धीरे-धीरे सुलझने लगती है.
_ डर दूर से हमेशा बड़ा दिखाई देता है, मगर हिम्मत से सामना करने पर उसकी असलियत छोटी पड़ जाती है.!!
समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बस एक दिन मन उन्हें जीवन का केंद्र बनाना छोड़ देता है.
जीवन समस्याओं के ख़त्म होने से शांत नहीं होता,
_ जीवन तब शांत होता है, जब मन समस्याओं के बीच भी हल्का रहना सीख ले.
जब आप समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपको और अधिक समस्याएं होंगी.

जब आप संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो आपके पास अधिक अवसर होंगे.

When you focus on problems you’ll have more problems.

When you focus on possibilities you’ll have more opportunities.

दूसरे लोगों की समस्याएँ तभी आपकी समस्या बनती हैं जब आप उन्हें समझते हैं.

Other people’s problems become your problem only if you pick up.

सुविचार – “उत्साह – उमंग – जोश – जुनून – 094

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“उत्साह,”

परिभाषा के अनुसार, “उत्साह, उत्सुकता, ऊर्जा और रुचि” का अर्थ है.
जीवन के लिए उत्साह का अर्थ है जोश के साथ जीना, अपने आसपास की दुनिया में रुचि लेना, रोमांच की तलाश करना और उत्साह की भावना के साथ जीना.जैसे,
” भूख का भोजन से क्या संबंध है, उत्साह का संबंध जीवन से है
“जीवन के लिए उत्साह और जुनून सबसे सरल सुखों से आते हैं.
जब कोई इंसान अधूरे मन और उत्साह के बिना कोई काम करता है,
_ तो सरल काम भी बहुत मुश्किल हो जाता है..!!
करने का जुनून हो तो कुछ भी हो जायेगा,
_ बैठे बैठे बातें तो कोई भी बना लेता है..!!
सदैव युवा, ऊर्जावान और उत्साही लोगों के साथ रहना चाहिये.
_ बूढ़ों के साथ बैठ कर ताश या कैरम खेलना एक तरह से आपके समय की बर्बादी है.!!
अपने सपनों को उत्साह, साहस, अनुशासन और आशावादी तथा सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करते हुए व अहं और भय का परित्याग कर, यह विश्वास करें कि यदि श्रद्धा हमारे जीवन की नीवं है तो प्रगति हमारे हाथों में है.
जो बातें एक समय हमारे भीतर उमंग भर देती थीं, वही समय के साथ बचकानी प्रतीत होने लगती हैं,

_ जिन भावनाओं में कभी डूबकर हम रोया करते थे, उन्हें आज देखकर मुस्कान आ जाती है, शायद खुद की ही नादानी पर..
_ शारीरिक रूप से बढ़ना प्रकृति का नियम है, लेकिन मानसिक रूप से परिपक्व होना अनुभवों का परिणाम..
_ और जब बचपन के उत्साह को विवेक की दृष्टि से देखने लगो..
_ समझो तुमने सच में बड़ा होना शुरू कर दिया है…!

सुविचार – व्यवहार – आचरण – बर्ताव – बरताव – बिहेवियर – Behavior – 093

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व्यवहार ……

उस चिराग की तरह बनिए जो गरीब के झोपड़े में भी उतना ही उजाला करता है जितना एक राजा के महल में रौशनी देता है !

_ सबके साथ समान और सम्मान से व्यवहार करिए !

अच्छा व्यवहार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है,

_ जबकि बुरा व्यवहार लोगों को पीछे हटा देता है.

किसी व्यक्ति के बारे में कोई एक निश्चित राय नहीं बनानी चाहिए,

_ क्योंकि लोग अलग अलग जगह अलग अलग तरह का व्यवहार करते हैं..!!

अपने व्यवहार को सच्चा रखो और बदनामी की परवा न करो.

गंदगी मिट्टी की दीवार पर लग सकती है, पौलिश किए हुए संगमरमर पर नहीं.

कभी-कभी अपने ही कुछ लोगों का व्यवहार इतना निकृष्ट कोटि का होता है कि

_उनका जिक्र करना भी अपनी ही इंसल्ट लगती है..!!

लोगों से बुरा बर्ताव उस तरह मत करें, जिस तरह वो बुरे हैं.

_ बल्कि लोगों से अच्छा बर्ताव उस तरह करें, जिस तरह आप अच्छे हैं.!!

किसी के भी व्यवहार को देख कर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया न किया करें.

_ बस जो हो रहा है.. उसे देखते रहो.. उसका आनंद लेते रहो.!!
_ क्यों हो रहा है ❓ कैसे हो रहा है ❓ कब से हो रहा है ❓ हो ही क्यों रहा है ❓
_ इस चक़्कर में न ही फंसे तो हमारे लिए अच्छा होगा.!!
जो सबकी हां में हां मिलाते हैं और ये जताते हैं कि उनका सबसे व्यवहार अच्छा है,

_असल में उनका किसी से व्यवहार होता ही नहीं है..
_ वो तो बस हां में हां मिलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं..
_ और जो सबकी हां में हां नहीं मिलाते.. वो हर किसी को हज़म नहीं होते..
_ अतः व्यवहार बनाए रखना और व्यवहार का दिखावा करना..
_ ये दोनों अलग अलग बातें हैं..!!
सोचने के बजाय काम करना, काम होना महत्वपूर्ण है सो समय मेरे लिए मौसम, समय, घर-परिवार के काम समस्या ही नहीं हैं,

_मुझे लगता है कि आप जैसा व्यवहार, कार्य करते हैं ..परिस्थितियां अपने आप उसके अनुकूल बनने लगती हैं..
_मैं आपको समझता हूं, और मैं आपका मन बदलने का प्रयास नहीं करूंगा.
_मैं दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखने के लिए बहुत बूढ़ा हो गया हूं.
_मैं जो सोचता हूं वह आपको बता चुका हूं और बस इतना ही.
_यदि आप मेरी मान्यताओं के विपरीत कार्य करेंगे ..तो भी मैं आपका मित्र बना रहूँगा _और यदि मैं आपसे असहमत हूँ ..तो भी मैं आपकी सहायता करूँगा.
अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी का फ़ोन एक बार में उठा लेंगे या किसी के मैसेज का उत्तर समय से दे देंगे तो उनकी वैल्यू कम हो जायेगी.

_ उन्हें लगता है कि तीन चार बार इग्नोर करने के बाद फोन उठायेंगे या मैसेज का रिप्लाई थोड़ा इग्नोर करने के बाद देंगे तो ऐसा करने से उनकी वैल्यू बढ़ेगी और सामने वाला उन्हें बहुत बड़ा इंसान समझेगा.
_ यह भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी ही है.. जिसमें लोग अपनी ही काल्पनिक दुनिया में जी रहे होते हैं.
_ जबकि बाहर लोगों में इनकी वैल्यू तो ख़ैर नहीं बढ़ती है.. मगर इनके इस व्यवहार के चलते लोग इन्हें ज़रूर किनारे कर देते हैं.!!
*लोग हमारा बुरा बर्ताव तो याद रखते हैं.. अपना भूल जाते हैं.

_ जब शिकायतें गिनाते हैं, तो हमारी गलती उन्हें क्रमवार याद होती है,
लेकिन उन्होंने हमारे साथ क्या-क्या बुरा किया ? उन्हें याद नहीं रहता..
_ जबकि हमारा बुरा बर्ताव उनके बुरे बर्ताव के एक्शन का रिएक्शन था.
_ पहल हमने नहीं की थी.. – ‘सहन करने की भी एक सीमा होती है’
_ इसलिए, दूसरों की गलतियाँ गिनाने से पहले- अपनी गलतियों पर भी ध्यान दीजिए..
दर्द सबको बराबर लगता है.!!
आप किसी से बातचीत में शालीनता बरतेंगे या आदर में उनके खराब व्यवहार पर भी जवाब नहीं देंगे तो.. सामने वाला अपने को सुपीरियर समझ कर आप पर चढ़ बैठेगा..!!
कुछ लोग सच में बुरे नहीं होते और न ही बुरा सोचते हैं, पर उन्हें एहसास ही नहीं होता कि उनका व्यवहार दूसरे को चोट पहुंचा सकता है.

_ वे संवेदनशीलता के मामले में कमजोर होते हैं.!!
कोई अच्छा इंसान भी एक वक्त तक ही अच्छा रह सकता है,

_ उसके बाद वो लोगों से वैसा ही व्यवहार रखने लगता है, जैसा लोग उसके साथ रखते हैं.!!

हमारा अच्छा व्यवहार भी लोगों को खटकता है और इसलिए वे दूरी बना लेते हैं,

_ क्योंकि इससे उनके अहंकार को ठेस पहुँचती है.!!

अपनी वाणी और व्यवहार में हमेशा स्पष्टता रखो,

_ फिर जिसे आना हो आयेगा और जिसे जाना हो जायेगा..!!

आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ सच्चा व्यवहार करें, तो आप खुद सच्चे बनें और अन्य लोगों से भी सच्चा व्यवहार करें.
आपके व्यवहार से ही सामने वाला तय करता है कि आप इज्जत के काबिल हैं या दूरी के.!!
किसी की बात को दिल पर मत लीजिए, जिसका जैसा संस्कार होता है..
_ वैसा ही… उसका व्यवहार होता है..!!
सबके साथ बराबर व्यवहार रखें बिना किसी व्यक्ति विशेष की तरफ झुकाव रख के,

_ अर्थात चाटुकारिता को बढ़ावा ना दें..!!

आप यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि दूसरे लोग कैसा व्यवहार करते हैं ; _लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप इस सब पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.

_आपकी प्रतिक्रिया में आपकी शक्ति है.

You can’t control how other people behave. But you can control how you respond to it all. In your response is your power.

सुविचार – शांत – शान्त – शांति – शान्ति – अमन – चैन – सुकून – 092

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ज़िंदगी को नए सिरे से ठीक करने के लिए कोई मौका दे तो ..क्या मांगा जाए ?
_ वैसे आप क्या मांगते एक सुकूनदेह ज़िंदगी के लिए ? ?

” शान्ति ” _ वह सब कुछ, जो अच्छा है, उसकी जननी है.
“इस दुनिया में कुछ लोग ही शांत, समर्थ और संतुलित जीवन जीते हैं”

‘मैं अपनी शान्ति का मालिक हूँ, सिचुएशन [Situation] का गुलाम नहीं.’

” शांति का आगमन ज्ञान से ही होता है, _ और शांति आनंद को आश्रय देती है,”

“सुकून बाहर नहीं, भीतर की ख़ामोशी से मिलता है”

_ थोड़ी देर खुद से मिलने बैठिए, जवाब वहीँ मिलेंगे, जहाँ आपने कभी झाँका नहीं.!!

जिसके पास मन की शांति है _वह न तो खुद को परेशान करता है _और न ही दूसरे को.!!

कोशिश यह करना कि सुकून का ताल्लुक़, किसी शख्स से ना जुड़े.!!
मन की शांति सबसे बड़ा धन है, जब मन शांत हो, तभी जीवन सुखमय बनता है.!!
“हमें सुकून वहां मिलता है जहां आपको किसी को कुछ साबित नहीं करना होता.”
ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीज़ है – मन की शान्ति, सुकून की नींद, सुलझे हुए रिश्ते, आर्थिक मजबूती, आध्यात्मिक जीवन.!!
कुछ लोग यह नहीं समझते कि अपने घर में अकेले शांति से बैठना, नाश्ता करना और अपने काम से काम रखना अमूल्य [ Priceless ] है.
दूसरों की प्रशंसा करें, इस से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी,

_ दूसरों से यह उम्मीद न करें कि, वे आप कि प्रशंसा करेंगे,

_ इस से आप को मानसिक शांति मिलेगी !!

शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं,

_ बल्कि आवश्यक है इच्छाओं की शांति !!

दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति को नष्ट करने का अधिकार न दें.

दूसरों से ईर्ष्या करने वाले मनुष्य को _ कभी मन की शांति नहीं मिलती.

मन की शांति दुनिया की किसी भी दौलत से बढ़कर होती है.

मन को तो तभी चैन मिलता है, _ जब ह्रदय शान्त हो.

” सुकून की फिजा में ही, _ मौज़-ए- बहार आती है,”
लोगों की राय से ज्यादा अपनी शांति को महत्व दें.

साधन खरीद सकते हैं, _ सुकून नहीं..

अपनी शांति बचाना किसी के खिलाफ जाना नहीं होता, बल्कि सबके लिए बेहतर बनने की शुरुआत होती है.
**’हमें शांति तो चाहिए…
_पर दिमाग को छुट्टी देने का मन नहीं करता.’
हम शान्ति के बिना रचनात्मक नहीं हो सकते.
किसी भी हालात में घबराना नहीं है, शांत दिमाग से रास्ते निकल ही आते हैं.
केवल न्यायप्रिय व्यक्ति ही मन की शांति का आनंद लेता है.
जब मन एकदम शांत हो जाता है, तब आप की बुद्धि मानवीय सीमाओं को पार कर जाती है..

_ अगर हम किसी तरह थोड़ा शांत रहना सीख लें तो जीवन सचमुच हल्का हो सकता है और हम वास्तविक मुद्दों पर बात कर सकते हैं.!!

हमारे राज़ जितने कम लोगों को पता हों, उतना ही सुकून से जिया जा सकता है,

_ क्योंकि बुरा वक़्त सबकी नीयत उजागर कर देता है.!!

अत्यधिक उम्मीदों को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी..!!
सुकून शांति पाने के लिए, जीवन को व्यवस्थित तरीके से जीने की ज़रूरत है.!!
जो अपने को शान्त रखना नहीं जानता, _कभी अच्छा नहीं बोल सकता.
“खुशियाँ तो मिलती रहीं, पर दिल सुकून के लिए तरसता रहा.”
ढूंढ लिया है खुद में ही सुकून…! ये ख्वाहिशें तो खत्म होने से रही।।
ज्यादा सुख सुविधा की चाहत सुकून भी छीन लेती है.!!
“जो भीतर से शांत है..- वो हर हाल में मुस्कुरा सकता है”
सुकून और शांति में होना ही कामयाबी है.!!
जो अच्छा था उसने सुकून दिया.. _ जो ख़िलाफ़ था.. उसने मज़बूत बनने में मदद की..!!
“मन की शांति भी एक जिम्मेदारी है..
_और हर किसी को उसका अधिकार नहीं दिया जा सकता”
यह एहसास कि वर्तमान क्षण ही सब कुछ मायने रखता है, _ तो हमें आंतरिक शांति मिलेगी _और हम प्रत्येक दिन की सुंदरता और खुशी की सराहना करेंगे..!!
1 दिन मृत्यु तो सभी की होनी है इसका यह मतलब नहीं कि जीना छोड़ दे

सुख शांति से परिवार के साथ वक्त बिताएं.

किसी भी तरह की बहस का हिस्सा बनने से बचें..
_ यदि जीवन में मानसिक शान्ति चाहते हैं तो..!!
कुछ अच्छा होने के लिए और मानसिक शांति के लिए बहुत कुछ छोड़ना और स्वीकार करना होता है.!!
“शांत रहना कमजोरी नहीं, यह समझदारी की निशानी है.

_ क्योंकि हर जवाब शब्दों से नहीं व्यवहार से दिया जाता है”
अशांति से हमें मुक्त होना है, क्योंकि अशांति के कारण मन में कंप पैदा होता रहता है, यह कंप बड़ा तकलीफ देता है ;_ क्योंकि कंप में हम प्रसन्न नहीं हो सकते, _

_ अशांति के इस दुष्प्रभाव से, कंप से हमको बचना होता है, ” हमें शांति की दिशा में यात्रा करनी चाहिए “

“शांति की कमी इसलिए नहीं है कि लोग उसकी बात नहीं करते.

_ शांति की कमी इसलिए है कि लोग उसे चाहते कम हैं, उसके बारे में बोलते ज़्यादा हैं”
हम शांति का सम्मान करते हैं, लेकिन अपनी आदतों, इच्छाओं और अहंकार को नहीं छोड़ना चाहते, जिनसे अशांति पैदा होती है.!!
चाहे कोई आपके साथ कितना भी बुरा करे, उसके स्तर तक मत गिरो.

_ शांत रहो और दूर हो जाओ..!!

इस दुनिया में शांति से रहने के दो ही उपाय हैं – एक उपाय तो ये है कि अपनी आवश्यकताओं को कम कर दिया जाए ;

_ और दूसरा उपाय है कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाने का प्रयास किया जाए. ऐसा करने से जिंदगी आसान हो जाती है.

लोग आप क़े साथ ईमानदार नहीं हैं, लोग पाखंड से प्यार करते हैं ; _ जब आप

खुद क़े प्रति ईमानदार होते हैं तो आप को आंतरिक शांति का मार्ग मिल जाता है.

” सुकून खोता हो, और सल्तनत मिलती हो तो ठोकर मार देना सल्तनत को, _

_ और सुकून को संभाल लेना, _ यही सच्ची दौलत है,”

“जिसे याद करने से मन अशांत हो,

_ उसे भूल जाना नहीं.. उससे मुक्त हो जाना ही सच्ची शांति है.”

“जो स्वाभाविक रूप से बदल रहा है..
_उसे शांत होकर बदलने देना चाहिए”
कभी-कभी कुछ लोगों से दूरी बना लेना ही सुकून देता है..

_ ख़ासकर उनसे.. जो आपकी नज़दीकी को हल्के में लेते हैं.!!

जिस दिन आप खुद को भीतर से शांत कर लोगे..
_ उस दिन लोग खुद बेचैन हो जाएंगे आपके सुकून से.!!
बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्साह ही खुशी है; _लेकिन जब आप उत्साहित होते हैं तो आप शांत नहीं होते.

_ सच्चा सुख शांति पर आधारित है.

Many people think excitement is happiness. But when you are excited you are not peaceful. True happiness is based on peace.

जब मन शान्त होगा तब आप हर समस्या का आसानी से हल ढूंढ पाओगे ; तब आप किसी भी परिस्थिति में अपने मार्ग से विचलित नही होओगे..!!
यदि आपके पास उन चीजों के बारे में चिंता करने का समय है, जिन्हें आप वैसे भी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो आप विचलित हैं.

” मन की शांति सही चीजों पर केंद्रित होने से आती है.”

सच की लड़ाई अक्सर इंसान को अकेला कर देती है, पर समझदारी यह है कि हर जगह लड़ाई न लड़ी जाए – कभी-कभी शांति, जीत से ज़्यादा कीमती होती है.!!
जो हमसे नफ़रत करता हो, हमें हिकारत की नजर से देखता हो

_उसके लिए सबसे बेह्तरीन अमल है _उसे इग्नोर कर देना, उसे माफ़ कर देना.

ऐसा करने से हम शांति और सुकून में रहते हैं और वो बेचैन.

बैर रखने वालों के सामने से मुस्करा कर निकल जाना _सबसे मज़ेदार होता है.

करके देखिए अपने दिल को सादा और सरल बना लीजिए, _सुकून में रहेंगे.

जो लोग बार बार आपकी शांति भंग करें, उनकी जिंदगी से बेहद शांति से निकल कर, उन्हें भी शांति की तलाश के लिए छोड़ दें..!!
अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, करो ऐसी व्यवस्था जहाँ जबरदस्ती मानसिक शारीरिक तनाव का दंश नहीं झेलेंगे.. _ ऐसे रिश्तों में रहने का चुनाव नहीं करेंगे जहां प्रेम, शांति और सम्मान न हो.!!
लोगों की वास्तविकता जानना कोई बड़ी बात नहीं है, आप बस उनके जीवन को देखिए,

_ वे किन चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं, किन चीजों को अच्छा कह रहे हैं और किन चीजों को बुरा, उनमें व्यर्थता का बोध है या नहीं, उनके जीवन में सुकून शांति है या नहीं..!!
एक बार समझदारी आने की देर है.. फिर इंसान हर उस चीज़ से दूरी बना लेता है..

_ जो उसका सुकून छीनना चाहती है.. फिर चाहे वह चीज़ उसे कितनी ही पसंद क्यों ना हो.!!

दुनिया में अगर सुकून से जीना है तो उन लोगों से बहस करना छोड़ दीजिए..

_ जो अपने झूठ को भी सच मानते हैं.!!

शांत रहना सिख जाओ…

_ क्योंकि अधिक बोलने वालों को दुनिया उतनी गम्भीरता से नहीं लेती…!!!

शांति के मार्ग पर चलें, शक्ति की राह पर नहीं.

_ एक शांति ही है जो अखंड है और पूरा अस्तित्व उसमें डूबा है.
_ शांति के बिना संगीत संभव नहीं है.
_ खूबसूरती शांति और मौन से आती है, शब्दों से नहीं.!!
जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है ‘खुद को बदल लें’.

_ क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है.
कुछ सवालों के जबाब तो चाहिए होते हैं, चाहे मूल्य कोई भी चुकाना पड़े..

_ फिर इसके लिए हो सकता है, उन सवालों के जबाब जानने के लिए..
_ आपको मानसिक या फिर शारीरिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़े,
_ पर जबाब जरूरी है, मन की शांति के लिए.!!
हम अपनी दशा और दृष्टिकोण बदल दें तो.. _ शायद वास्तविक शांति हमें ज़्यादा सस्ती और टिकाऊ मिल जाए.!!
दौलत कमाना आसान है, पर सुकून कमाना मुश्किल ;

_ असली अमीरी वही है जहाँ सिर तकिये पर रखते ही गहरी नींद आ जाए.!!

जितना शांत आप ख़ुद को रखते हैं,

_ उतना ही अच्छे से आप दूसरी चीज़ों के बारे में सोच सकते हैं.!!

एक समय बाद नकारात्मक चीजें धीरे-धीरे जीवन से दूर हो जाती हैं,

_ और रह जाता है तो ‘एक सुकून भरा एहसास’

“जब मन भीतर से थक जाता है — तब वो बाहर को देखने लगता है.

_ और जब भावनाएं बोझ बन जाती हैं, तब दूरी ही शांति बन जाती है”

कुछ लोग चोट भी देते हैं और मासूम भी बन जाते हैं,

_ शांत रहिए.. समय सबका सच उजागर कर देता है !!

जब आपका मूल्य बढ़े, तो उसकी पहचान शोर से नहीं, शांतिपूर्वक कार्यों से होती है,

_ जैसे कागज़ की मुद्रा कभी शोर नहीं करती.!!

चाहकर भी अगर कहीं सुकून ना मिले, तो मस्त होकर खुद में खो जाया करो..!!
यदि किसी भी चीज से आपकी शांति नष्ट होती है, तो यह बहुत महँगा है.
शांत रहें, क्यूंकि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता ; वक्त बदलता जरूर है.
अपनी आंतरिक स्थिरता, शांति और आनंद की दशा को फैलने दीजिए.
जीवन इतना अभिशप्त नहीं होना चाहिए कि उसे शांति से जी ही न सकें..!
शांत लोग सबसे मजबूत होते हैं, उनकी चुप्पी में भी वो ताकत होती है..
_ जो समय आने पर सब बदल देती है.!!
जिसके साथ सुकून बहुत मिलता है..

_ यकीन मानिए.. उसके साथ वक़्त ही बहुत कम मिलता है.!!

800 करोड़ से ज़्यादा लोग हैं दुनिया में, लेकिन सुकून के नाम पर बस कोई एक आध ही मिलता है जीवन में.!!
दूसरों के काम में रुचि न लेने से अधिक शांतिपूर्ण कुछ भी नहीं है.
ढूढों तो सुकून खुद में ही है, दूसरों में तो बस उलझनें ही मिलेगी !!
समय और शांति दोनों अनमोल हैं, इन्हें हर किसी पर खर्च नहीं किया जाता.
लगाव की पीड़ा से अलगाव का सुकून बेहतर है..!!

_ जो आपकी मानसिक शान्ति भंग करे, उससे बहस मत करो बल्कि उसे तत्काल Block करना सीखो.!!

लोगों को उनके चाहने पर छोड़ देने में ही शांति है.

_ किसी के जीवन में तब तक रहने का कोई मतलब नहीं.. जब तक वे आपको न चाहें.!!

जब विचार मिल जाए, तो शब्द रोक देना ही समझदारी होती है.

_ अब उसे जीना है.. समझाना नहीं.
‘शांत रहिए’.. जो होना है, अपने समय से होगा.!!
दुनिया को समझने से पहले, अपने भीतर थोड़ी शान्ति बनाना ज़रूरी है.!!
महापुरुषों ने महल को त्याग दिया शांति की तलाश में…..

_ और हम शांति को त्याग रहे हैं महलों की तलाश में….

सुकून के पल धन दौलत से नहीं ख़रीदे जा सकते, _

_ अगर ख़रीदे जाते तो आज कोई बेचैन नहीं रहता ..

शांति से किया गया विचार हमें भीतर से मजबूत बनाता है ;

_वहीँ शोर से उठी हुई बातें हमें कमज़ोर बनाती हैं..!!

आप लोगों को जितना कम जवाब देंगे ;

_ आप का जीवन उतना ज्यादा शांतिपूर्ण रहेगा..!!

वक्त अच्छा हो या बुरा.. हर परिस्थिति में ख़ुद को शांत रखना सीखो,

_ यह बात आपकी ज़िंदगी बदल देगी..!!

आप सुकून शांति में रह रहे हो तो इसका अर्थ ये नहीं कि..

_ ये दुनिया भी आपको सुकून शांति से रहने देगी.!!

आपकी ज़िन्दगी में जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में हर किसी को बताना छोड़ दीजिए,

_ “आप ज्यादा सुकून से रहोगे “

अपने जीवन के उन क्षणों का विश्लेषण करें.. जिन्होंने आपको शांति और सुकून का एहसास दिलाया..

_ लेकिन बाद में मानसिक अस्थिरता और तनाव का कारण बन गए.!!
सुकून ज़रूरी है, इसलिए समय रहते आप वो कीजिए, जिसमें आपको ख़ुशी महसूस हो.

_ वर्ना उम्र और वक्त निकल जाने के बाद अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता..!!
जिंदगी से जितना लोगो को कम कर दोगे, उतना ही ज्यादा सुकून महसूस करोगे.

_ खुद से ज्यादा कोई महत्वपूर्ण नहीं..!!
घर के सारे दरवाजे बंद करने से आप सुरक्षित हो जाओगे ? शांत हो जाओगे?

“शायद नहीं —
_ आप सुरक्षित तभी हो सकते हो.. जब अपने दिमाग के शैतान को बाहर ही छोड़ कर आओगे.
_ दिमाग ही शैतान हुआ तो फिर कहीं भी चले जाओ.. शांति नही मिलेगी.!!
जिंदगी में हजारों आवाजें सुनाई देंगी,
_ मगर ठहरना वहीं जहां दिल को सुकून और अपनापन महसूस हो.!!
काम ने नहीं, उलझन ने थकाया है… काम तो बस एक बार में हो जाता.

_ काम ख़त्म करना ज़रूरी है, पर अपनी शांति खोना ज़रूरी नहीं.!!
जिंदगी जीने के लिए अनेक तरीके हो सकते हैं मगर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,
_जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे..!
हम शांति नहीं सुख से रहते हैं, सुख और शांति में बड़ा अंतर है,

_ परंतु ज्यादातर समय सुख ही शांति लगती है पर होती नहीं है…
_ बात यह है कि सुख व्यक्ति से लेकर सामाजिकता तक जाता है पर शांति वैयक्तिक है…
_ अब क्योंकि समाज सुखमय दिखता है _जिससे वातावरण शांत दिखता है, पर वह शांत शांति नहीं है…
हम उन लोगों की प्रशंसा करते हैं जो फिल्मों में हीरो लड़ता है, बचाता है और बचाव करता है.

लेकिन एक तरह से यह अजीब है. हम उन लोगों की प्रशंसा क्यों नहीं करते_ जो क्रोध, द्वेष और दूसरों को हानि नहीं कर रहे हैं ?

_ जो शांति स्थापित करने की कोशिश करते हैं ?

“कौन आगे-कौन पीछे — ये छोटी ऊँचाइयाँ हैं..

_ सच्ची ऊँचाई तो मन की शांति है — जैसे जीवन एक यात्रा है..
_ हम एक स्टेशन उतरते हैं, अपना अनुभव बटोरकर आगे बढ़ जाते हैं.
_ जो काम का नहीं — उसे रास्ते में ही छोड़ देना है”
तर्क सही भी हो, तो भी कभी-कभी अपनी बात सही सिद्ध करने से अधिक आवश्यक है, जीवन में शान्ति..

_ बहस करने से बेहतर है, चुप रहा जाए.!!
शान्ति चाहिए तो कुछ चीजों, बातों, प्रश्नों और लोगों को मुस्कुरा कर टाल दिया करो.!!
मन की शांति के लिए यह स्वीकार कर लें कि सबकी पसंद होना मुमकिन नहीं ;

_ कुछ लोगों की नफरत का बस इतना सा मतलब है कि आप अपनी राह पर सही हैं.
हालात कितने भी मुश्किल हों, शांत रहो और डटे रहो..
_ क्योंकि जब हिम्मत मजबूत होती है, तो हालात भी झुक जाते हैं.!!
जिंदगी जीने के लिए कई तरीके हो सकते हैं पर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,

_ जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे.!
क्यों कुछ लोग शांति में भी अशांति ढूंढते हैं ?

_ कुछ लोगों का मन हमेशा अशांत रहता है. क्योंकि उनके अंदर ही Restless होता है.
_ अगर अंदर Noise तो बाहर की शांति भी uncomfortable लगेगी.
_ वे शांति को समझ ही नहीं पाते, उन्हें लगता है कि हर जगह कोई न कोई संघर्ष होना चाहिए, क्योंकि वे उसी माहौल में जीने के आदी हो चुके होते हैं.
_ ऐसे लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों में विवाद ढूंढते हैं, क्योंकि उनके लिए वही सामान्य बन चुका होता है.!!
मैं अपनी ‘मन की शांति’ चुन रहा हूं.

_ क्योंकि यही वह है जिसकी मुझे ‘सचमुच’ जरूरत है.
_ मुझे और नाटक की जरूरत नहीं है.
_ मुझे ऐसा महसूस कराने वाले लोगों की जरूरत नहीं है कि मैं काफी अच्छा नहीं हूं.
_ मुझे झगड़े, बहस और ‘नकली’ कनेक्शन की जरूरत नहीं है.
_ अभी मैं वह नहीं हूं जो मैं होना चाहता हूं ;
_लेकिन मुझे गर्व है कि मैं वह नहीं हूं _जो मैं हुआ करता था..!
सही राह वही है जहाँ मन शांत रहे, भले दुनिया उसे समझ न पाए.!!
_ मन की शांति सबसे बड़ी चीज़ है, पर इसे पाने की क़ीमत भी कम नहीं होती..
_ इसके लिए कई रिश्ते छूट जाते हैं, कई उम्मीदें पीछे रह जाती हैं, और बहुत सी बातें अनकही ही दफ़न हो जाती हैं..
_ लेकिन जब भीतर का शोर थम जाता है, तो समझ आता है जो खोया, वह बोझ था और जो बचा, वही सुकून है.!!
एक बात हमेशा याद रखें : अशांत पानी में कभी अपना चेहरा साफ नहीं दिखता, वैसे ही अशांत मन में कभी सही रास्ता नहीं दिखता.
_ ​इसलिए जब भी उलझन में हों, थोड़ा ब्रेक लें, लंबी सांस लें और मन शांत होने के बाद ही कोई कदम उठाएं.!!
जो कोई भी मन की शांति और स्वास्थ्य को महत्व देता है,

_वह हर संभव सर्वोत्तम जीवन जीएगा.!!
_मन की अच्छी व्यवस्था का नाम ही शांति है.!!
_हम जो कहते और करते हैं, उनमें से अधिकांश आवश्यक नहीं है ;
_ यदि आप इसे समाप्त कर सकते हैं, तो आपके पास अधिक समय और अधिक शांति होगी.
_ हर क्षण अपने आप से पूछो, ‘क्या यह आवश्यक है ?’
आज खुद से वादा करते हैं कि, कैसी भी बात हो, लोगों का कैसा भी व्यवहार हो; हम शांति और खुशी से रिस्पॉन्ड करेंगे.

_ कोई भी हमारी भावनाओं के लिए जिम्मेवार नहीं होता है और ना ही जैसा हम चाहते हैं, वैसा फील करा सकता है.
_ हम खुद ही अपने विचार, भावनाओं और व्यवहार के लिए जिम्मेवार हैं, नाकि कोई दूसरा.
_ उसने मेरे साथ गलत किया.. इसलिए मैं उदास हूँ… उसके व्यवहार की वजह से मुझे क्रोध आया आदि.. हमारी शब्दावली का हिस्सा नहीं होने चाहिए.!!
सिर्फ दुनिया में अमन, चैन और सुकून की दुआ कीजिए,

_ किसी का समर्थन किसी का विरोध करने से कुछ हासिल न होगा,
_ क्योंकि इंसानियत से बढ़ कर कुछ नहीं है..
_ और जब इंसानियत ही नहीं हमारे अंदर ..तो हम कुछ भी नहीं हैँ.
_ इस जिंदगी की कब शाम आ जाए और कब अंधेरों में गुम हो जाए किसी को नहीं पता…
_ इसलिए मुश्किल वक्त में सभी के लिए दुआएं कीजिए,
_ जो गलत राह पर हैं ..उन्हें सही राह पर चलने की दुआ कीजिए…
_ हर इंसान को अपने कर्मों का फल इसी दुनिया में ही मिलना है…
_ बेशक रब सब जानता है…
एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो लोग अंदर से खाली होते हैं, वे बाहर से बहुत ज़्यादा शोर करते हैं. _ जिन्हें सच में शांति मिल गई होती है, उन्हें दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. _ उनकी जिंदगी खुद एक उदाहरण बन जाती है.!!
अगर जीवन में खुश रहना है तो.. “जो मिला है उसको समझो ज्यादा”

_ वरना दौड़ कभी खत्म नहीं होगी..
_ और अगर दौड़ खत्म नहीं होगी तो कभी सुकून प्राप्त नहीं होगा.!!
“किसी को कुछ साबित नही करना है”

_ किसी मे कोई सुधार की कोशिश नही करना है.
_ सिर्फ अपना शांतिपूर्ण जीवन जीना है और चुपचाप आगे बढ़ना है.!!
हर बात में उलझना और दिल पर लेना ज़रूरी नहीं ;
_ हर कहने वाले को जवाब देना और उलझने वाले से उलझना भी ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ बातों को छोड़ देना चाहिए, ध्यान नहीं देना चाहिए..
_ कुछ बातें इतनी भी ज़रूरी नहीं होती कि उनमें पड़ कर अपनी मानसिक शांति को ख़त्म कर दिया जाए.!!
हमने कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों से खुद को इस कदर बाँध लिया है, कि अब सच की हल्की सी छींट भी जब हमारे ज़ेहन को छूती है, तो वो सच नहीं..- एक बदतमीज़ दखल सा महसूस होता है, जो हमारे बनाए हुए भ्रम की शांति को तोड़ने की कोशिश कर रहा हो.!!
कभी भी सबको खुश नहीं रखा जा सकता, हर किसी को खुश रखना असंभव है.

_ कुछ लोग दूसरों के विचारों या ज्ञान में अच्छाई देखने के बजाय, सिर्फ़ आलोचना करने का अवसर खोजते हैं.
_ ऐसे लोगों से दूर रहना आत्म-सम्मान का संकेत है.
_ शांति तभी मिलती है जब हम ये समझ लें कि सबको प्रसन्न करना हमारी जिम्मेदारी नहीं.!!
मैं जिस किसी से भी मिलता हूं,

_ वह किसी न किसी बात को लेकर दुखी और निराश दिखता है;
_ ऐसा महसूस होता है जैसे किसी के पास जो कुछ भी है.. उससे वह खुश नहीं है.
_इससे मुझे आश्चर्य होता है कि हमें पहले ये अधूरी भावनाएँ क्यों दी गईं ?
_ और यदि दिया गया है, तो किसी को वह क्यों नहीं मिल रहा जो वह चाहता है..
_इंसानों को हमेशा कुछ शांतिपूर्ण खोजने के लिए खो जाना पड़ता है,
_ लेकिन जीवन के अंत में उन्हें हमेशा एहसास होता है कि _शांति हमेशा उनके बगल में किसी चीज़ या किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में मौजूद थी _जिसकी उन्होंने सराहना नहीं की थी.
_ मैं हर किसी पर प्रतिक्रिया करने और जवाब देने में इतना समय बर्बाद कर देता था कि मेरे जीवन की कोई दिशा ही नहीं रह जाती थी.
_ अन्य लोगों का जीवन, समस्याएँ और इच्छाएँ मेरे जीवन की दिशा निर्धारित करती हैं.
_ एक बार जब मुझे एहसास हुआ कि मैं जो चाहता हूं उसके बारे में सोचना और पहचानना मेरे लिए ठीक है,
_तो मेरे जीवन में उल्लेखनीय चीजें घटित होने लगीं.
एक शांत व्यक्ति के लिए ये दुनिया हमेशा भारी रहती है.

_ क्योंकि जिन्हें जीने का तरीका नहीं आता, वे सबसे पहले उसी को disturb करते हैं – जो चुपचाप अपनी राह चल रहा होता है.
_ पर यह आपकी गलती नहीं है, यह दुनिया की गति है और आपका मन इस दुनिया से दो कदम आगे है — इसलिए टकराव ज्यादा लगता है.!!
मन अब उस मोड़ पर है, जहाँ गलती चाहे किसी की भी हो, शोर न उठे.. बस यही जरूरी है,

_ इसलिए अब सच के बजाय शांति चुनता हूं, और खुद को ही सुकून देता हूँ…!
मुझे अब किसी भी चीज़ से ज़्यादा शांति पसंद है.

_ इसलिए अगर कोई मेरे जीवन में उथल-पुथल मचा रहा है, तो मैं उसे सुलझाने के बजाय.. उसे छोड़कर चले जाने को प्राथमिकता दूँगा.!!
मन मोह में भटकता रहा… पर छोड़ देने पर ही शांति मिली..

– जिसे पाने लिए जीवन भर तरसता रहा, उसे छोड़ देने में राहत मिल गई.!!
“इतना सुकून हो कि बेचैनी आए भी, तो मुझे अपने साथ बहाकर न ले जाए”

_ “सुकून का मतलब समस्याओं का खत्म हो जाना नहीं,
बल्कि समस्याओं के बीच भी अपने भीतर लौट आने की क्षमता है”
जो लोग बहुत शान्त नज़र आते हैं, ज़रूरी नहीं कि वे सुखी हों.
_ वे असहाय और मजबूर भी हो सकते हैं.
_ अपनी मांगें मनवाने के लिए चिल्ला-चिल्ला कर थके हुए लोग मांगें पूरी न होने पर अंततः शान्त हो कर बैठ जाते हैं.!!
अगर कोई चीज़ और कोई लोग से आपकी शान्ति छीन रही है, तो वहाँ दूरी रखना ही समझदारी है, _ वहां involvement कम करना ही maturity है, selfishness नहीं.!!
‘शांति कोई लक्ज़री नहीं, ज़रूरत है’

_ हमारा नर्वस सिस्टम लगातार लड़ाई–भागदौड़ (fight or flight) में रहता है.
_ अगर उसे शांति नहीं मिलती, तो बेचैनी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान, भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ती जाती है.
_ जो व्यक्ति सच की खोज में है, वह बाहरी शोर से ज़्यादा अपने भीतर की शांति की रक्षा करता है.
_ हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, हर बहस में नहीं कूदता, हर रिश्ते को हर वक़्त ढोता नहीं.
_ रातें सिर्फ़ सोने के लिए नहीं होतीं, वे मन की मरम्मत का समय होती हैं.
_ जो अपने भीतर की शांति बचा लेता है, वही सच में आगे बढ़ता है.
_ जो अपनी रातों की शांति बचाता है, वही भीतर की स्थिरता बचाता है.
Fix your nights — your nervous system needs peace; a seeker protects their inner stillness.
मैं आत्मनिर्भर हूँ, और मैं ऐसा ही बनना चाहता हूँ, मुझे किसी ऐसे व्यक्ति की क्या ज़रूरत है जो मेरी शांति बन सके ?
I am self reliant, and I want to be, why do I need someone to be my peace.
_ मैं आत्मनिर्भर हूँ और रहना चाहता हूँ.
_ मुझे किसी और से अपनी शांति की उम्मीद नहीं रखनी.
_ मेरी शांति मुझसे है —
_ मेरी सोच, मेरी भावनाएँ, और मेरा संतुलन.
_ मैंने समझ लिया है कि –
_ खाली लोग सिर्फ खालीपन बाँटते हैं,
_ वे देने के लिए कुछ नहीं रखते.
_ मैं उनकी जगह खुद को क्यों खोऊँ ?
_ अब मैं खुद अपनी शांति बनूँगा, अपने भीतर की रोशनी से.!!
शांति के बारे में सबसे बड़ी बात यह है कि जब आपके पास यह होती है, तो आपकी आत्मा स्थिर और अडिग होती है, ; जब आपके पास शांति होती है, तो कोई भी चीज आपके दिल को हिला नहीं सकती, ; आप ऐसे लोगों के साथ व्यवहार कर सकते हैं जो आपको पसंद नहीं करते हैं और फिर भी उनकी आत्मा से प्रभावित नहीं होते हैं.

The great thing about peace is that, when you have it, your soul is anchored and unwavering. When you have peace, nothing can rock your core. You can deal with people who don’t like you and still not be influenced by their spirit.

“कोई भी आपकी अनुमति के बिना आपकी भावनाओं को ट्रिगर नहीं कर सकता है। शांत रहना सीखें और कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाहर क्या हो रहा है.”

“Nobody can trigger your emotions without your permission. Learn to be calm and centered no matter what’s happening outside of you.”

सुविचार – सत्य – सच – सच्चा – सच्चाई – Truth – 091

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” सत्य पर आधारित कुछ सुविचार प्रस्तुत हैं.”

1. सत्य बोलने वाला व्यक्ति मानसिक रोगों से बचा रहता है.
2. सत्य परेशान हो सकता हैं परन्तु पराजित नही हो सकता.
3. सत्य बोलने के लिए कोई तैयारी नही करनी पड़ती, वह अपने आप निकल जाता है.
4. दोपहर तक बिक गया बाज़ार का हर एक झूठ शाम तक हमें कचोटता रहता है.
5. सत्य को छुपाने का प्रयत्न निरर्थक होता है. वह कभी न कभी सामने आ ही जाता है.
6. सच बोलना कष्ट देता है पर बड़े मुसीबतों से बड़े आसानी से बचाता भी है.
7. सत्य वह दौलत हैं जिसे पहले खर्च करो और ज़िन्दगीभर आनन्द लो.
8. सत्य की विजय दीर्घकालिक होती है.
9. सत्य बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता हैं कि उसे याद नही रखना पड़ता.
10. सत्य में शक्ति होती हैं जो व्यक्ति को हर मुसीबत से बचाती है.
11. मित्र के द्वारा बोला गया कड़वा सत्य सदा ही हितकर होता है.
12. जिसकी मित्रता सत्य से है उसे कोई पराजित नही कर सकता है.
13. सत्य की भूख सबको होती हैं लेकिन जब इसे परोसा जाता है तो बहुत कम लोगो को इसका स्वाद अच्छा लगता है.
14. जिस सत्य के बोलने से किसी का भला हो उसे बोलने में कभी-भी हिचकना नही चाहिए.
15. सत्य का स्वाद कड़वा होता हैं पर स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है.
16. भरम में जीने से अच्छा है, सच का सामना किया जाए.
सत्य को जान लेने के बाद, उसका त्याग नहीं किया जा सकता, उसे अंगीकार करना ही होता है.!!
“जो खुद से सच बोलता है, उसे दुनिया का झूठ छू भी नहीं सकता.!!”
सच चाहे कितना भी तकलीफदेह हो.. लेकिन झूठ की आरामदायक चादर में जीना, कभी किसी समस्या का हल नहीं होता है.
“सत्य की एक झलक ही काफी होती है..
_ पर असर पूरी जिंदगी का नजरिया बदल देता है”
अगर मैं सत्य पर टिक गया, तो अकेला होकर भी अनंत का सहारा मेरे साथ होगा.!
_ चाहे कोई जॉब से निकाले या घर से, सत्य का खोजी परवाह नहीं करता है.!!
सत्य कोई सुने न सुने _ आप सुनते व सुनाते रहिए ; क्योंकि एक दिन यही अभ्यास आप के व्यक्तित्व को इतना निखार देगा कि बाक़ी सब लोगों के पास करतल ध्वनि करने के सिवाए और कोई विकल्प नहीं होगा.
सत्य इसलिए नहीं बोलना कि लाभ होगा _ न ही इसलिए कि सत्य बोलने से पीड़ा मिलती है, _ बल्कि आप सत्य बोलने का आनंद लो..!!
सच्चाई का अपमान होता है, जब हम झूठ बोलते हैं और प्रत्येक झूठ सत्य का ऋणी होता है ; _ जल्दी या बाद में, उस कर्ज का भुगतान किया जाता है.
सत्य बोलने का फायदा ये होता है कि जो झूठ के आदी हैं वो आपसे दूर हो जाते हैं ;
_ सत्य कड़वा उन्ही को लगता है जो झूठ सुनने के आदी हों !!
मूर्ख वह है जो सत्य को जानता है, सत्य को देखता है, लेकिन फिर भी झूठ पर विश्वास करता है.
Stupid is knowing the truth, seeing the truth, but still believing the lies.
सत्य से कभी कोई आहत नहीं हुआ; लेकिन जो अज्ञानता में बना रहता है वह घायल होता है.

_ ” सत्य उन लोगों को घृणा जैसा लगता है _जो सत्य को संभाल नहीं सकते.!!”
_ ” सब कुछ बीत जाता है, केवल सत्य रह जाता है.”
_ ” सच बोलने के लिए केवल वही लोग आपसे नाराज़ हैं _जो झूठ बोल रहे हैं.”
हम दुनिया को जैसी है, वैसी नहीं देखते ;

_हम दुनिया को वैसा देखते हैं, जैसे हम देखना चाहते हैं
_ हमारी दृष्टि बदलती रहती है पर सच उससे कहीं बड़ा होता है.!!
सत्य के लिए अपने सुख को भी ठोकर मारनी पड़ती है, _

_ और हर एक में ___ इतना साहस कहाँ …

“– जो सत्य की तलाश करता है वह खुद को जोखिम में डालता है..–“

**जो शोर मचा कर prove हो वो अक्सर unreal होता है.

_ जो चुपचाप असर छोड़ दे वही real होता है.!!
बोलने कहाँ देते हैं हम किसी को ?? सच कोई बोल भी जाये तो जल्दी से उसे चुप करा देते हैं…

_ अंदर ही अंदर मर जाओ पर जुबान से कोई शिकायत ना करो..!!
छल की दुनिया में कोई जीत स्थायी नहीं होती..

_ लेकिन अगर आप सच्चाई से जियोगे, तो हर दिन आपकी जीत होगी.. सुकून के रूप में.!!
सच सबके सामने होता है…- पर उसे वही उठाता है, जो तैयार होता है.
बुरा लग जाये ऐसा ” सत्य ” जरूर बोलिए,

_ परंतु ” सत्य ” लगे ऐसा ” झूठ ” कभी ना बोलिए.

आप अपने दिल को वह सच बताने दो..

_ जिसे आप स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो.

आप सच का साथ दो या न दो ..ये बाद की बात है.!

_ आप झूठ का साथ नहीं दोगे ..यही फैसला बहुत है.!!

समय सत्य के सिवाय सब चीजों को कुतर खाता है,

_ झूठ, चालाकी, और बेईमानी की उम्र बहुत ही कम होती है !!

जो झूठ है वह दिल को परेशान करता है,

_ लेकिन सच्चाई खुशी से शांति लाता है.!!

“भ्रम पास आने पर फीका पड़ जाता है,

_ सत्य पास आने पर और गहरा हो जाता है”
“ज़िंदगी तो हर पल अपना सच कहती रहती है,

_ सुनने वाला मन ही अपनी कहानियों में उलझा रहता है”
जो अंदर सच के साथ जीता है, उसे बाहर का रास्ता ढूंढ़ना नहीं पड़ता.
_ जीवन बाहर का रास्ता खुद बना लेगा.!
“किसी और की वजह से गिल्ट मे मत जियो..

हर असंतुष्ट व्यक्ति के लिए स्वयं को दोषी मानना बंद करो.
_ अपने सत्य पर खड़े रहो और मुस्कराते हुए जीवन जियो.”
हालात चाहे जैसे भी हों, अगर आप सच्चे हो..तो एक दिन वक्त भी गवाही देगा कि आप गलत नहीं थे.!!
“सच एक ही होता है, पर हर किसी तक अलग रास्ते से पहुँचता है.”
सच बोलकर शायद सब साथ ना रहें.. पर कम से कम आईना देखते वक़्त आंखें नहीं झुकतीं.
अब यहाँ सब मैनेज है,, सत्य तो अब मैग्नीफाइंग ग्लास से भी नहीं दिखता.

_ हमारे इर्द -गिर्द कृत्रिम और बनावटी दुनियाँ बुन दी गई है,

_ समझ ही नहीं पाते कि क्या सच है और क्या झूठ ?

हम कितना भी दुनिया को जानने का दावा करें..

_ पर सच्चाई यही है कि दुनिया की बात छोड़ो हम ख़ुद को भी कहाँ जान पाते हैं.!!

कभी-कभी सत्य भी चुप हो जाता है..

_क्योंकि उसे पता होता है कि समय ही वो आवाज़ है, जो सबको सच्चाई दिखा देगा.!!

हर सच बोल देना भी ज़रूरी नहीं होता.. कब बोलना है, ये समझना भी एक wisdom है.!!

_ हर सच बोलना जरूरी नहीं… सही वक्त पर बोलना जरूरी है.!!

और फिर एक दिन हम इस झूठ की दुनिया मे, जहाँ हँसी से लेकर सारी बातें तक झूठी हैं,

_ इस दुनिया से निकलना भूल, इसमे जीना शुरू कर देंगे.. हमारी चेतना शून्य हो जाएगी, हम सिर्फ सत्य को देखेंगे.!!

सच बोलने वाला इंसान कहीं भी फिट नहीं बैठता..

_ क्योंकि आज के दौर में लोग मीठा झूठ सुनना पसंद करते हैं, कड़वा सच नहीं.!!

जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं, दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
तकलीफ तब होती है जब हम किसी से सच के पक्ष में खड़ा होने की उम्मीद करते हैं, _ मगर वे इतने स्वार्थी निकल जाते हैं कि मात्र सच भी नहीं बोल पाते.!!
सच को सच कहने से अगर लोगों का साथ छूट जाता है, तो ऐसा साथ छूट ही जाना चाहिए.!!
जितना सच से भागोगे.. उतनी ही तकलीफ़ ज्यादा होगी.._यही प्रकृति का नियम है.!!
जो इंसान अपने सच से भागता है, उसका सारा जीवन भागने में ही गुज़र जाता है..!!
ताकतवर वही होता है जो अकेले होकर भी सच का साथ नहीं छोड़ता.!!
जिन्हें सच में बोलना आता है, वे अक्सर खामोश रहना ही बेहतर समझते हैं.!!
सत्य जानकर भी असत्य के प्रति गहरा लगाव मानसिक गुलामी का संकेत है.!!
सच से आंख मिलाओ..
_ सच से आंख मिलाने वाला ही सही इंसान है.!!
कुछ झूठ बहुत हल्के होते हैं और सच बहुत भारी.!!
सत्य को जानें बिना कोई भी निर्णय उचित नहीं.!!
सच को देखना आसान नहीं होता, पर वहीँ से रास्ता शुरू होता है.!!
सच को याद नहीं रखना पड़ता..
‘Stress’ उन्हें होता है.. जिन्हें याद रखना पड़े कि किस से क्या झूठ बोला था.!!
“इस उलझी हुई दुनिया में समझदारी की बात करना गुनाह है.
_ लोग अपने-अपने बनाए झूठों में इतने रमे रहते हैं कि सच उन्हें चुभ जाता है.!”
सत्य का सामना करने के लिए विनम्रता चाहिए..

_ क्योंकि अहंकार के रहते सच दिखाई ही नहीं देता.!!

जब सामने वाला खुद को सही साबित करने में इतना खो जाए कि आपकी सच्चाई ही ना देख पाए..

_ तो उस वक्त चुप रहना ही समझदारी है.!!

झूठ का झुंड लिपटा हुआ था मुझसे, एक सच बोलते ही सब हवा हो गए.!

_ अगर आप सत्य के साथ हो तो आपको व्यक्ति का साथ छोड़ना पड़ेगा, चाहे वो जो हो..

_ अकेले हुए बिना सत्य का साथ निभता नहीं.. इतना अकेला कि स्वयं को भी छोड़ देना होता है.!!

सच को कह न पाना भी कहीं न कहीं झूठ ही बन जाता है..

_ फर्क सिर्फ़ इतना है कि हम झूठ बोलते नहीं, बल्कि सच को दबाने का चुनाव करते हैं..
_ लोग अपने हित के मुताबिक़ सच और झूठ की परिभाषाएँ गढ़ लेते हैं, ताकि उनके फैसले उन्हें ही सही लगें.!!
कभी- कभी सच्चाई की जीत नहीं होती, प्रमाण की जीत होती है, और.. _जरूरी नहीं कि सत्य के पास प्रमाण हो..
अगर चुनना पड़े तो हमेशा सच को चुनो क्योंकि..
_ झूठ पल भर का सुख देता है, और सच उम्रभर का सम्मान.!!
सच हमेशा सीधा, आसान और क्लियर होता है, वह कुछ छुपाने की कोशिश नहीं करता.!!
धूल की तरह उड़ती है अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
एक सत्य यह है की :- “अगर जिन्दगी इतनी अच्छी होती तो हम इस दुनिया में रोते- रोते हुए न आते…..!!

मगर एक मीठा सत्य यह भी है की :- “अगर यह जिन्दगी बुरी होती तो जाते-जाते लोगों को रुलाकर न जाते….!!

सच्चाई भले देर से चमके, पर नियति उसे जरूर स्वीकार करती है..

_ छल करने वाले कभी मंज़िल तक नहीं पहुँचते.!!

कुछ लोग सच्चाई देखना नहीं चाहते और सच नहीं बताना चाहते.

_ जो दिख रहा है ..वह कुछ और बता रहे हैं.!!

एक झूठ, सौ झूठ बुलवाएगा.!

_ आप सच बोलना, समझने वाला समझ जाएगा..!!

झूठ के फलों को ही हम चखते हैं,

_ सत्य के फलों को चखना तो दूर….हम इसके बागीचे के आसपास भी.. नही फटकना चाहते हैं..

एक सच्चा व्यक्ति अनजाने में गलतियाँ कर सकता है,
_ लेकिन उसका किसी को भी नुकसान पहुँचाने का ज़रा सा भी इरादा नहीं होता,!!
कभी दिल इतना मासूम था कि जादू भी सच्चा लगता था..

_ अब ज़माना ऐसा हो गया है कि सच्चाई पर भी भरोसा नहीं होता.!!

जो व्यक्ति सफलतापूर्वक अपने झूठ को सच साबित कर सकता है, उससे बड़ा असफल व्यक्ति दूसरा नहीं होता.. क्योंकि अंततः सच ही जीवन में काम आता है.

_ यदि आप सच बोलने की महत्ता नहीं समझते तो आपसे बड़ा दुर्भाग्यशाली अन्य कोई नहीं है.
दर्द तो तब होता है जब सच्चाई को लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं,
_ और झूठ को बिना सोचे-समझे अपना लेते हैं.!!
सत्य को स्वीकार करने का अल्पकालिक दर्द,

_ एक भरम को मानने के दीर्घकालिक दर्द से कहीं बेहतर है !

जो आदमी सच से भागता है, झूठ में जीता है.. _ उसका अंजाम एक ही होता है..- इज़्ज़त, भरोसा और भविष्य तीनों का नुकसान.!!
जो सच बोलता है, वह अकेला नहीं होता,

_ लेकिन सच्चाई के साथ खड़ा होने की हिम्मत रखना जरूरी है.

लोग सोचते हैं कि उनके बिना दुनिया रुक जाएगी.. पर सच्चाई ये है कि वक्त सबको जीना भी सिखा देता है और आगे बढ़ना भी.!!
अगर व्यक्ति सच बोलता है तो लोग उस पर और उसकी बातों पर भरोसा करते हैं.

_ जो सत्य बोलता है उसे सांसारिक परेशानियां कम आती हैं और उसकी ज़िंदगी में बेफिक्री हुआ करती है.

सच्चे लोग गलती कर सकते हैं, पर जानबूझकर किसी को तकलीफ नहीं देते.!!
“जीवन का लक्ष्य सुनिश्चित करना अस्तित्व को सत्य में बदलने का पहला कदम है”
सच्चाई हमेशा खामोश रहने वाले इंसान के अंदर ही मिलती है, झूठ बोलने वाले तो हमेशा शोर ही मचाते हैं.
आपका असली हितैषी वही है.. जो आपको सच्चाई बताने का साहस रखता है.!!
लोग झूठों से इतने प्रभावित हैं कि सच बोलने वाले की एक भी बात मानी नहीं जाती.!!
जब आपको पूरा सच पता ही ना हो तो.. अपनी जुबान पर काबू रखना सीख लीजिए.!!
सच को बोलने से जब चुप कराया जाता है तो,, फिर इंसान खामोश हो जाता है.!!
हम झूठ बोल कर गर्व करने वाले और सच बोलकर शर्मिंदा होने वाले लोग हैं..
“सच जब भी आएगा, _अपने साथ बड़ी सरलता की खुशबू लेकर आएगा..!!
और वो जो सच की तलाश में निकले ही नहीं, _” वो झूठ के शिकार हो गए..!!”
धूल की तरह उड़ती हैं अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
लोग दूसरों का सच जानना चाहते हैं, पर अपने बारे में, सच सुनना पसंद नहीं करते.
सच एक तलवार है, जो सबसे पहले उन संबंधों को काटती है.. जो छलावे से बंधे होते हैं.!!
हम सत्य नहीं ढूंढ़ते, हम अपनी सुविधा अनुसार की बातें ढूंढ़ते हैं.!!
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अफवाहों पर भरोसा करने वाले.. कभी सच्चाई तक नहीं पहुंचते.!!
“….ये दुनिया ऐसी ही है, सच को लोग पसंद करते हैं _लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते..”

_ फिर भी बाहर के झूठ के बीच भी अपने सत्य में स्थिर रहना, बिना असहज हुए.!!

“लोग आते-जाते रहेंगे, पर मेरा असली सफ़र तो भीतर है.

_ वहीं मुझे अपनी सच्चाई, अपना सहारा और अपनी शांति मिलती है.”
विश्वास सच बोलने पर बनता है, न कि लोगों को यह बताने पर कि _वे क्या सुनना चाहते हैं.
कुछ बातें कभी सुनी ही नहीं गयीं.. क्योंकि वो सत्यता से परिपूर्ण थी.!
आप जीवन के उन सत्यों से दूर भटक रहे हो, जहां से होकर ही आपको गुजरना होगा.!!
घबराना नहीं कभी, क्योंकि सत्य की गाडी में बैठोगे तो कष्ट-मुसीबत के स्टेशन तो आते ही रहेंगे.!!
सच्चाई को छुपाने के लिए झूठ को जोर-जोर से बोला जाता है, फिर भी सच कभी नहीं छुप सकता..!!
कुछ बातों पर विश्वास किया जाता है क्योंकि वे सत्य हैं, लेकिन कई बातों पर केवल इसलिए विश्वास किया जाता है _क्योंकि उन्हें बार-बार कहा गया है.!
ये दुनिया ऐसी ही है.. लोग सच को पसंद तो करते हैं, लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते.!!
सत्य प्रतीक्षा कर सकता है, _ क्योंकि वह लंबा जीवन जीता है !!
जब तक हम सत्य से भागते है, नहीं समझ पाते स्वयं को न वर्तमान को .!!
बात बात पर व्यंग्य करने वाले व्यंग्य ही करते रह जाते है, सत्य से दूर हो जाते हैं.
फरेब की महफ़िल थी और मैं सच बोल बैठा, नमक के शहर में ज़ख्म खोल बैठा.!!
जो लोग आपको मीठे झूठ के बजाय कड़वा सच बताते हैं तो उनका सम्मान करें.!!
हम इसीलिए सच नहीं देखते कि हमारा खुद के प्रति जो भ्रम है, वह टूट न जाए.!!
जब हम सच के साथ होते हैं तो.. मन, शरीर सब एक रहस्यमय ऊर्जा से भर जाता है.!!
जहाँ सच्चाई मर जाए, वहाँ मुस्कान मुखौटा और कसम दिखावा बन जाती है.

जब आप सच्चे बने रहते हो तब आप उन लोगों को खो देते हो, जो आपके लायक नहीं होते..!!

“सच को किसी सबूत की जरुरत नहीं होती, और झूठ ज्यादा देर छिप नहीं सकता”

_ शुद्ध सोने को जंग नहीं लगता, डरना उन्हें चाहिए जो पीतल होकर सोने का नाटक कर रहे हैं.!!

मीठे बोल हर बार सच्चाई का संकेत नहीं होते,
_ कई बार ज़हर भी शहद की तरह परोसा जाता है.!!
कमजोर मानसिकता वालों को सच दिखा दो तो वे बिलबिला जाते हैं.!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
सत्य से भाग सकते हैं हम, लेकिन उसे झुठला नहीं सकते.!!
बहुत से सत्य जानकर भी _ अनजान रहना चाहिए..!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
अगर मुझे सत्य के अलावा कुछ चाहिए _ तो मुझे केवल कुछ मिलेगा ” सत्य नहीं “
उचित अनुचित की फिक्र किसको है.

_ जिसकी खोपड़ी में उसकी परम्परा से जो भर दिया गया है, वह आंख बंद करके उसी का समर्थन करता रहता है.
_ अगर जरा भी आंख खोल ले या अपने ही जीवन में झाँक ले तो सच दिख जाएगा.!!
अपने जीवन में स्पष्टता लाने का सबसे सशक्त तरीका — सच्चाई को बोले देना होता है.

_ अच्छे और सच्चे लोगों को साथ रखना है तो सीधे स्पष्ट बोलिए,
_ जो लोग सच्चे होंगे, वे आपकी सच्चाई को समझेंगे और आपके साथ रहेंगे;
_ बाकी, जिन्हें आपकी सच्चाई चुभती है, उनका जाना ही सही होता है.
“अपने जीवन में स्पष्टता से बोलने की हिम्मत रखें, भले ही उससे आपके आस-पास लोग कम हो जाएँ ?”
अपना पक्ष सही रखो और अपने सत्य पर विश्वास बनाये रखो, यही आत्म निष्ठा है.

_ बाकी हर कोई अंतिम साँस तक साथ नहीं चल सकता, पुराना जाएगा, तभी नया आएगा.
_ अगर आप ग़लत नहीं हो तो कभी भी अफ़सोस मत करो.!!
सच का सबसे बड़ा दुश्मन झूठ नहीं, बल्कि वो इंसान होता है..

_ जो सच बोलने वाले को ही गलत साबित करने पर तुला हो.!!

हम सही रास्ते चलते हैं, फिर भी – जीवन में समस्याएं आती हैं, लोग विघ्न डालते हैं और कोई भी साथ नहीं देता ;
_ सिर्फ याद रखना – सत्य की नाव हिलती है, डोलती है, लेकिन कभी डूबती नहीं..
कभी-कभी आपको उनको सुनने की ज़रूरत नहीं होती है, कि वे अपने लिए क्या कहते हैं,
_क्योंकि उनके कार्य पहले ही सच बोल देते हैं.!!
जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं,

_दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
जब आप सच बोल कर अपने लिए स्टैंड लेने लगोगे,
_ तब सबसे पहले आपके अपनों में छुपे,,,पराये.. आप से दूरी बनाएँगे !!
ये वो दुनिया है जहाँ झूठ छुपाने के लिए,

_लोग सच्चाई को सूली पे चढ़ा देते हैं..!!
सच की आवाज़ में एक अलग ही खनक होती है, साहस होता है, शौर्य होता है ;

_ जबकि झूठ की आवाज़ में एक बनावटीपन, भय और दबाव !!
तकलीफ तब होती है जब हम किसी खास से सच के पक्ष में खड़ा होने की उम्मीद करते हैं,
_ मगर वे इतने स्वार्थी निकल जाते हैं कि मात्र सच भी नहीं बोल पाते, न ही परोक्ष रूप से समर्थन देते हैं.!!
उसका दुर्भाग्य कम है, जिसको कोई मिला ही नहीं ऐसा जो उसे राह दिखा सके और सच बता सके !

पर जिसको कोई मिले ऐसा _ जो राह दिखा सके और सच बता सके, और वो उसको घर के दरवाज़े पर ही रोक दे,_

_ उससे बड़ा अभागा कोई दूसरा नहीं होगा..

हर सच्चा इंसान अपने जीवन में एक न एक बार उस मोड़ पर जरूर आता है..

_ जहाँ उसे लगता है कि क्या वाकई सच्चे होने का कोई मोल है ?
_ लेकिन समय धीरे-धीरे उन्हें जवाब देता है — हाँ, है.. शायद तुरंत नहीं, पर अंत में सच ही जीतता है.
_ क्योंकि सच वक़्त मांगता है, लेकिन झूठ कीमत..!!
सत्य की राह…

अगर हम तथ्य पूर्ण और सच बातों से बचते हैं और इनका सामना नहीं करना चाहते हैं तो यकीं मानिए की कहीं न कहीं हम असत्य से प्रभावित हैं या असत्य का इस्तेमाल कर रहे हैं !!

अतः सत्य को पहचानिए इसे स्वीकार करिए, और सत्य की राह पर चलिए !

_ ये थोड़ी कष्टकर जरुर है, मगर लम्बी – स्थायी और अंततः सुख शान्ति प्रदान करने वाली है.

जो गलत होते हैं, छली एवम दगाबाज़ होते हैं ; वे हमेशा तेज़ आवाज़ में बात करते हैं ; _ ताकि सामने वाले को लगे की वह झूठ नहीं बोल रहा है.

_ लेकिन कोई किसी के सामने कितना भी फ़रेब कर ले, एक समय के बाद उजागर होना लाजमी है ; _ तेज़ आवाज़ें सत्य को नहीं ढँक सकती.!!

अक्सर जिस सच को हम पहले स्वीकार नहीं करना चाहते,

_ उस सच को स्वीकार करना हमे वक़्त ही सिखा देता है,
_ फिर एकदिन हम अचानक बचपना छोड़ कर बड़े हो जाते हैं,
_ पता नहीं सच को स्वीकार करने के इस खेल में आखिर तक नुकसान होता है या फायदा,
_ लेकिन हम अंदर ही अंदर बहुत कुछ मार कर जीना शुरु कर देते हैं…!
सच्चे इंसान को ठगने की कोशिश मत करना,
_ क्योंकि उसकी खामोशी में भी ऊपर वाले की दुआ और सच्चाई की ताक़त होती है.!!
आपके जीवन मे कौन कौन नकली है, यह पहचानना चाहते हो ?

_जो मिले उसी से सच की बात करो, जितने नकली होंगे वो भाग जाएंगे..

सत्य की सुंदरता केवल सच्चे लोग ही जानते हैं…_

_ और सच्चे होने से उनका आत्मविश्वास कभी नहीं गिरता ..!!

सत्य मौन इसलिए हो जाता है क्योंकि उसे पता है..

_ कुछ बातों का जवाब सिर्फ समय देगा..

गर हम सच के साथ हैं, तो हमारे पास असीमित शक्ति है ;

_सत्य से साथ छूटते ही, हमारी शक्ति भी हमसे कोसों दूर भाग जाती है..!

आज के दौर में विरले ही मिलेंगे,

_ ग़लत को ग़लत कहने का साहस रखने वाले, मीठी बातों से इतर सच कहने वाले.!!

“हर दिखने वाली चीज सत्य नहीं होती, यहां तक कि अपने कान से सुनी हुई चीज़ भी..

_ बहुत से सच ऐसे भी होते हैं, जिसे जीवन भर कोई जान नहीं पाता.!!”

हमनें अपने आपको कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों की जंजीरों से बाँधकर इतना गहरे डुबो दिया है कि अब स्थिति यह है कि..

_ यदि सत्य का एक छोटा सा छींटा भी मन पर पड़ता है तो भ्रम की सघन लहरें टूटने लगती हैं..
_ और तभी हमें एहसास होता है कि कोई तो है जो हमें वास्तविकता का आईना दिखा रहा है.
_ मगर क्या करें काल्पनिकता का यह संसार ही तो सबसे ज्यादा सुकून देता है…!
जो लोग हरदम बहुत अच्छे बने रहते है.. वे एक झूठी जिंदगी जीते हैं.

_ अगर सच के साथ जीना है तो आपको बहुतों के लिए बुरा बनना ही होगा..
_ या सज्जन बनो या सच्चा बनो, चुनाव आपका है.!!
शायद दुनिया की नज़र में दूसरों के हित की बात करने वाला इंसान हमेशा मूर्ख ही होता है.

_ क्योंकि जो अपने लिए नहीं, सबके लिए लड़ता है, उसे अक्सर सम्मान नहीं, ताने मिलते हैं..
_ फिर भी कुछ लोग रुकते नहीं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि अगर सब अपनी-अपनी खामोशी में जीते रहे, तो सच बोलने वाले हमेशा अकेले रह जाएँगे..
_ शायद उनकी सबसे बड़ी गलती बस इतनी होती है कि वे हर किसी का भला चाह लेते हैं.!!
दोपहर तक बिक गया इस शहर का हर एक झूठ
और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा रहा.!!
मनुष्य अनेक त्रुटियों के माध्यम से अप्राप्य सत्य तक पहुँचता है.

Man approaches the unattainable truth through a succession of errors.

यदि आप हर सांस के साथ प्रयास करते हैं तो ही आप सत्य को खोजने के पात्र हैं.

You deserve to find the truth only if you strive with every breath.

सत्य की प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा के माध्यम से संसार में जो कुछ भी आपको प्रिय था, उसे त्यागना ही त्याग है.

यह कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो बलपूर्वक प्राप्त की जाती है, बल्कि यह केवल सत्य और सत्य को चाहने का एक सहज परिणाम है.

Renunciation is giving up what you had held dear in the world through a burning aspiration for the realisation of the truth.

It is not a state that is achieved by force but it is a spontaneous result of wanting the truth and truth alone.

हमेशा अपने आप से सच्चे रहो, क्योंकि बहुत कम लोग हैं जो हमेशा आपके लिए सच्चे होंगे.

Always stay true to yourself, because there are very few people who will always be true to you.

कभी-कभी सबसे अच्छी चीज़ जो आप कर सकते हैं वह है अपना मुँह बंद रखना और अपनी आँखें खुली रखना. _ सत्य सदैव अंत में सामने आता है.

Sometimes the best thing you can do is keep your mouth shut and your eyes open. The truth always comes out in the end.

जब आपको किसी समस्या का कोई समाधान नहीं मिलता है, तो संभवतः यह कोई समस्या नहीं है _जिसे हल किया जाए,

_बल्कि यह एक सत्य है जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए.

When you find no solution to a problem, it’s probably not a problem to be solved, but a truth to be accepted.

Truth is like a surgery. It hurts but cures. Lie is like a pain killer. It gives instant relief but has side effects forever.

सत्य एक सर्जरी की तरह है. दर्द होता है लेकिन ठीक हो जाता है. _झूठ एक दर्दनिवारक की तरह है.

इससे तुरंत राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट हमेशा के लिए होते हैं.

हम अक्सर सोचते हैं कि जब किसी बात पर मतभेद हो, तो ज़रूर कोई न कोई गलत होगा..

_ लेकिन जरूरी नहीं कि मतभेद का मतलब गलती हो.
_ हो सकता है कि हम सभी एक ही सत्य को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हों.
_ सत्य किसी विशाल पर्वत की तरह होता है, हम सब उस पर्वत को अपनी-अपनी दिशा से निहारते हैं.
_ जिसे मैं देख रहा हूँ, वह मेरा अनुभव है, मेरी सच्चाई..
_ जिसे तुम देख रहे हो, वह तुम्हारा..
_ ये दोनों ही दृष्टिकोण अपने-अपने स्थान पर सही हो सकते हैं.
_ विचारों की विविधता कोई दुर्बलता नहीं, बल्कि समझदारी और सह-अस्तित्व की पहचान है.
_ जब हम किसी और की आँखों से देखना सीखते हैं, तभी हमारे भीतर सहानुभूति और समझ का जन्म होता है.
_ इसलिए अगर तुम्हारी और मेरी सोच अलग है, तो इसका ये अर्थ नहीं कि हम एक-दूसरे के विरुद्ध हैं.
_ हो सकता है हम दोनों ही उसी सत्य के करीब हों — बस अलग-अलग रास्तों से.!!
किसी की लाख भावनाएं आहत हो.. तुम्हारे पास यदि कोई सत्य है, उसे प्रकट करो.

_ सामाजिक सामंजस्य मत बिठाओ, समाज यहीं रह जाएगा, सत्य साथ जाएगा.
_ भावनाएं नहीं सत्य ही समाज को सुंदर बनाएगा.
_ जिसने कहा सत्य बोलो, लेकिन प्रिय सत्य बोलो, वह काफी चतुर आदमी रहा होगा.
_ अगर इसकी बात मान लेता तो सुकरात सुकरात नहीं होता, जीसस जीसस नहीं होता, कबीर कबीर नहीं होता.
_ भावनाएं आहत होना pychological immaturity [मनोवैज्ञानिक अपरिपक्वता] है.
– Shailendra Sudharma
मुझे कुछ लोग इसलिए नापसंद करते हैं, क्योंकि मैं सच बोलती हूँ.

_ और कुछ लोग इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि मैं सच बोलती हूँ.
_ नापसंद करने वालों की संख्या ज़्यादा है, पसंद करने वालों की कम,
जबकि मैं दोनों के लिए एक ही बोलती हूँ यानी सच.
_ सत्यवादी होने का मैंने कभी इनाम नहीं पाया बल्कि बहुत बार नफ़रत पाई है.
_ फिर भी झूठ बोलना नहीं आया.
_ असत्यभाषी होने का मज़ा क्या होता है, मैं नहीं जान पाई.
_ जीवन में बहुत प्रयोग किए, असत्य के प्रयोग करने से वंचित रह गई.!!
– Manika Mohini
आदमी खुद के सच की तलाश से दूर रहना चाहता है.

_ वो दिखावे के ऐसे झांसे में फंस जाता है कि पूरी ज़िंदगी झूठ में गुजार देता है.
_ ऐसे में होता क्या है ?
_ आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार कर खुद गुजर जाता है.
_ हम जो हैं, वैसा हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो सोचते हैं, वैसा भी हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो नहीं हैं, उसे हम दुनिया के सामने रखना चाहते हैं.
_ क्या विडंबना है.
_ हम पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार देते हैं.
_ अपने सच को कभी स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं.
_ हर किसी को अपने हिस्से का सच समझना चाहिए.
_ हर किसी को अपने सच को स्वीकार करना चाहिए और हर किसी को ज़िंदगी के सच को जीना आना चाहिए.
_ मुझे इस पर आपत्ति नहीं कि आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ को जीता है.
_ मुझे आपत्ति इस बात पर है कि वो इस झूठ के चक्कर में अपनी ज़िंदगी जी नहीं पाता.
_ ज़िंदगी सत्य को जीने का नाम है.. असत्य को ढोने का नहीं.
_ हैरानी- मैं बहुत बार हैरान होता हूं, आदमी किस कदर खुद को उलझा कर सारी उम्र झूठ की बंद तिजोरी में जीता रह जाता है.
_ आइए, आज से कोशिश करें, सत्य को जीने का साहस दिखला पाने का.
_ झूठ से सत्य कहीं अधिक खूबसूरत होगा..!!
– Sanjay Sinha
सच कड़वा होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़वा वो इंसान होता है, जो सच सुनकर अपने अंदर झांकने की बजाय अपनी आवाज ऊंची कर लेता है.

_ ऐसे लोग असल में कमजोर होते हैं, जिनके पास ना तर्क होता है, ना क्षमता, बस शोर होता है.
_ अपनी औकात से ज्यादा बोलना इनके लिए एक आदत नहीं, एक ढाल होती है, जिससे ये अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश करते हैं.
_ जो इंसान कुछ कर नहीं सकता, वो अक्सर चिल्लाता है.
_ उसकी आवाज जितनी ऊंची होती है, उसका अंदर उतना ही खाली होता है.
_ वो सामने वाले को गुस्सा दिलाकर ये साबित करना चाहता है कि वो भी किसी से कम नहीं, जबकि हकीकत ये होती है कि उसे खुद पर ही भरोसा नहीं होता.
_ ऐसे लोग बहस नहीं करते, बस माहौल खराब करते हैं.
_ इनकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि ये अपनी असफलता को दूसरों पर थोपते हैं.
_ खुद कुछ हासिल नहीं कर पाए, तो दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करते हैं.
_ लेकिन सच ये है कि इज्जत चिल्लाने से नहीं, काम करने से मिलती है.
_ और जो ये समझ नहीं पाता, वो जिंदगी भर सिर्फ बोलता ही रह जाता है.
_ ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे सही तरीका उनकी तरह बनना नहीं, बल्कि उन्हें उनकी हकीकत दिखाना है.
_ शांत रहकर, अपने काम से, अपनी सफलता से.
_ क्योंकि जब एक शोर करने वाला इंसान एक मजबूत और शांत इंसान के सामने खड़ा होता है, तो उसकी असली औकात खुद ही सामने आ जाती है.
_ जो सिर्फ बोलता है, वो कभी कर नहीं पाता और जो कर दिखाता है, उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती.
_ यही फर्क है असली और नकली में.
– लेखक की दुनिया

सुविचार – बचपन वाला वो ‘#रविवार’ अब नही आता..- 090

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90 का #दूरदर्शन और हम :”

1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना
2.”#रंगोली“में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना
3.”#जंगल-बुक”देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना
4.”#चंद्रकांता“की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को कोसना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना
9.”#मूक#बधिर“समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नहीं
आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नहीं
आता…।।।
वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता…।।।
#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता…।।।
वो ‘#मोगली‘ वो ‘#अंकल Scrooz’,
#ये जो है जिंदगी’ ‘#सुरभि‘ ‘#रंगोली
और ‘#चित्रहार‘ अब नहीं आता…।।।
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
‘रविवार’ अब नहीं आता…।।।
वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना !
अब हर वार ‘सोमवार’ है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है।
दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो ‘रविवार’ अब नहीं
आता…।।।
बचपन वाला वो ‘#रविवार‘ अब नही
आता…।।।

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